बिलौआ खदानों पर HC सख्त, कलेक्टर से पूछा- अवैध खनन की जिम्मेदारी किसकी?
Ratan Kumar Mishra | Aug 11, 2026, 22:05 IST
Photograph: (THESOOTR)
GWALIOR. ग्वालियर के बिलौआ और रफादपुर खनन मामले में हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन पर नाराजगी व्यक्ति की है। कलेक्टर रुचिका चौहान कोर्ट में मौजूद रहीं। न्यायालय ने कहा कि लगातार खनन हो रहा है इसे रोकने की जिम्मेदारी किसके पास है।
समझें क्या है पूरा मामला…
- बिलौआ और रफादपुर में खनन को लेकर हाईकोर्ट में मामला चल रहा है।
- अदालत ने कई खदानों के काम पर रोक लगाई है।
- खदान क्षेत्र की ड्रोन रिकॉर्डिंग अदालत में दिखाई गई।
- कलेक्टर रुचिका चौहान सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रहीं।
- खनिज अधिकारियों से जुड़ी जांच के दस्तावेज भी रखे गए।
खनन क्षेत्र के साथ क्रेशर इलाकों की तस्वीरें भी देखी गईं। मामले में खनिज विभाग के काम पर भी सवाल उठे। खनिज अधिकारियों से जुड़ी जांच के दस्तावेज कोर्ट में रखे गए। बिलौआ और रफादपुर की खदानों पर क्यों है विवाद यह मामला खनन पट्टों और कथित अवैध खनन से जुड़ा है।
खदानों के पट्टों के नवीनीकरण पर उठे सवाल
ड्रोन से खदानों की तस्वीरें क्यों कराई गईं
अदालत ने रिकॉर्डिंग को सुनवाई के दौरान देखा। कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी भी रही। कोर्ट में रिकॉर्डिंग देखने के बाद बहस आगे बढ़ी।
क्यों अहम रही कलेक्टर की मौजूदगी
कलेक्टर सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से मौजूद रहीं। उनके सामने खनन क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा हुई। अदालत ने निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल पूछे।
खनिज विभाग ने निगरानी बढ़ाने के उपाय बताए
बिलौआ के बाद बिजौली रास्ते की भी चर्चा
खनिज अधिकारियों से जुड़ी जांच का मुद्दा उठा
वर्तमान प्रभारी अधिकारी पंकज मिश्रा का नाम भी आया। उनसे जुड़ी लोकायुक्त जांच के दस्तावेज पेश होने की बात है। यह जांच अभी आरोप तय होने के बराबर नहीं मानी जा सकती। जांच का अंतिम नतीजा सामने आना बाकी है। अदालत अब रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति दोनों देख रही है इस मामले में सिर्फ कागजी रिकॉर्ड ही नहीं देखा जा रहा।
अदालत ने जमीन पर वास्तविक स्थिति जानने की कोशिश की। इसी वजह से ड्रोन रिकॉर्डिंग को अहम माना जा रहा है। अदालत के सामने रिकॉर्डिंग और सरकारी दस्तावेज दोनों रखे गए। सुनवाई में सुबह से शाम तक बहस चलने की जानकारी है। मामले में आगे भी अदालत की निगरानी बनी रह सकती है। अब खनन क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था पर नजर रहेगी।
अदालत की सख्ती से प्रशासन पर बढ़ा दबाव
हाईकोर्ट की मौजूदा सुनवाई ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया। अब प्रशासन को अदालत के निर्देशों का पालन करना होगा। खनन और परिवहन पर निगरानी इसका बड़ा हिस्सा रहेगी।
मामले में आगे क्या हो सकता है
खदानों में नियमों के पालन की जांच जारी रह सकती है। लोकायुक्त से जुड़े रिकॉर्ड पर भी अदालत विचार कर सकती है। फिलहाल मामले में अंतिम फैसला आना बाकी है। अगली सुनवाई में तस्वीर और साफ हो सकती है।
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