आयोग ही तय करेगा भागीरथपुरा त्रासदी की वजह और जिम्मेदारी

Sanjay Sharma | Mar 12, 2026, 23:40 IST
bhagirthpura tragedy
इंदौर के भागीरथपुरा में मौतों के मामले की जांच के लिए गठित प्रशासनिक अधिकारियों की समिति को रद्द कर दिया गया है। ऐसा जांच के लिए बनाए गए आयोग की वजह से किया गया है।

News in Short

  • इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई।
  • राज्य सरकार ने एक जांच समिति बनाई, जो अब निरस्त कर दी गई है।
  • सरकार ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय आयोग गठित किया।
  • आयोग को 4 हफ्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया।
  • आयोग को समन जारी करने, अभिलेख बुलाने और जल की जांच के आदेश दिए गए हैं।

News in Detail

BHOPAL. इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत की जांच एक सदस्यीय आयोग को सौंपी गई है। उच्च न्यायालय के पूर्व जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता के जांच आयोग ने अपना काम शुरू कर दिया है। इसको देखते हुए सरकार द्वारा पूर्व में गठित प्रशासनिक अधिकारियों की समिति को रद्द कर दिया है।



समिति में एसीएस जीएडी संजय कुमार शुक्ला की अगुवाई में पीएस पीएचई पी.नरहरि, नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे और इंदौर कमिश्नर सुदाम खाड़े को शामिल किया गया था। विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष के हंगामे को देखते हुए सरकार द्वारा पूर्व जस्टिस की अध्यक्षता वाले आयोग का गठन कर दिया था। जिस वजह से समिति का औचित्य समाप्त हो गया था।



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पावरलैस हो गई थी जांच समित

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के सेवन से पिछले दो महीने में दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने एक जांच समिति का गठन किया था, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया था। भागीरथपुरा कांड की जांच सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जस्टिस के आयोग के हाथ आने के बाद राज्य स्तरीय समिति की आवश्यकता खत्म हो गई थी। आयोग के कार्यरत होने और समिति के पावरलैस होने के कारण अब उसे समाप्त किया गया है।



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आयोग के पास जांच का अधिकार

आयोग दूषित पानी के सेवन से मरने वालों की वास्तविक संख्या, दर्ज बीमारियों की प्रकृति, मेडिकल रिस्पांस और उपचार संबंधी संसाधनों की उपलब्धता सहित अन्य बिंदुओं पर जांच कर रहा है। इसके साथ ही आयोग दीर्घकालिक जल प्रदूषण के कारण और जिम्मेदार अधिकारियों को भी चिन्हित करेगा। जिसके लिए आयोग को समन जारी करने, सरकारी अभिलेख बुलाने, जल की जांच और स्थल निरीक्षण के अधिकार दिए गए हैं। विधानसभा में विपक्ष द्वारा इस मामले पर चर्चा के लिए स्थगन दिया गया था, जिसे आयोग की जांच का हवाला देकर सरकार द्वारा टाला गया था।



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समय सीमा और मुआवजा

आयोग को चार हफ्तों में अपनी रिपोर्ट पेश करनी है, लेकिन यह समय पूरा होने वाला है। वहीं अभी आयोग को भागीरथपुरा त्रासदी की जांच के लिए विभिन्न बिंदुओं से संबंधित जानकारी जुटाना और पड़ताल करना शेष है। इस स्थिति को देखते हुए आयोग के लिए अतिरिक्त समय देना तय माना जा रहा है। यानी आयोग को मामले की जांच के लिए जल्द ही समय सीमा बढ़ाई जा सकती है।





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