इंदौर के डेली कॉलेज बोर्ड का चुनाव शेड्यूल जारी, विवादित संविधान संशोधन नहीं होगा लागू
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- डेली कॉलेज बोर्ड चुनाव का शेड्यूल जारी हुआ।
- 21 मई को वोटिंग होगी और उसी दिन रिजल्ट आएगा।
- संविधान संशोधन अभी मंजूर नहीं हुआ है।
- चुनाव मौजूदा संविधान के तहत ही होंगे।
- ओडीए और बोर्ड के बीच विवाद जारी है।
इंदौर के डेली कॉलेज (daly college indore) में संविधान संशोधन के प्रस्ताव का विरोध हो रहा है। यह विरोध ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन (ओडीए) की ओर से आ रहा है, जो इस संशोधन में सर्वाधिक प्रभावित हो रहा है।
उधर इस विवाद के बीच में चुनाव अधिकारी व हाईकोर्ट से रिटायर्ड जस्टिस सुशील गुप्ता ने चुनाव शेड्यूल जारी कर दिया है। साथ ही मतदाता सूची भी जारी कर दी गई है और इसके लिए आपत्तियां बुलाई गई हैं।
21 मई को होगी वोटिंग और रिजल्ट
इंदौर डेली कॉलेज बोर्ड केचुनाव शेड्यूल के अनुसार, 21 मई को वोटिंग होगी और इसी दिन रिजल्ट जारी होगा। वोटर लिस्ट जारी कर दी गई है। वहीं 21 से 23 अप्रैल तक इस लिस्ट (daly college election) पर आपत्ति मांगी गई है
- 28 और 29 अप्रैल को नामांकन जमा होंगे
- 30 अप्रैल और 1 मई को फार्म वापसी
- 2 मई को फार्म की स्क्रूटनी
- 4 से 19 मई को सभी बाहरी मतदाताओं को डाक व ईमेल से मतपत्र जाएंगे, यह 20 मई तक वापस आएंगे
- 21 मई को वोटिंग और काउंटिंग
चालू संविधान से ही चुनाव होंगे
अब विवाद के सबसे बड़े मुद्दे संविधान संशोधन को अभी तक फर्म एंड सोसायटी ने मंजूरी नहीं दी है। यदि मंजूरी मिलती भी है, तो इसे हाईकोर्ट में चुनौती मिलना तय है।
उधर जानकारों का कहना है कि जब चुनाव अधिकारी ने चुनाव शेड्यूल जारी कर दिया है, तो फिर अब संविधान संशोधन इस चुनाव पर लागू नहीं हो सकता है। यानी विवाद की बड़ी जड़ ही खत्म हो जाएगी और वर्तमान लागू संविधान से ही यह चुनाव होंगे।
वर्तमान संविधान के तहत अभी 9 सदस्य
- डीसी बोर्ड अभी नौ सदस्यों का होता है।
- इसमें दो सदस्य शासन से मनोनीत होते हैं।
- दो सदस्य मूल डोनर्स कैटेगरी (टूबी 1) से चुने जाते हैं, इसमें करीब 60 सदस्य हैं
- एक सदस्य न्यू डोनर्स कैटेगरी (टूबी 2) से चुना जाता है, इसमें 714 सदस्य हैं
- दो सदस्य ओडीए यानी टू सी कैटेगरी से चुने जाते हैं, इसमें 6 हजार 66 सदस्य हैं
- यह सात सदस्य फिर पालक संघ से दो सदस्य चयनित करते हैं
संविधान संशोधन में यह है विवाद की वजह
अभी बोर्ड में 9 की जगह 10 सदस्य बनाने का विचार चल रहा था, लेकिन ओडीए यानी टू सी कैटेगरी में चुनाव की जगह चयन पर जोर दिया जा रहा था। इस बदलाव में ओडीए के चुने हुए प्रेसीडेंट और सचिव को पहले प्राथमिकता दी जानी थी, यानी ये लोग चुने जा सकते हैं या नहीं भी।
साथ ही, एक और बदलाव किया गया था जिसमें ओडीए से एक पूर्व प्रतिष्ठित छात्र को चयनित करने की बात की गई थी। इसका विरोध इस बात पर हो रहा है कि ओडीए का कहना है कि हमारे सदस्य हम चुनेंगे, बोर्ड को सीधे चयन करने का अधिकार नहीं है। ओडीए इसे लोकतंत्र खत्म करने जैसा मानता है। ओडीए में 6066 सदस्य हैं और यह सबसे बड़ी संस्था है, इसलिए यह बदलाव उनके अस्तित्व के खिलाफ है।
अब विरोधी गुट के रुख का इंतजार
वहीं अब इस चुनाव शेड्यूल के बाद सभी को इंतजार है कि विरोधी गुट (Indore News) का रवैया क्या होगा। चुनाव की मांग तो पूरी हो गई है और शेड्यूल जारी हो गया है।
इस गुट द्वारा हाल ही में डेली कॉलेज के बाहर तालाबंदी की थी और प्रदर्शन किया था। इस गुट से राजेश अग्रवाल, डॉ. सुमित शुक्ला, संदीप पारिख व अन्य हैं। पहले यह गुट मंगलवार दोपहर को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रहा था, जिसे अब टाल दिया गया है।
इधर आपत्ति भी उठी...
चुनाव शेड्यूल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विरोधी गुट का कहना है कि पहले यह साफ किया जाए कि चुनाव किस संविधान के तहत हो रहे हैं। क्योंकि अभी जो संविधान लागू है, उसके मुताबिक चुनाव का नोटिफिकेशन 90 दिन पहले होना चाहिए। लेकिन जो संविधान संशोधन प्रस्तावित है, उसके तहत सिर्फ 30 दिन का समय रखा गया है। और जो चुनाव शेड्यूल अभी जारी किया गया है, वो 30 दिन पहले जारी हुआ है।
ऐसे में विरोधी गुट का कहना है कि चुपचाप नए संविधान संशोधन के तहत चुनाव कराए जा रहे हैं। इस पर अभी तक स्थिति साफ नहीं की गई है।
फर्म सोसायटी ने किया साफ…
इस मामले में द सूत्र ने फॉर्म एंड सोसाइटी के अस्सिटेंट रजिस्टार राजकुमार अभंग से सीधी बात की। उन्होंने कहा कि अभी संविधान संशोधन को मंजूरी नहीं दी गई है। इस संबंध में अपील और अन्य विधिक मामले चल रहे हैं। नया संविधान संशोधन अभी मान्य ही नहीं हुआ है इसलिए पुराने संविधान से ही चुनाव होंगे।
इंदौर कलेक्टर से मिला विरोधी गुट
डेली कॉलेज में चुनाव शेड्यूल जारी होने के बाद विरोधी गुट मंगलवार को इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा से मिलने गया। राजेश अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने कलेक्टर से संविधान संशोधन को लेकर अपनी आपत्ति जताई और कलेक्टर ने मामले की जांच करने का आश्वासन दिया है।
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