BU के दीक्षांत समारोह के बिलों ने उड़ाए सबके होश, आधा कप चाय के लिए दिए 450 रुपए
भोपाल की बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी (BU) इन दिनों अपने एक खास मामले को लेकर चर्चा में है। मामला यूनिवर्सिटी के 2022-23 के दीक्षांत समारोह के खर्चों से जुड़ा है। RTIके जरिए सामने आए बिलों में कुछ ऐसे भुगतानों का खुलासा हुआ है, जिन पर अब सवाल उठ रहे हैं।
दीक्षांत समारोह किसी भी यूनिवर्सिटी का बड़ा और खास आयोजन होता है। इस कार्यक्रम में छात्रों को डिग्री और मेडल दिए जाते हैं। लेकिन BU में इस बार समारोह की तैयारियों से ज्यादा चर्चा उसके खर्चों को लेकर हो रही है।
आरटीआई के जरिए सामने आए बिलों देखकर लोग हैरान हैं। इनमें चाय से लेकर वाहन किराए तक के खर्च शामिल हैं। अब इन्हीं बिलों को लेकर यूनिवर्सिटी की व्यवस्था और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
आधा कप चाय के 450 रुपए
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात चाय के बिल को लेकर सामने आई है। आरटीआई से मिले दस्तावेजों के मुताबिक, आधी कप काली चाय के लिए 450 रुपए का भुगतान किया गया। जबकि आमतौर पर बाजार में एक कप चाय की कीमत करीब 20 से 30 रुपए होती है।
इसके अलावा, सिर्फ 1 किलोमीटर की दूरी के लिए 3,000 रुपए का वाहन किराया भी बिल में दर्ज है। इतनी छोटी दूरी के लिए इतनी बड़ी रकम सामने आने के बाद अब खर्चों पर सवाल उठ रहे हैं।
कैंपस छोड़कर बाहर क्यों गए
आरटीआई में यह भी खुलासा हुआ कि दीक्षांत समारोह यूनिवर्सिटी कैंपस के बाहर रवींद्र भवन में आयोजित किया गया था। इसके लिए यूनिवर्सिटी ने करीब 2 लाख रुपए किराया चुकाया।
हैरानी की बात यह है कि यूनिवर्सिटी के पास अपना बड़ा ऑडिटोरियम मौजूद है, जहां ऐसे बड़े कार्यक्रम पहले भी होते रहे हैं। इसके बावजूद समारोह बाहर के हॉल में कराया गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब कैंपस में सुविधा थी तो बाहर हॉल लेने की जरूरत क्यों पड़ी और इतना बड़ा किराया क्यों दिया गया।
फाइनेंस कंट्रोलर की आपत्ति
सबसे बड़ा सवाल इन बिलों की मंजूरी को लेकर उठ रहा है। यूनिवर्सिटी के फाइनेंस कंट्रोलर ने इन खर्चों पर पहले ही आपत्ति जताई थी। सरकारी भुगतान से पहले वित्त विभाग की जांच और मंजूरी जरूरी होती है। इसके बावजूद आपत्ति को नजरअंदाज कर सभी बिल पास कर दिए गए। अब सवाल है कि आखिर किसके आदेश पर यह भुगतान मंजूर हुआ और वित्त विभाग की आपत्ति पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया।
आरटीआई लगाने वाले का गुस्सा
यह आरटीआई यूनिवर्सिटी के पुराने छात्र धर्मेंद्र सिंह गौर ने लगाई थी। उनका कहना है कि जबBarkatullah University Campusमें अपना ऑडिटोरियम (convocation ceremony) मौजूद था तो समारोह बाहर क्यों कराया गया। धर्मेंद्र सिंह गौर ने बताया कि वे इस मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से करेंगे। उनका कहना है कि पूरे मामले की जांच होनी चाहिए, क्योंकि यह जनता के पैसों से जुड़ा मामला है।
अफसरों ने साधी चुप्पी
TOI की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले पर जनसंपर्क अधिकारी शशांक शेखर ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं रजिस्ट्रार एसबी सिंह ने भी बिलों और कार्यक्रम स्थल को लेकर कोई जवाब नहीं दिया।
मौजूदा रजिस्ट्रार समर बहादुर सिंह का कहना है कि यह मामला उनके कार्यकाल का नहीं है। उन्होंने कहा कि वे पूरे मामले की जांच कराएंगे।
छात्रों ने की जांच की मांग
barkatullah university bhopal केइस खुलासे के बाद छात्रों में भी नाराजगी है। छात्रों की मांग है कि लापरवाह अफसरों की पहचान हो। साथ ही जिम्मेदार अफसरों पर जरूरी कार्रवाई भी होनी चाहिए।
छात्रों की मांग है कि बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी भोपाल केसमारोह के सारे बिल सार्वजनिक हों। सैंक्शन ऑर्डर और ऑडिट रिपोर्ट को भी सबके सामने लाया जाए। छात्रों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
सरकारी यूनिवर्सिटी पर सवाल
दरअसल, पिछले कुछ समय से सरकारी विश्वविद्यालयों के खर्चों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इन संस्थानों में सरकारी और छात्रों से जुड़े फंड का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में अगर किसी खर्च को लेकर सवाल खड़े होते हैं तो मामला गंभीर हो जाता है। खासकर जब बात किसी बड़े सरकारी कार्यक्रम की हो। खर्च में पारदर्शिता नहीं होने से लोगों का भरोसा प्रभावित होता है। यही वजह है कि ऐसे मामलों में आरटीआई जैसे कानून की भूमिका अहम हो जाती है। बीयू का यह मामला भी अब इसी चर्चा का हिस्सा बन गया है।
अभी जांच बाकी, तस्वीर साफ नहीं
फिलहाल इन आरोपों की पूरी तरह पुष्टि होना बाकी है। इसके लिए स्वतंत्र ऑडिट या प्रशासनिक जांच जरूरी होगी। जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। हालांकि सामने आए दस्तावेजों से खर्चों को लेकर सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं। साथ ही वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह मामला सिर्फ एक यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बन गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है।
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