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Photograph: (the sootr)
BHOPAL.मध्यप्रदेश में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के बाद अब भोपाल की नरेला विधानसभा सीट पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने निर्वाचन कार्यालय पहुंचकर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के दस्तावेज चुनाव आयोग को सौंपे। उनका आरोप है कि कई घरों के पते पर वास्तविक संख्या से कई गुना अधिक मतदाता दर्ज कर दिए गए, जबकि कुछ असली मतदाताओं के नाम सूची से गायब हैं।
दिग्विजय सिंह का दावा है कि यह सिर्फ तकनीकी गलती नहीं बल्कि संगठित तरीके से मतदाता सूची में छेड़छाड़ का मामला हो सकता है। उन्होंने तीन मकान मालिकों के शपथपत्र भी आयोग को दिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। चुनाव आयोग ने शिकायत स्वीकार कर जांच का भरोसा दिया है, लेकिन इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
मुख्य आरोप एक नजर में
- नरेला विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में असामान्य संख्या में नाम दर्ज होने का आरोप
- कुछ घरों में रहने वाले लोगों से कई गुना ज्यादा मतदाता सूची में दर्ज
- कई वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटने का भी दावा
- चुनाव आयोग को तीन मकान मालिकों के शपथपत्र सौंपे गए
- फर्जी नाम जोड़ने में बीएलओ की लापरवाही का आरोप
- पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
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नरेला के तीन मकानों से उठे सवाल
दिग्विजय सिंह ने जिन उदाहरणों का जिक्र किया, वे भोपाल के करोंद क्षेत्र की रतन कॉलोनी से जुड़े बताए गए हैं। यहां कुछ मकानों के पते पर मतदाताओं की संख्या इतनी अधिक दर्ज है कि स्थानीय लोग खुद हैरान हैं। इसी आधार पर चुनाव आयोग के सामने शिकायत रखी गई है।
मकान नंबर 21: 4 लोग रहते हैं, सूची में 40 नाम
मकान मालिक हमीर सिंह यादव के अनुसार उनके घर में छह कमरे हैं और परिवार के सिर्फ चार सदस्य मतदाता हैं। लेकिन मतदाता सूची में उसी पते पर करीब 40 नाम दर्ज बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि सूची में जिन लोगों के नाम हैं, उनमें से अधिकांश को वे पहचानते तक नहीं।
मकान नंबर 10: आठ की जगह 36 मतदाता
दूसरा मामला कमलेश कुमार गुप्ता के घर का बताया गया है। उनके अनुसार घर में लगभग आठ मतदाता हैं, लेकिन आधिकारिक सूची में उसी पते पर करीब 36 नाम दर्ज पाए गए। इससे स्थानीय स्तर पर संदेह और गहरा गया है।
मकान नंबर 2: सात लोग, लेकिन सूची में 37
तीसरा उदाहरण पोखन लाल साहू के मकान का दिया गया है। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में सात मतदाता हैं, लेकिन मतदाता सूची में उसी पते पर करीब 37 लोगों के नाम दर्ज हैं। मकान मालिकों ने शपथपत्र में साफ लिखा है कि सूची में दर्ज कई लोग कभी उनके घर पर नहीं रहे।
सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मतदाता सूची तैयार करने के दौरान बीएलओ द्वारा सही तरीके से घर-घर सत्यापन नहीं किया गया। इसी वजह से कई ऐसे नाम सूची में शामिल हो गए जो वास्तविक रूप से उस पते से जुड़े ही नहीं हैं।
दिग्विजय सिंह की मांग
दिग्विजय सिंह ने चुनाव आयोग से कहा है कि मामले की गहराई से जांच कर फर्जी नामों को हटाया जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
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चुनाव आयोग ने दिया जांच का भरोसा
दिग्विजय सिंह के अनुसार चुनाव आयोग ने उनकी शिकायत और दस्तावेज स्वीकार कर लिए हैं और मामले की जांच का आश्वासन दिया है। इस दौरान उनके साथ शिकायतकर्ता रतन कुमार गुप्ता, पोखन लाल साहू, देव नारायण विश्वकर्मा सहित कांग्रेस के कई नेता भी मौजूद रहे।
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