भाजपा में नियुक्तियों को लेकर नई गाइडलाइन से जिलों में हड़कंप, तैयार सूचियों पर मंडराया संशय

Ramanand Tiwari | Mar 09, 2026, 23:28 IST
Photograph: (thesootr)
भाजपा में नियुक्तियों को लेकर नई गाइडलाइन से जिलों में हलचल मच गई है। पुराने नामों में फेरबदल होने की संभावना से दावेदारों के बीच कन्फ्यूजन बढ़ गया है।

News In Short

  • भाजपा की नई गाइडलाइन से जिलों में बढ़ी हलचल।
  • निगम-मंडल और अन्य नियुक्तियों की सूचियों में फेरबदल के संकेत।
  • दावेदारों में कन्फ्यूजन, नेताओं के यहां बढ़ी सक्रियता।
  • जिला और संभाग प्रभारियों की भूमिका बढ़ने की चर्चा।
  • भविष्य की नियुक्तियों में उनकी सहमति अहम मानी जा रही है।

News In Detail

मध्यप्रदेश बीजेपी में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर नया सियासी समीकरण बनता दिखाई दे रहा है। पार्टी द्वारा हाल ही में जिलों और संभागों में नियुक्त किए गए प्रभारियों की सक्रियता और केंद्रीय नेतृत्व की नई गाइडलाइन के बाद जिलों में हलचल तेज हो गई है।



दरअसल मंडल, निगम-मंडलों, एल्डरमैन और अन्य अशासकीय पदों के लिए कई जिलों में दावेदारों के नाम लगभग तय माने जा रहे थे और सूची तैयार होने की स्थिति में थी। लेकिन अब जिला और संभाग प्रभारियों के हस्तक्षेप की चर्चा के बाद इन सूचियों में फेरबदल की संभावना जताई जा रही है।



इसी कारण पद की उम्मीद लगाए बैठे कई दावेदारों के बीच कन्फ्यूजन की स्थिति बन गई है और जिलों में एक तरह का हड़कंप मच गया है।



तैयार सूचियों पर पड़ सकता है असर

सूत्रों के मुताबिक कई जिलों में निगम-मंडलों की नियुक्ति और अन्य नियुक्तियों के लिए संभावित नामों की सूची पहले ही तैयार हो चुकी थी। कई दावेदार अपने नाम लगभग तय मानकर आश्वस्त भी हो गए थे, लेकिन नई व्यवस्था और प्रभारियों की सक्रियता के बाद अब इन सूचियों में बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। इससे पहले से तय मानी जा रही कई नियुक्तियों पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं।



दावेदारों ने फिर शुरू की “गणेश परिक्रमा”

नई स्थिति बनने के बाद कई जिलों में दावेदार फिर से सक्रिय हो गए हैं। जो नेता और कार्यकर्ता पहले अपने नाम को लेकर आश्वस्त थे, वे अब दोबारा नेताओं और प्रभारियों के संपर्क में दिखाई दे रहे हैं। कई जगहों पर दावेदार समर्थन जुटाने के लिए नेताओं के यहां “गणेश परिक्रमा” करते भी नजर आ रहे हैं।



जिलों और भोपाल के बीच अटकी थीं कई सूचियां

संगठन के भीतर यह भी चर्चा है कि कई नियुक्तियों की सूचियां पहले से ही जिलास्तर और भोपाल के बीच सामंजस्य नहीं बन पाने के कारण अटकी हुई थीं। ऐसे में अब नई गाइडलाइन और प्रभारियों की भूमिका बढ़ने के बाद इन सूचियों की पूरी प्रक्रिया फिर से प्रभावित हो सकती है।



केंद्रीय नेतृत्व के नाम पर छोड़े जा रहे “शिगूफे”?

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी सामने आ रही है कि कई बार सोशल मीडिया और संगठनात्मक हलकों में यह संदेश दिया जाता है कि सूची केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंच चुकी है या वहां से हरी झंडी मिल चुकी है अथवा जल्द मिल जाएगी।


हालांकि, सूत्रों का कहना है कि कई बार ऐसी बातें केवल सियासी शिगूफों के तौर पर भी छोड़ी जाती हैं, ताकि संभावित नियुक्तियों को लेकर उठने वाला आक्रोश सीधे प्रदेश नेतृत्व की बजाय केंद्रीय नेतृत्व की ओर मोड़ दिया जाए।



नई व्यवस्था में प्रभारियों की सहमति होगी जरूरी

सूत्रों के मुताबिक अब संगठन में यह व्यवस्था लागू की जा रही है कि किसी भी महत्वपूर्ण नियुक्ति पर अंतिम निर्णय लेने से पहले संबंधित जिला और संभाग प्रभारी की सहमति लेना आवश्यक होगा। केंद्रीय नेतृत्व की इसी गाइडलाइन के तहत प्रदेश संगठन ने जिलों और संभागों में प्रभारियों को सक्रिय भूमिका देने का निर्णय लिया है।



नई नियुक्तियों का संभावित फॉर्मूला

आने वाले समय में संगठन और नगर स्तर की नियुक्तियों के लिए जो प्रक्रिया तय की जा रही है, उसका ढांचा कुछ इस तरह हो सकता है-



  • विधायक, सांसद और वरिष्ठ नेता संभावित नाम सुझाएंगे।
  • पहले जिला स्तर पर उन नामों पर विचार होगा।
  • इसके बाद संभागीय प्रभारी अपनी राय देंगे।
  • अंतिम सूची प्रदेश संगठन को भेजी जाएगी।
  • अंतिम फैसला प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर होगा।

निगम-मंडलों की नियुक्तियों में भी बढ़ेगी भूमिका

भाजपा आगामी समय में निगम, मंडलों और अन्य अशासकीय पदों पर भी नियुक्तियां करने जा रही है। इन नियुक्तियों में भी प्रभारियों की राय को महत्व दिए जाने की संभावना है। इससे संगठन के भीतर संतुलन और जवाबदेही बनाए रखने की कोशिश मानी जा रही है।



जिलों के प्रभारियों को मिली नई जिम्मेदारी

भाजपा ने संभागीय संगठन मंत्री और जिला प्रभारी की पारंपरिक भूमिका में भी बदलाव किया है। अब पार्टी ने अपने ही नियुक्त प्रभारियों को अधिक जिम्मेदारी देने का फैसला किया है। खास बात यह है कि जिलों में जो प्रभारी बनाए गए हैं, उन्हें उनका गृह जिला नहीं सौंपा गया है, ताकि निष्पक्षता बनी रहे।



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