रायपुर से जारी हुए BSF कॉन्स्टेबल की नौकरी का फर्जीवाड़ा के जॉइनिंग लेटर

Sourabh Bhatnagar | Feb 11, 2025, 11:54 IST
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ग्वालियर में बीएसएफ ट्रेनिंग सेंटर में 11 फर्जी अभ्यर्थी पकड़े गए हैं, जिन्होंने 12 लाख रुपए में कॉन्स्टेबल पद के लिए दलालों से सौदा किया था। उन्हें बिना लिखित परीक्षा और फिजिकल टेस्ट के सीधे जॉइनिंग लेटर देकर नियुक्ति दिलाने का झांसा दिया गया।

ग्वालियर के बीएसएफ टेकनपुर ट्रेनिंग सेंटर में 11 फर्जी अभ्यर्थी पकड़े गए। ये अभ्यर्थी 12 लाख रुपए देकर दलालों से फर्जी जॉइनिंग लेटर प्राप्त कर आए थे। छत्तीसगढ़ के सॉल्वर परीक्षा में बैठाए गए थे। बायोमैट्रिक जांच में फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। पुलिस दलालों के नेटवर्क और रायपुर सेंटर की भूमिका की जांच कर रही है।



कैसे हुआ फर्जीवाड़े का पर्दाफाश

कद-काठी देखकर चुने गए थे अभ्यर्थी

दलालों ने ऐसे उम्मीदवारों को चुना जो कद-काठी में आरक्षक पद के लिए उपयुक्त दिखते थे। यह संपर्क सितंबर 2024 में परीक्षा से ठीक पहले हुआ। कोचिंग और ट्रेनिंग सेंटरों के आसपास घूमते दलालों ने भरोसा दिलाया कि उनकी "सेटिंग" के जरिए नौकरी पक्की हो सकती है। इसके बदले हर अभ्यर्थी से 12 लाख रुपये मांगे गए, जिनमें से 50% राशि एडवांस के रूप में ली गई।





अभ्यर्थियों ने जमीन और ऑटो बेचकर चुकाए पैसे

अभ्यर्थियों को नौकरी का इतना भरोसा दिलाया गया कि उन्होंने अपनी संपत्तियां बेच दीं। अलीगढ़ के संदीप कुमार ने एक बीघा जमीन बेचकर 8 लाख रुपये दिए, जबकि आगरा के दलवीर ने अपना ऑटो बेचकर एडवांस राशि का भुगतान किया। कुल मिलाकर, इन 9 अभ्यर्थियों से दलालों ने 28.25 लाख रुपये की रकम वसूल ली।



9 अभ्यर्थियों ने जमा किए हैं 28.25 लाख रुपए

दलालों ने इन 9 फर्जी अभ्यर्थियों से अभी तक 28.25 लाख रुपए बतौर एडवांस ले लिया है। सबसे बड़ी रकम एक अभ्यर्थी ने 8 लाख रुपए दी है, यह वही अभ्यर्थी है जिसने अपनी एक बीघा जमीन बेची है। इसके अलावा एक अभ्यर्थी ने 6 लाख रुपए, एक अभ्यर्थी ने चार लाख रुपए दिए हैं। इसके अलावा एक अभ्यर्थी ने 3.5 लाख रुपए, दो अभ्यर्थियों ने दो-दो लाख, एक ने 75 हजार और दो अभ्यर्थी ने सिर्फ 50-50 हजार रुपए बतौर एडवांस दिए हैं। सभी को 12-12 लाख रुपए जॉइनिंग के बाद देने थे।



फर्जी जॉइनिंग लेटर का सच

रायपुर सेंटर पर पुलिस की जांच

ग्वालियर पुलिस की एक टीम रायपुर पहुंच गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वहां से फर्जी जॉइनिंग लेटर कैसे जारी हुए। वे यह भी जांच कर रहे हैं कि जिन अभ्यर्थियों के नाम पर ये लेटर जारी हुए, वे सही कैंडिडेट थे या सॉल्वरों की मदद से फर्जीवाड़ा किया गया। इस मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस फर्जी अभ्यर्थियों, दलालों और संबंधित अधिकारियों के बीच की कड़ियों को खंगाल रही है।



इन नामों से बैठे थे अभ्यर्थी

मूल अभ्यर्थी का नाम

इन नामों से बैठे सॉल्वर

पवन गुर्जर, निवासी- फतेहाबाद, आगरासंदीप कुमार, निवासी रविदास नगर, छत्तीसगढ़
संदीप कुमार, अलीगढ़संदीप पुत्र सीताराम, निवासी नया थाना, छत्तीसगढ़
संदीप सिंह नि. सावलियापुरा, धौलपुरयोगेश कुमार, निवासी राजनांदगांव, छत्तीसगढ़
दलवीर सिंह, निवासी- फतेहाबाद, आगरादेवेश पाल, निवासी बलोड, छत्तीसगढ़
रामदास सिंह, निवासी- मुरैना डोंगरगढ़संजीत कुमार, निवासी छत्तीसगढ़
अजय राजावत, निवासी- गणेशपुरा, मुरैनासंजीत कुमार, राजनांदगांव, छत्तीसगढ़
आकाश सिंह, निवासी- फैजाबादउत्तम पटेल, निवासी-डोंगरगढ़, छत्तीसगढ़
अनिल कुमार सिंह, अंबाह, मुरैनाअरुण सिंह, निवासी-निवासी- बिलासपुर, छत्तीसगढ़
छोटू सिंह गुर्जर, निवासी - धौलपुरशिवप्रकाश, निवासी-डोंगरगढ़, छत्तीसगढ़

BSF टेकनपुर में पकड़े गए फर्जी अभ्यर्थियों की घटना का टाइमलाइन

21-25 जनवरी 2025

  • घटना की शुरुआत: बीएसएफ टेकनपुर ट्रेनिंग अकादमी में चयनित अभ्यर्थियों की दस्तावेज और बायोमैट्रिक जांच शुरू हुई।
  • फर्जीवाड़े का खुलासा: 9 अभ्यर्थियों के दस्तावेज और बायोमैट्रिक डेटा में गड़बड़ी पकड़ी गई।
  • फर्जी अभ्यर्थी: जांच में सामने आया कि परीक्षा के लिए छत्तीसगढ़ के सॉल्वर बैठाए गए थे। दस्तावेजों पर नाम और डिटेल्स तो असली अभ्यर्थियों के थे, लेकिन फोटो और बायोमैट्रिक डेटा सॉल्वर का था।

26-30 जनवरी 2025

  • बीएसएफ अधिकारियों की कार्रवाई: दस्तावेज सत्यापन में फर्जी अभ्यर्थियों की पहचान करने के बाद टेकनपुर बीएसएफ अकादमी के अधिकारियों ने बिलौआ थाना पुलिस को सूचना दी।
  • एफआईआर दर्ज: सहायक प्रशिक्षण केंद्र निरीक्षक ब्रह्मपाल सिंह ने रात 11 बजे पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

31 जनवरी - 6 फरवरी 2025



  • पूछताछ और जांच: पुलिस ने प्रारंभिक पूछताछ में फर्जी अभ्यर्थियों से जानकारी ली।
  • अभ्यर्थियों ने बताया कि परीक्षा में पास कराने के लिए सॉल्वर गैंग से संपर्क किया गया था।
  • छत्तीसगढ़ के सॉल्वर परीक्षा में बैठे थे। आधी राशि परीक्षा से पहले और बाकी पास होने के बाद देने की डील हुई थी।

सॉल्वर गैंग का पता: सभी सॉल्वर छत्तीसगढ़ से थे। पुलिस को शक है कि यह एक संगठित गिरोह है, जिसने कई उम्मीदवारों के लिए यह फर्जीवाड़ा किया।



7 फरवरी 2025

रिमांड प्रक्रिया: पकड़े गए 9 फर्जी अभ्यर्थियों को कोर्ट में पेश कर पुलिस ने रिमांड पर लिया। आगे की जांच में सॉल्वर गैंग और उनके नेटवर्क का पता लगाया जाएगा।



11 फरवरी 2025

  • मीडिया रिपोर्ट: घटना को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित हुई। यह खुलासा हुआ कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने फर्जीवाड़ा करके परीक्षा पास की थी।
  • आगे की जांच: पुलिस टीम सॉल्वर गैंग और रायपुर में स्थित अन्य संभावित लिंक की पड़ताल में जुट गई है।

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