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Photograph: (the sootr)
News in Short
- भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में साजिश की आशंका, हाईकोर्ट में इंटरविनर एप्लीकेशन दाखिल।
- याचिका में मुख्य पानी टंकी में पोटेशियम क्लोराइड मिलाने का आरोप लगाया गया।
- दूषित पानी पीने से सैकड़ों लोग बीमार हुए, कई लोगों की मौत हुई।
- वरिष्ठ अधिवक्ता ने मामले में स्वतंत्र पुलिस जांच की मांग उठाई।
- हाईकोर्ट ने जांच आयोग को रिपोर्ट के लिए एक माह का अतिरिक्त समय दिया।
Intro
भागीरथपुरा में दूषित पानी से गई 35 जान के पीछे क्या साजिश थी। द सूत्र ने इस संबंध में पहले ही सवाल उठाया था। अब इसे लेकर हाईकोर्ट में औपचारिक इंटरविनर एप्लीकेशन लग गई है।
News in Detail
Indore. इंदौर हाईकोर्ट में भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को लेकर लगी विविध जनहित याचिकाओं को लेकर गुरुवार को सुनवाई हुई। इसमें जांच कमीशन को जांच के लिए एक माह का समय और दिया गया है। हालांकि एक प्रारंभिक रिपोर्ट दी है लेकिन इसे सीलबंद लिफाफे में रखा गया है। लेकिन इस कांड को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडि़या ने एक इंटरविनर एप्लीकेशन (आईए) लग गई है। इसमें इसे साजिश के रूप में देखा गया है।
मुख्य टंकी में केमिकल मिलाने की आशंका
इस याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता ने पैनड्राइव में कुछ लोगों के बयान भी दिए हैं। यह वह लोग है जिनके घर में नर्मदा पानी सप्लाय नहीं थी और यह सीधे मुख्य टंकी से पानी लेते थे। यह सभी भी 24-25 दिसंबर के दौरान पानी का उपयोग करने पर बीमार हुए हैं।
इस याचिका में आशंका जताई गई है कि मुख्य टंकी में ही पोटेशियम क्लोराइड की गोलियां अधिक मात्रा में डाली गई है, जिसके चलते उस दौरान जिन्होंने इस पानी का उपयोग किया वह बीमार हुए और बाद में लोगों की जान भी गई। वरिष्ठ अधिवक्ता बागडिया के साथ सहयोगी अधिवक्ता शैली पुरंदरे भी थी। आईए को लेकर दस्तावेज और पैनड्राइव भी रखी है।
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पुलिस की स्वतंत्र जांच जरूरी
वरिष्ठ अधिवक्ता बागड़िया ने कहा कि इस मामले में स्वतंत्र रूप से पुलिस जांच जरूरी है। खासकर टंकी पर तैनात चार कर्मचारियों से पूुछताछ होना चाहिए। इसमें दो कर्मचारी निगम की ओर से रहते हैं जो सुपरवाइज और हेल्पर होते हैं और दो कांट्रेक्ट बेस पर रामकी इंडस्ट्रीज की ओर से होते हैं। यह भी जानकारी सोर्सेस से मिली है कि यह गोलियां बाहर से खरीदी गई और इन्हें टंकी में डाला गया।
द सूत्र ने पहले ही जताई थी आशंका
इस मामले में द सूत्र ने पहले ही आशंका जताई थी यह साजिश है। क्योंकि सीवेरज संबंधी पानी से मौत की बात पहले कभी नहीं आई। वह भी इतने बड़े स्तर पर जिसमें 459 लोग अस्पताल में भर्ती हुए, ऐसा कभी सामने नहीं आया। यह भी सूत्र ने बताया था कि इस मामले में उस समय पदस्थ अधिकारियों ने जांच शुरू की थी और कुछ बयान भी लिए थे, पुलिस द्वारा भी अंदरूनी जांच की थी, जिसमें इसकी आशंका आ रही थी। लेकिन बाद में अधिकारियों को जिम्मेदार और लापरवाही बताकर उन्हें ट्रांसफर किया गया। इस पूरे मामले की बड़े स्तर पर गहन जांच जरूरी है। यह शहर की सुरक्षा का गंभीर मामला है।
क्यों शक उठ रहा है
शक इसलिए भी उठ रहा है कि क्योंकि महू में भी इसी तरह दूषित पानी वाला मुद्दा आया था जिसमें 25 बीमार हुए लेकिन वह कुछ घंटों में स्वस्थ हो गए। इसी तरह ई कोलाई जो पानी में मिला वह पूरे शहर में कई सैंपल में पाया गया। क्लोराइनजेशन लगातार होता है और जलूद मुख्य पंप के पास भी होता है यदि यह होता तो पूरे शहर में यह समस्या आती, लेकिन कभी ऐसा नहीं आया। सीवेरज पानी लाइन जो पुलिस चौकी के नीचे टूटी मिली थी वह पहले से ही टूटी थी, यानी गंदा पानी नर्मदा सप्लाय लाइन में लंबे समय से मिल रहा था जो फिर एकदम से 24-25 दिसंबर के दौरान ही यह घटना सामने क्यों आई।
पानी की बदबू दूर करने के लिए क्या मिलाया था
दरअसल द सूत्र को मिली जानकारी के अनुसार 24 दिसंबर से पहले पानी में काफी गंदी बदबू आ रही थी। इस दौरान बात आई कि दो दिन शटडाउन रखकर इसे ठीक किया जाए। लेकिन इसमें फिर पानी सप्लाय जारी रखने के लिए दबाव आया। आशंका है कि इसके बाद कुछ लोगों ने यह पोटेशियम क्लोराइड की दवाएं मिलाई। इसके चलते यह हादसा हुआ।
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जांच कमीशन ने यह रिकार्ड मांगे
उधर जांच कमीशन ने बताया कि जो रिकार्ड मांगे वह अभी प्राप्त नहीं हुए हैं। इसमें निगम से जल वितरण मैनेजमेंट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वाटर टैस्टिंग और लैब एनालिस रिपोर्ट, वाटर पाइपलाइन और सीवरेज लाइन रिकार्ड, टेंडर डाक्यूमेंट, पानी को लेकर शिकायतों के रिकार्ड। कमीशन ने कहा कि इन रिकार्ड के बिना जांच नहीं हो सकती है। यह सब होने के बाद आयोग विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगा। इस पर अपर आयुक्त आशीष पाठक ने कहा कि कुछ रिकार्ड दे दिए गए हैं और बाकी 10 दिन में दे देंगे।
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