चंबल में किसानों का उग्र प्रदर्शन, जमीन आवंटन के विरोध में 40 गांव लामबंद
समझें क्या है पूरा मामला...
- जान देंगे, जमीन नहीं देंगे, चंबल में किसानों की गूंज।
- किसानों का प्रदर्शन: मुरैना में 40 गांवों के किसान सड़क पर उतरे।
- जमीन आवंटन के खिलाफ किसानों का बड़ा प्रदर्शन।
- 10 अगस्त को जेल भरो आंदोलन का ऐलान हुआ।
- 2000 आपत्ति पत्रों से हिली प्रशासन की नींद।
मुरैना के सबलगढ़ में किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यह विरोध चंबल बीहड़ की जमीन को लेकर है। सरकार ने यह जमीन उद्योग विभाग को आवंटित की है। किसानों ने इसे तुरंत रद्द करने की मांग की। उन्होंने 10 अगस्त को जेल भरो आंदोलन का ऐलान भी किया।
आंदोलन की शुरुआत
चंबल के बीहड़ों में ग्राम पंचायत अटार से निवाड़ी तक जमीन का मामला गरमाया हुआ है। 40 से अधिक गांवों की जमीन उद्योग विभाग को दी जा रही है। इसी जमीन का सीमांकन और सीमा चिन्ह लगाने का काम भी शुरू हुआ है। इसके विरोध में मंगलवार को किसान सड़क पर उतर आए।
सबलगढ़ की अनाज मंडी में एक बड़ी आमसभा हुई। इसमें सैकड़ों किसान, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए। सभी ने मिलकर सरकार के इस फैसले का विरोध जताया। "जान देंगे, जमीन नहीं देंगे" के नारे पूरे परिसर में गूंजे।
किसानों की मांगें
किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन तैयार किया। इसमें जमीन आवंटन की पूरी प्रक्रिया रद्द करने की मांग रखी गई। मध्य प्रदेश किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह आवंटन प्रक्रिया तय नियमों के खिलाफ है।
तिवारी के अनुसार इस मामले में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC – No Objection Certificate) नहीं लिया गया है। उनका कहना था कि निजी कंपनियों को जमीन देने के बजाय स्थानीय किसान परिवारों को पट्टे दिए जाने चाहिए। ये परिवार पीढ़ियों से इस जमीन पर खेती कर रहे हैं। उन्होंने किसानों से आंदोलन तेज करने की अपील की।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने जिला प्रशासन को भी अपनी बात पहुंचाई। उन्होंने 2,000 से अधिक व्यक्तिगत आपत्ति पत्र सौंपे। हर आपत्ति में जमीन आवंटन पर सीधी नाराजगी दर्ज थी।
प्रशासन का रुख
तहसीलदार खुद आमसभा स्थल पर पहुंचे। उन्होंने किसानों से ज्ञापन और आपत्ति पत्र लिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी आपत्तियों पर कार्रवाई होगी। साथ ही किसानों की मांग मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन भी दिया।
हालांकि, किसान नेताओं का कहना है कि सिर्फ आश्वासन काफी नहीं है। उन्हें ठोस कार्रवाई चाहिए। इसी वजह से आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया।
आगे की रणनीति
आंदोलन की अगुवाई कई किसान नेता कर रहे हैं। इनमें एडवोकेट मुरारी लाल धाकड़, गयाराम सिंह धाकड़, ओमप्रकाश श्रीवास और आदिराम आर्य शामिल हैं। भान सिंह जादौन, रामप्रकाश जादौन, नरेश गोस्वामी, इब्राहिम शाह और इसराइल खान भी सक्रिय भूमिका में हैं। मोतीलाल रावत, रामानंद रावत, वकील रावत, घमंडी केवट, अनिल जाटव, नंदलाल जाटव और हरिनंदन रावत ने भी नेतृत्व संभाला।
सभा के अंत में सभी किसानों ने हाथ उठाकर एक संकल्प लिया। उन्होंने 10 अगस्त को जेल भरो आंदोलन में शामिल होने की कसम खाई। जोरदार नारेबाजी के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। अब सबकी नजर आने वाले दिनों में प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है।
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