केन-बेतवा लिंक परियोजना: मुआवजे की मांग को लेकर चिता आंदोलन उग्र होने की चेतावनी
Amresh Kushwaha | Jul 12, 2026, 11:18 IST
केन-बेतवा परियोजना चिता आंदोलन
छतरपुर और पन्ना में केन बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित परिवारों का चिता आंदोलन दसवें दिन भी जारी है। आंदोलन में कई तरह के सत्याग्रह एक साथ चल रहे हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- छतरपुर और पन्ना में केन बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित परिवारों का आंदोलन चल रहा है।
- इसे चिता आंदोलन नाम दिया गया है।
- दसवें दिन भी जय किसान संगठन के बैनर तले संघर्ष जारी है।
- आंदोलन में कई तरह के सत्याग्रह एक साथ चल रहे हैं।
- नेता अमित भटनागर का आमरण अनशन सातवें दिन में पहुंच गया है।
इन्हीं परिवारों ने जय किसान संगठन के बैनर तले आंदोलन शुरू किया है। इसे चिता आंदोलन नाम दिया गया है। यह आंदोलन आज, रविवार को दसवें दिन भी पूरी तीव्रता के साथ जारी है। विपरीत मौसम के बावजूद आंदोलनकारियों का हौसला कम नहीं हुआ है।
अनशन का दायरा लगातार बढ़ रहा है
इन सभी तरीकों से आंदोलनकारी अपनी मांगें प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं। संगठन का कहना है कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक न्याय नहीं मिलता।
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अमित भटनागर की तबीयत बिगड़ी
उन्होंने इसे प्रशासन की गंभीर लापरवाही बताया है। आंदोलनकारियों ने कहा कि वे अपनी मर्जी से यहां नहीं बैठे हैं। उनका कहना है कि हालात ने उन्हें यह रास्ता चुनने पर मजबूर किया है।
कानून का हवाला देकर उठाए सवाल
उन्होंने प्रशासन से सीधा सवाल पूछा। उनका कहना था कि अगर सरकार खुद अपने कानून तोड़ेगी, तो जनता न्याय के लिए कहां जाएगी। यह बयान आंदोलन की मुख्य मांग को साफ तौर पर सामने रखता है।
आदिवासी महिलाओं ने सुनाई अपनी पीड़ा
उनके मुताबिक बिना सहमति उनका घर, जंगल और जमीन छीन ली गई। दिया जा रहा मुआवजा भी बहुत कम बताया गया है। पुनयने ने कहा कि उनकी विधवा बहू पूजा आदिवासी का घर बिना कोई मुआवजा दिए तोड़ दिया गया।
एक अन्य महिला पूना आदिवासी ने भी अपनी पीड़ा साझा की। उनका कहना है कि उनकी बेटी और जमीन का मुआवजा नहीं दिया गया। इसके बावजूद प्रशासन ने उनका घर जबरन गिरा दिया।
बिना नोटिस तोड़े गए कई मकान
कई महिलाओं ने बताया कि जमीन भी जबरन अधिग्रहीत कर ली गई। कुछ महिलाओं का यह भी कहना है कि उन्हें घर का सामान तक नहीं निकालने दिया गया। इस वजह से आंदोलनकारियों में गहरा आक्रोश है।
आंदोलन को मिल रहा व्यापक समर्थन
हरियाणा से वरिष्ठ साहित्यकार अविनाश कुमार भी आंदोलन में शामिल हुए हैं। इनके अलावा कई समाजसेवी लगातार आंदोलन स्थल पर पहुंच रहे हैं। इस समर्थन ने आंदोलनकारियों का हौसला और बढ़ा दिया है।
कई लोग क्रमिक अनशन पर बैठे
मझली बहू आदिवासी, अंगी बाई आदिवासी और अगना बाई आदिवासी भी अनशन कर रही हैं। आशा आदिवासी, रानी आदिवासी और चंदा आदिवासी भी शामिल हैं। ग्याप्रसाद कोंदर, लक्ष्मण कोंदर, बाबूलाल आदिवासी, हरि आदिवासी और तोरण सिंह आदिवासी भी हर दिन आवाज उठा रहे हैं।
आंदोलनकारियों की स्पष्ट मांग
यदि यह मांगें पूरी नहीं होतीं, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। संगठन ने साफ कर दिया है कि पीछे हटने का कोई इरादा नहीं है। आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा और तेज हो सकती है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर उसी अधिकार के इस्तेमाल को सामने लाती है। साथ ही यह अनशनकारी की सेहत और मानवीय गरिमा से जुड़ा गंभीर मुद्दा भी उठाती है। ऐसी खबरें प्रशासन की जिम्मेदारी और पारदर्शिता की जरूरत को उजागर करती हैं। यह जानकारी लोगों को उनके अधिकार और कानूनी प्रावधान समझने में मदद करती है।
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