कक्षा 9वीं में नया ब्रिज कोर्स: अब पढ़ाई के साथ लॉजिक और समझ पर फोकस
मध्यप्रदेश में कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों के लिए इस साल से ब्रिज कोर्स शुरू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि बच्चों में तार्किक सोच, सामाजिक समझ और विश्लेषण क्षमता विकसित करना है। पहले चरण में भोपाल में शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। नए सत्र से इसे स्कूलों में लागू किया जाएगा।
क्या है ब्रिज कोर्स और क्यों जरूरी है?
ब्रिज कोर्स एक ऐसा शैक्षणिक कार्यक्रम है, जो बच्चों की बुनियादी समझ को मजबूत करने पर फोकस करता है। इसका उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी सिर्फ किताबों तक सीमित न रहें। उन्हें चीजों को समझने, सवाल करने और तार्किक तरीके से सोचने की क्षमता विकसित हो। अपर संचालक मनीष वर्मा के अनुसार, बच्चों में सीखने की उत्सुकता को सही दिशा देना जरूरी है। इसी कारण इस कोर्स की शुरुआत की जा रही है।
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क्या बदलने वाला है पढ़ाई का तरीका?
इस कोर्स में पढ़ाई का तरीका पूरी तरह बदला जाएगा। अब शिक्षक सिर्फ लेक्चर देने वाले नहीं होंगे, बल्कि गाइड और मेंटर की भूमिका में नजर आएंगे। कक्षा में चर्चा, वाद-विवाद, रोलप्ले और प्रोजेक्ट वर्क के जरिए बच्चों को एक्टिव बनाया जाएगा। इससे पढ़ाई न सिर्फ आसान होगी, बल्कि ज्यादा रोचक और समझने योग्य भी बनेगी।
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मूल्यांकन कैसे होगा?
ब्रिज कोर्स में विद्यार्थियों का आकलन तीन चरणों में किया जाएगा, ताकि उनकी प्रगति लगातार मापी जा सके।
बेसलाइन टेस्ट: 1 अप्रैल से, स्कूल खुलते ही।
मिडलाइन टेस्ट: 28 से 30 जून (ग्रीष्मावकाश के बाद)।
एंडलाइन टेस्ट: जुलाई में आयोजित होगा।
इन तीनों टेस्ट के अंकों का 50% हिस्सा त्रैमासिक परीक्षा में जोड़ा जाएगा।
सभी रिजल्ट की एंट्री विमर्श पोर्टल पर की जाएगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
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सख्त मॉनिटरिंग का प्लान
इस पूरे कार्यक्रम की निगरानी सख्ती से की जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से पढ़ाई, उपस्थिति, स्टडी मटेरियल और विद्यार्थियों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। विद्यार्थियों की बुनियाद मजबूत होगी। तार्किक और वैज्ञानिक सोच विकसित होगी। कक्षा में भागीदारी बढ़ेगी।
कक्षा 9वीं में शुरू हो रहा यह ब्रिज कोर्स सिर्फ एक नया सिलेबस नहीं, बल्कि पढ़ाई के तरीके में बड़ा बदलाव है। अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह विद्यार्थियों की सोच और सीखने के स्तर को नई दिशा दे सकता है।