भोपाल बन रहा अगला भागीरथपुरा? नलों से आ रहा सीवेज का पानी, 90% सैंपल फेल

Amresh Kushwaha | Aug 01, 2026, 08:59 IST
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भोपाल में नलों से आ रहा सीवेज का पानी
भोपाल में नलों से आ रहा सीवेज का पानी

भोपाल के यूका कारखाने के आसपास 19 बस्तियों में पानी दूषित मिला है। यहां 63 में से 43 सैंपल में खतरनाक फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाया गया है। बड़े तालाब से सप्लाई वाले 90% सैंपल फेल हुए है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • भोपाल के यूका कारखाने के आसपास पानी दूषित मिला है।
  • 19 बस्तियों में हालात गंभीर बताए जा रहे हैं।
  • 63 में से 43 सैंपल में खतरनाक बैक्टीरिया पाया गया है।
  • बड़े तालाब से सप्लाई वाले 90% सैंपल फेल हुए हैं।
  • नगर निगम ने सभी आरोपों को निराधार बताया है।
भोपाल नगर निगम के पानी सप्लाई सिस्टम पर गंभीर सवाल उठे हैं। यूका (यूनियन कार्बाइड) कारखाने के आसपास की बस्तियों में पानी की जांच कराई गई। इसमें चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। बड़े तालाब से सप्लाई होने वाले पानी के 90 फीसदी सैंपल में सीवेज वाला बैक्टीरिया मिला। कोलार सप्लाई के भी 25 फीसदी सैंपल फेल हो गए हैं।

पानी की जांच में क्या मिला

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पानी की जांच मुख्य रूप से यूका कारखाने के आसपास के इलाकों में की गई। कुल 63 सैंपल लिए गए थे। इनमें से 43 सैंपल यानी 68 फीसदी में फीकल कोलीफॉर्म (Faecal Coliform) बैक्टीरिया पाया गया। यह बैक्टीरिया गंदगी और सीवेज के पानी में मिलने की पुष्टि करता है।

तारा एक्वाचेक H2S (Hydrogen Sulphide) वायल टेस्ट से पानी की जांच की गई। इस तरीके से 30 बस्तियों में पानी टेस्ट किया गया। इनमें से 19 बस्तियों में सप्लाई का पानी दूषित मिला। यानी हर तीसरी बस्ती में पानी पीने लायक नहीं है।

तीन जगहों से मिलता है पानी

शहर में तीन मुख्य स्रोतों से पानी की सप्लाई होती है। ये स्रोत हैं बड़ा तालाब, कोलार और नर्मदा। इनमें बड़े तालाब से जुड़े 42 नमूनों में से 38 पॉजिटिव मिले हैं। यानी लगभग 90 फीसदी सैंपल में बैक्टीरिया की पुष्टि हुई।

कोलार सप्लाई के 16 सैंपल में से 4 पॉजिटिव मिले हैं। यह करीब 25 फीसदी है। हालांकि नर्मदा से जुड़े सभी चार नमूने निगेटिव पाए गए। यानी नर्मदा का पानी अभी तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति में है।

2018 का हलफनामा और आज की हकीकत

साल 2018 में नगर निगम ने अदालत में एक हलफनामा दिया था। इसमें सीवेज और पेयजल व्यवस्था सुधारने का वादा किया गया था। भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन (Bhopal Group for Information and Action) नाम की संस्था ने दावा किया है कि आठ साल बाद भी हालात नहीं बदले। संस्था का कहना है कि दूषित जलापूर्ति के जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही अब तक तय नहीं हुई है।

बीमारियों का बढ़ता खतरा

गैस प्रभावित इलाकों की करीब एक लाख आबादी पर जलजनित गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। गैस पीड़ितों से जुड़े संगठनों का कहना है कि दूषित पानी की वजह से इलाके में कई बीमारियां बढ़ रही हैं। इनमें टाइफाइड, उल्टी-दस्त, पेट संबंधी संक्रमण और पीलिया शामिल हैं। संगठनों का आरोप है कि सरकार के पास इन बीमारियों का समेकित डेटा भी उपलब्ध नहीं है।

ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई गड़बड़ी

गैस पीड़ित संगठनों के दावों के बाद मौके पर जाकर हकीकत परखी गई। कई कॉलोनियों में यह देखा गया कि पानी की पाइपलाइन खुली सीवेज लाइनों के बीच से गुजर रही है। नवाब कॉलोनी में पाइपलाइन और वॉल्व के पास कचरा और गंदगी जमा मिली। कई घरों में पेयजल की लाइन में लीकेज भी पाया गया।

यही हाल ब्लू मून कॉलोनी, शिवशक्ति नगर और आसपास की कुछ अन्य कॉलोनियों का भी है। इन कॉलोनियों के रहने वालों ने बाल्टियों में भरा गंदा पानी दिखाया। उनका कहना है कि यही पानी वे रोज पी रहे हैं। लोगों में इस वजह से डर और गुस्सा दोनों देखा जा रहा है।

नगर निगम ने आरोपों को नकारा

हालांकि नगर निगम ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। जलकार्य शाखा के अधीक्षण यंत्री (Superintending Engineer) उदित गर्ग ने अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि इस साल निगम करीब 27 हजार सैंपल ले चुका है। उन्होंने बताया कि कहीं भी फीकल कोलीफॉर्म की पुष्टि नहीं हुई है। उनके मुताबिक जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं।

निगम और स्थानीय संगठनों के दावों में साफ अंतर देखने को मिल रहा है। एक तरफ जांच रिपोर्ट में बैक्टीरिया की पुष्टि हो रही है। दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारी किसी भी गड़बड़ी से इनकार कर रहे हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। साफ पानी को लेकर अब भी असमंजस बना हुआ है।

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जानें क्या है इंदौर का भागीरथपुरा कांड?

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दिसंबर 2025 के आखिरी दिनों में दूषित पानी की वजह से एक बड़ा स्वास्थ्य संकट सामने आया। दरअसल, नर्मदा जल की पाइपलाइन में सीवेज और ड्रेनेज लाइन का पानी मिल गया था।

इससे फीकल कोलिफॉर्म और ई-कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया फैल गए। इसके अलावा, इलाके के बोरवेल का गंदा पानी नर्मदा की पाइपलाइन में घुसकर पीने के पानी को जहरीला बना रहा था।

इस वजह से उल्टी और दस्त जैसी बीमारियां फैल गईं, और 3500 से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हुए। इसे भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के मुख्य कारण के तौर पर बताया जा रहा है।

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