पूर्व सीएम कमलनाथ की हड़पी जमीन, फर्जी वसीयत और मृत्यु प्रमाण पत्र से किया खेल, 2 गिरफ्तार

Aman Vaishnav | Oct 02, 2026, 11:21 IST
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पूर्व सीएम कमलनाथ की हड़पी जमीन, 2 आरोपी गिरफ्तार, बाकियों की जांच जारी
पूर्व सीएम कमलनाथ की हड़पी जमीन, 2 आरोपी गिरफ्तार, बाकियों की जांच जारी

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के पिता की जमीन हड़पने की कोशिश हुई। आरोपियों ने फर्जी वसीयत और मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराया। इसके बाद 26 बीघा जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया। कमलनाथ की शिकायत पर पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • कमलनाथ की शिकायत पर नजीबाबाद थाने में केस दर्ज हुआ।
  • आरोप है कि फर्जी दस्तावेज बनाकर उनकी 26 बीघा जमीन पर कब्जा हुआ है।
  • पुलिस ने इस मामले में धर्मपाल सिंह और विजय शंकर को गिरफ्तार किया है।
  • अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
  • पुलिस के मुताबिक जमीन को कब्जा मुक्त कराने की प्रक्रिया चल रही है।

1998 की वसीयत, 2003 का प्रमाण पत्र

अब जरा पीछे चलते हैं। कमलनाथ ने एफआईआर में जमीन का ब्योरा दिया। उनके मुताबिक नजीबाबाद तहसील के अमीखानपुर गांव में पिता की 90 बीघा जमीन है।

इन आरोपियों ने 10 अक्टूबर 1998 की एक वसीयत तैयार की। यह वसीयत रजिस्ट्रार के यहां पंजीकृत नहीं थी। कमलनाथ के पिता महेंद्रनाथ का मृत्यु प्रमाण पत्र 10 अप्रैल 2003 को नजीबाबाद से जारी कराया गया। कमलनाथ के मुताबिक पिता की मृत्यु 7 सितंबर 2004 को हुई थी। जगह दिल्ली का एस्कार्ट अस्पताल बताई गई है।

पुलिस के मुताबिक इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर 26 बीघा जमीन पर कब्जा हुआ। बाकी जमीन के बारे में भी जांच चल रही है।

मध्यप्रदेश की जमीन का केस छत्तीसगढ़ में क्यों चलेगा? हाई कोर्ट ने CPC धारा 17 के तहत दिया फैसला | Why will the case of land in Madhya Pradesh be heard in Chhattisgarh? High Court gave decision under CPC Section 17
मध्यप्रदेश की जमीन का केस छत्तीसगढ़ में क्यों चलेगा? हाई कोर्ट ने CPC धारा 17 के तहत दिया फैसला
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मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की जमीन से जुड़े विवाद में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि अगर एक ही विवाद से जुड़ी जमीन अलग-अलग राज्यों या अदालतों की सीमा में आती है तो मुकदमा उस अदालत में भी चल सकता है जहां संबंधित संपत्तियों में से कोई एक स्थित हो।
मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की जमीन से जुड़े विवाद में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि अगर एक ही विवाद से जुड़ी जमीन अलग-अलग राज्यों या अदालतों की सीमा में आती है तो मुकदमा उस अदालत में भी चल सकता है जहां संबंधित संपत्तियों में से कोई एक स्थित हो।

विरासत दर्ज कराने से खुला मामला

इस कहानी का असली मोड़ यहीं से शुरू हुआ। जानकारी के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Former Chief Minister Kamal Nath) ने 18 मई 2026 को नजीबाबाद तहसीलदार के यहां आवेदन किया था। वे जमीन पर विरासत (वारिस का नाम रिकॉर्ड में लिखवाना) दर्ज कराना चाहते थे।

इसके बाद लेखपाल ने जमीन को विवादित बताते हुए रिपोर्ट भेजी। तब जाकर कमलनाथ को पता चला कि नजीबाबाद कोर्ट में वाद चल रहा है। वाद का नाम धर्मपाल बनाम ग्राम सभा है।

इसी वाद में धर्मपाल सिंह ने कथित वसीयत दाखिल की थी। यह वसीयत महेंद्रनाथ के नाम से थी। कमलनाथ ने फिर जानकारी जुटाई और पुलिस से शिकायत की।

किन लोगों पर दर्ज हुआ केस

जमीन कब्जे के इस मामले में चार लोगों पर केस दर्ज हुआ है। इनमें नजीबाबाद के अमीखानपुर निवासी जसविंदर ढिल्लो का नाम है।

श्यामली मोहल्ला निवासी विजय शंकर भी नामजद हैं। वे मूल रूप से देवरिया जिले के बरठी गांव के रहने वाले हैं। महावतपुर बिल्लौच निवासी धर्मपाल सिंह और लेखपाल डेविड पर भी केस है।

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गुजरात पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला कांग्रेस में वापसी को तैयार: कहा-BJP सरकार को हटाने के लिए कांग्रेस में शामिल होंगे
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गुजरात पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला कांग्रेस में जाने को तैयार हैं। उन्होंने 29 सितंबर यानी मंगलवार को इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत कर यह जानकारी दी है। वाघेला ने कहा कि BJP सरकार को हटाने के लिए वे कांग्रेस में शामिल होंगे। इसके लिए उन्होंने गुजरात कांग्रेस के नेताओं से बातचीत की है। हालांकि, राहुल गांधी से मुलाकात के बाद ही वे कांग्रेस में वापसी करेंगे।
गुजरात पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला कांग्रेस में जाने को तैयार हैं। उन्होंने 29 सितंबर यानी मंगलवार को इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत कर यह जानकारी दी है। वाघेला ने कहा कि BJP सरकार को हटाने के लिए वे कांग्रेस में शामिल होंगे। इसके लिए उन्होंने गुजरात कांग्रेस के नेताओं से बातचीत की है। हालांकि, राहुल गांधी से मुलाकात के बाद ही वे कांग्रेस में वापसी करेंगे।

जमीन तीन दशक से बटाई पर थी

पुलिस के मुताबिक यह जमीन महेंद्रनाथ ने खरीदी थी। करीब तीन दशक से यह जमीन बटाई पर दी गई थी। बटाई यानी उपज बांटने की शर्त पर खेती के लिए जमीन देना। जमीन दूर क्षेत्र में थी और परिवार लंबे समय तक वहां नहीं गया। सोचिए एक बार। दूर की जमीन पर सालों तक कोई न जाए, तो क्या होगा?

एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने क्या बताया

एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने इस मामले की जानकारी दी है। उनके मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री के पिता ने जमीन बटाई पर दे रखी थी। लंबे समय तक कोई जमीन देखने नहीं आया। इसी का फायदा उठाकर आरोपियों ने कब्जे की कोशिश की।

लेखपाल की भूमिका की जांच

एफआईआर में नामजद लेखपाल डेविड की भूमिका की भी जांच हो रही है। बताया गया है कि बुधवार को वह नजीबाबाद तहसील से रिलीव हुआ। उसका तबादला धामपुर तहसील में हुआ है।

पुलिस के मुताबिक लेखपाल ने धर्मपाल का कब्जा बताया था। यह बात तहसील में कही गई थी। करीब तीन साल पहले एंटी करप्शन टीम ने उसे रिश्वत लेते दबोचा था। पुलिस इस मामले में भी उसकी भूमिका की जांच कर रही है।

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प्रिंटिंग प्रेस से प्रमाण पत्र का शक

पुलिस के मुताबिक यह प्रमाण पत्र कथित तौर पर प्रिंटिंग प्रेस से बनवाया गया था। पुलिस मामले में शामिल लोगों की जांच कर रही है। दस्तावेज तैयार कराने वाले नेटवर्क की भी जांच हो रही है।

धर्मपाल पर पहले से दो मुकदमे

धर्मपाल के खिलाफ पहले से दो मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इसी तरीके से किसी और की जमीन पर भी कब्जा हुआ?

कब्जा मुक्त कराने की प्रक्रिया

एसपी ने बताया कि धर्मपाल सिंह और विजय शंकर गिरफ्तार किए गए हैं। पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है। जमीन पूरी तरह कब्जा मुक्त कराकर कमलनाथ को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है।

कमलनाथ ने फोन पर एसपी को दी जानकारी

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamal Nath) ने एसपी को मोबाइल फोन पर पूरी जानकारी दी थी। इसके बाद उन्होंने वाट्सऐप और ईमेल से पुलिस को तहरीर भेजी। तहरीर यानी लिखित शिकायत। इसी शिकायत पर नजीबाबाद थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।

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