बहुरूपिया बनाम धृतराष्ट्र का कष्ट: दतिया में चुनाव खत्म, राजघराने की जंग हुई तेज

Ramanand Tiwari | Aug 01, 2026, 23:24 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. दतिया उपचुनाव के बाद राजघराने की सियासत तेज हो गई है। घनश्याम सिंह और राहुल गोविंद देव के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। विवाद अब विरासत तक पहुंच गया है।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • घनश्याम सिंह ने राहुल गोविंद देव को महाराज मानने से इनकार किया।
  • उन्हें "बहुरूपिया" बताते हुए कई व्यक्तिगत आरोप लगाए।
  • दावा किया कि चुनाव के दौरान उन्हें कई बार संदेश भेजे गए।
  • राहुल गोविंद देव ने जवाब में 'धृतराष्ट्र के कष्ट' की उपमा दी।
  • दोनों ने एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक और पारिवारिक आरोप लगाए।
  • मतदान के बाद भी दतिया में सियासी टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा।

दतिया उपचुनाव में मतदान भले खत्म हो गया हो, लेकिन राजनीतिक तल्खी अब निजी आरोपों तक पहुंच गई है। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने राहुल गोविंद देव को "बहुरूपिया" बताते हुए उन्हें दतिया का महाराज मानने से इनकार कर दिया।



जवाब में राहुल गोविंद देव ने कहा कि उन्हें धृतराष्ट्र जैसा कष्ट है। चुनावी जंग अब रियासत, रिश्तों और विरासत की लड़ाई में बदलती नजर आ रही है।



घनश्याम सिंह का हमला- 'वह महाराज नहीं, बहुरूपिया है'

द सूत्र से बातचीत में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने राहुल गोविंद देव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि समाज उन्हें पहले ही अस्वीकार कर चुका है और वह स्वयं को दतिया का महाराज घोषित करते हैं।



घनश्याम सिंह ने आरोप लगाया कि कभी अभिनेता, कभी लेखक और कभी नर्तक बनने की कोशिश करने वाले राहुल गोविंद देव अब खुद को महाराज बताकर सुर्खियां बटोर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव के दौरान कई बार उन्हें संदेश भेजकर मिलने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया



राहुल गोविंद देव का पलटवार- 'यह धृतराष्ट्र जैसा कष्ट है'

राहुल गोविंद देव ने 'द सूत्र' से बातचीत मैं इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनका विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि वे लोगों के बीच जाकर कार्यकर्ता की तरह काम करते हैं और लोगों का सम्मान प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि घनश्याम सिंह का "उनका कष्ट धृतराष्ट्र के कष्ट जैसा है।"


उन्होंने यह भी कहा कि 6 अप्रैल 2025 को छत्रपति उदयराज भोसले द्वारा हुई पगड़ी रस्म के बाद उन्हें जिम्मेदारी मिली है और वे महाराजा जसवंत सिंह के अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं।



संपत्ति विवाद भी फिर आया सामने

राहुल गोविंद देव ने आरोप लगाया कि उनके परिवार की संपत्तियों पर षड्यंत्रपूर्वक कब्जा किया गया है। उन्होंने कहा कि किले, कोठियां और अन्य संपत्तियां विवाद का हिस्सा हैं और इस पूरे मामले को कानूनी तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।



रियासत की लड़ाई से सियासत तक

दतिया उपचुनाव के दौरान ही राजघराने के विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया था। नामांकन के समय संपत्ति को लेकर निर्वाचन आयोग तक शिकायत पहुंची। इसके बाद राहुल गोविंद देव भाजपा में शामिल हुए और तब से यह विवाद लगातार राजनीतिक बयानबाजी का केंद्र बना हुआ है।



दतिया की लड़ाई अब सिर्फ भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं रह गई है। यह राजघराने के भीतर विरासत, पहचान और राजनीतिक प्रभाव की खुली जंग बन चुकी है।



चुनाव खत्म होने के बाद जिस तरह दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर व्यक्तिगत और राजनीतिक आरोप लगाए हैं, उससे साफ है कि यह विवाद चुनाव परिणाम आने के बाद भी थमने वाला नहीं दिख रहा।



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