डेली कॉलेज में हंगामा क्यों? संविधान संशोधन के शब्द Preferably ने ODA के अस्तित्व को ही दी चुनौती
Sanjay Gupta | Apr 19, 2026, 13:14 IST
indore daily college constitution change oda row
इंदौर के डेली कॉलेज में संविधान संशोधन को लेकर विवाद बढ़ गया है। Preferably शब्द से ओडीए के अधिकारों पर सवाल उठे हैं। नए नियमों से निर्वाचित सदस्यों की संख्या घटेगी है। पूर्व छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया है और बैठक बुलाने की तैयारी है।
News In Short
- इंदौर डेली कॉलेज में संविधान संशोधन पर विवाद बढ़ गया है।
- Preferably शब्द से ओडीए के अधिकार प्रभावित हुए हैं।
- निर्वाचित सदस्यों की संख्या घटने की आशंका जताई जा रही है।
- पूर्व छात्रों ने इसका विरोध किया है। साथ ही बैठक बुलाने की तैयारी हो रही है।
- मामला अब रजिस्ट्रार और मंजूरी के स्तर पर पहुंच गया है।
News In Detail
इस संशोधन में एक शब्द Preferably सबसे बड़ी वजह बना है। इसने पांच हजार पूर्व छात्रों के संगठन ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन (ODA) को ही खतरे में डाल दिया है। इससे बोर्ड में निर्वाचित सदस्यों का प्रतिशत घटेगा, यानी बोर्ड में कुछ लोगों का दबदबा कायम होने की आशंका तेज हो गई है।
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अभी बोर्ड में क्या है स्थिति?
- पांच सदस्य विविध कैटेगरीज में निर्वाचित होकर आते हैं। इसमें ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन (ओडीए) के 5 हजार सदस्य वोट डालकर दो सदस्यों को चुनते हैं। इसे टू सी ओल्ड डेलियंस कैटेगरी कहा जाता है।
- दो सदस्य टू बी (2) न्यू डोनर कैटेगरी से चुने जाते हैं। इसमें 700 नए दानदाता हैं जो वोट डालते हैं।
- एक सदस्य टू बी (1) कैटेगरी से चुना जाता है। इसमें सबसे पुराने दानदाता (ओल्ड डोनर्स) हैं, जिसमें करीब 60 सदस्य हैं।
- बोर्ड में दो सदस्य पालक संघ से को-ऑप्ट (चयनित) होते हैं। बोर्ड के सात सदस्य मिलकर ही इन दो सदस्यों का चयन करते हैं।
अब संविधान में बदलाव कर यह हो रहा है
- पूर्व की तरह दो सदस्य शासन से मनोनीत होंगे।
- न्यू डोनर कैटेगरी से पूर्व की तरह 2 सदस्य और ओल्ड डोनर कैटेगरी से भी पूर्व की तरह 1 सदस्य निर्वाचित होकर आएगा।
- सबसे बड़ा बदलाव ओल्ड डेलियंस कैटेगरी में हुआ है। इसमें अब दो की जगह तीन सदस्य किए गए हैं। यह प्रावधान किया गया है कि ओडीए के प्रेसिडेंट और सचिव, जिन्हें ओडीए हर तीन साल में चुनती है, वे बोर्ड में आएंगे। यानी अब ओडीए के पांच हजार सदस्य बोर्ड के लिए अपने स्तर पर अलग से चयन नहीं करेंगे। जो प्रेसिडेंट और सचिव चुने गए हैं, वही बोर्ड में आएंगे।
- इसमें भी एक शब्द जोड़ा गया है: Preferably (प्राथमिकता)। यानी जरूरी नहीं कि प्रेसिडेंट और सचिव ही आएं, यह कोई और भी हो सकता है। इसमें 'खेल' होने और अपने चहेतों को बोर्ड में जगह देने की गुंजाइश की आशंका जताई जा रही है।
- इसी तरह ओडीए से एक और सदस्य चयनित होगा, जो कोई प्रतिष्ठित और विभूषित पूर्व छात्र होगा। इसके चयन में भी मनमानी की पूरी गुंजाइश छोड़ी गई है।
- पूर्व की तरह पालक संघ से दो सदस्य चयनित होंगे।
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ओडीए की क्या है मांग?
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डेली कॉलेज बोर्ड ने संशोधन रजिस्ट्रार के पास भेजे
वॉइस ऑफ डीसी पेज और FIR से तनाव
डेली कॉलेज के 40 पूर्व छात्रों ने इस एफआईआर के खिलाफ गुरुवार, 16 अप्रैल को प्रदर्शन किया और तालाबंदी की। इसमें मुख्य रूप से विक्रम खंडेलवाल, जयेश पटेल, देवाशीष मजूमदार, राजेश अग्रवाल, पंकज गोयल, मधुकांत गर्ग, डॉ. सुमित शुक्ला, कमलेश कासलीवाल और नीरज देसाई सहित कई पूर्व छात्र शामिल थे। इन्होंने एफआईआर रद्द करने की मांग की।
क्या कह रहे हैं जिम्मेदार?
ओडीए
डीसी प्रबंधन
इस बदलाव से ओडीए में डबल इलेक्शन व्यवस्था खत्म होगी। पूर्व छात्रों के वोटिंग अधिकार समाप्त नहीं किए जा रहे, बल्कि संरचना में सुधार किया जा रहा है।
विरोध करने वाले ओल्ड डेलियंस
संदीप पारिख
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