बरकतउल्ला विवि: वाग्देवी के नाम पर नया विश्वविद्यालय बना लें, नाम हटाना उचित नहीं; मसूद

Sandeep Kumar | Jun 04, 2026, 18:05 IST
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barkatullah university
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भोपाल में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव पर सियासत शुरू हो गई है। सत्तापक्ष और विपक्ष में जुबानी जंग चल रही है। कांग्रेस विधायक ने नाम बदलने का विरोध किया। वहीं मंत्री ने कहा है कि प्रस्ताव की समीक्षा करेंगे।

5 पॉइंट्स में समझें पूरा मामला

  • बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का प्रस्ताव कार्यपरिषद ने राज्यपाल को भेजा।
  • कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इसे स्वतंत्रता सेनानी का अपमान बताया।
  • उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अध्ययन और सीएम से विमर्श का आश्वासन दिया।
  • जमीअत उलमा ने नाम परिवर्तन को इतिहास मिटाने और गंगा-जमुनी संस्कृति पर प्रहार बताया।
  • विवाद में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और सामाजिक प्रभाव की चिंता शामिल है।

नाम बदलने पर गरमाई राजनीति

भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का प्रस्ताव सामने आने पर राजनीति गरमा गई है। विपक्ष इसे स्वतंत्रता सेनानी के अपमान से जोड़ रहा है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि प्रस्ताव का अध्ययन कर सीएम से विमर्श करेंगे।

प्रस्ताव पर सियासी बयानबाजी

मध्य प्रदेश में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का प्रस्ताव कार्यपरिषद द्वारा पारित कर राज्यपाल को भेजा गया है। इस प्रस्ताव से सत्तापक्ष और विपक्ष में जुबानी जंग शुरू हो गई है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इसे क्रांतिकारी के अपमान के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का नाम बदलना अफसोसजनक है और बच्चों के भविष्य पर चर्चा प्राथमिक होनी चाहिए थी।

क्या बोले कांग्रेस विधायक ?

विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि वाग्देवी के नाम पर नया विश्वविद्यालय बनाया जा सकता था। 38 साल से चल रहे संस्थान का नाम हटाना उचित नहीं। उन्होंने कहा कि बरकतउल्ला ने विदेश में भारत का झंडा बुलंद किया और उनका योगदान प्रदेश और देश के लिए अमूल्य है।

क्या बोले उच्च शिक्षा मंत्री ?

इधर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि कार्यपरिषद का प्रस्ताव अब हमारे पास आएगा। विश्वविद्यालय एक ऑटोनॉमस बॉडी है और कार्यपरिषद अपने निर्णय लेती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्ताव का अध्ययन कर मुख्यमंत्री से विमर्श के बाद निर्णय लिया जाएगा।

बरकतउल्ला भोपाली का नाम बदलना गलत

आरिफ मसूद ने जोर देकर कहा कि बरकतउल्ला भोपाली का नाम बदलना गलत है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के एग्जीक्यूटिव काउंसिल के निर्णय निंदनीय हो सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को क्रांतिकारियों की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रस्ताव का समग्र अध्ययन किया जाएगा। राज्यपाल महोदय इसके मुखिया हैं और उनके साथ विमर्श के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। कांग्रेस विधायक ने भी यह सुनिश्चित करने की बात कही कि क्रांतिकारी का नाम बदनाम न हो।

जमीअत उलमा भी उतरा विरोध पर

बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी कार्य परिषद ने विश्वविद्यालय का नाम बदलने का प्रस्ताव पास किया। जमीअत उलमा के अध्यक्ष हाफिज इस्माईल बैग ने इस निर्णय की कड़ी निंदा की और इसे इतिहास मिटाने की कोशिश बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री से तत्काल यह फैसला वापस लेने की मांग की।

बैग ने कहा कि यह केवल नाम परिवर्तन का मामला नहीं है बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के एक बड़े नायक के योगदान को नजरअंदाज करना है। उन्होंने कहा कि मौलाना बरकतउल्लाह भोपाली ने 1915 में अफगानिस्तान में बनी भारत की पहली निर्वासित सरकार में प्रधानमंत्री के रूप में अहम भूमिका निभाई थी। वे गदर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में रहे और विदेशी धरती से अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया।

गंगा-जमुनी संस्कृति पर सीधा प्रहार

हाफिज ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय का नाम बदलना भोपाल की गंगा-जमुनी संस्कृति पर सीधा प्रहार है। उन्होंने कहा कि एक मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी का नाम हटाने से समाज में विभाजन की भावना बढ़ सकती है। जमीअत ने बताया कि प्रदेश के विश्वविद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी, कमजोर शोध व्यवस्था और खराब बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में नाम परिवर्तन पर करोड़ों रुपए खर्च करना जनहित के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।

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