दतिया उपचुनाव: 291 पोलिंग बूथों पर मतदान जारी, 2.20 लाख वोटर चुनेंगे अपना विधायक

Amresh Kushwaha | Jul 30, 2026, 07:00 IST
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दतिया उपचुनाव
दतिया उपचुनाव

दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए गुरुवार सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हो गया है। 291 केंद्रों पर करीब 2 लाख 20 हजार मतदाता वोट डालेंगे। सुरक्षा के लिए 1422 जवान तैनात हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • दतिया उपचुनाव के लिए गुरुवार को मतदान शुरू हुआ।
  • कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती की सदस्यता सजा के बाद खत्म हुई थी।
  • 291 केंद्रों पर 2 लाख से ज्यादा मतदाता वोट डालेंगे।
  • सुरक्षा के लिए 1422 जवान तैनात किए गए हैं।
  • बीजेपी के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह में मुख्य मुकाबला है।
दतिया जिले में गुरुवार सुबह से उपचुनाव के लिए वोटिंग शुरू हो गई है। सुबह 7 बजे मतदान शुरू हुआ और शाम 6 बजे तक चलेगा। कई मतदान केंद्रों पर लोग जल्दी पहुंच गए। कुछ जगह वोटिंग से पहले ही लंबी कतारें दिखीं। मौसम विभाग ने बारिश का अलर्ट भी जारी किया है। इसलिए वोट डालने जाने वालों को छाता या रेनकोट साथ रखने की सलाह दी गई है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

जिले में कुल 291 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। यहां करीब दो लाख 20 हजार 400 मतदाता वोट डालेंगे। शांतिपूर्ण मतदान के लिए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। एसएसबी (Sashastra Seema Bal) सहित 16 सुरक्षा कंपनियों के 1422 जवान तैनात किए गए हैं।

संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल भी लगाए गए हैं। सेक्टर मोबाइल दल लगातार इलाके में गश्त कर रहे हैं। ये टीमें मतदाताओं को बिना डर वोट डालने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

13 पहचान पत्र मान्य

यदि किसी मतदाता के पास ईपीआईसी (Elector's Photo Identity Card) नहीं है, तो चिंता की बात नहीं है। ऐसे मतदाता 13 वैकल्पिक पहचान पत्रों में से कोई एक दिखाकर वोट डाल सकते हैं। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस शामिल हैं। भारतीय पासपोर्ट और फोटोयुक्त बैंक या डाकघर पासबुक भी मान्य हैं।

इसके अलावा पेंशन दस्तावेज और स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड भी चलेंगे। फोटोयुक्त सेवा पहचान पत्र और सांसद या विधायक का आधिकारिक कार्ड भी काम आएगा। यूडीआईडी (Unique Disability ID) कार्ड और मनरेगा (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act) जॉब कार्ड भी सूची में हैं।

मुख्य उम्मीदवार कौन कौन

इस उपचुनाव में मुख्य मुकाबला दो बड़े चेहरों के बीच है। बीजेपी (Bharatiya Janata Party) ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। वे भांडेर तहसील के पिपरौआ गांव से आते हैं। साल 2020 में वे मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं।

कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को टिकट दिया है। घनश्याम सिंह दतिया राजघराने के मुखिया हैं। उनकी उम्र 72 साल है और उन्होंने एमए तक पढ़ाई की है। उनके पिता महाराज कृष्ण सिंह जू देव 1984 में सांसद बने थे। घनश्याम सिंह 1993 और 2003 में दतिया से विधायक चुने गए थे।

इनके अलावा नौ क्षेत्रीय दलों के उम्मीदवार भी मैदान में हैं। इनमें धर्मेंद्र सिंह पंवार, राम सिंह कुशवाह और संजना सिंह किन्नर शामिल हैं। शुभम राजपूत, दामोदर यादव और हरदास कुशवाह भी दौड़ में हैं। जीतेंद्र मांझी, डॉ. राखी बाला और बालकिशुन विश्वकर्मा ने भी नामांकन भरा है। इनके साथ 10 निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं।

उपचुनाव क्यों जरूरी हुआ

दतिया सीट पर उपचुनाव की नौबत एक अदालती फैसले से आई है। कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दो साल से ज्यादा की सजा हुई थी। इस वजह से उनकी विधानसभा सदस्यता अपने आप खत्म हो गई। मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने तुरंत सीट खाली घोषित कर दी। यह कार्रवाई जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के तहत हुई। इसके साथ संविधान के अनुच्छेद 191(1)(e) का भी हवाला दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस बनाम भारत संघ फैसले का भी असर रहा।

एफडी फर्जीवाड़े का मामला

यह पूरा मामला साल 1998 का है। दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में एक एफडी (Fixed Deposit) कराई गई थी। आरोप है कि बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर की गई। एफडी की अवधि तीन साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी गई। इसी आधार पर 1999 से 2011 के बीच ब्याज निकाला जाता रहा। उस दौरान राजेन्द्र भारती बैंक के अध्यक्ष थे। वे संबंधित संस्था के ट्रस्टी भी थे। बाद में मामले की जांच शुरू हुई। जांच पूरी होने पर आरोपपत्र दायर किया गया।

कोर्ट ने सुनाई सजा

01 अप्रैल 2026 को दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट (Member of Parliament- Member of Legislative Assembly Court) ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने राजेन्द्र भारती को इस पुराने मामले में दोषी ठहराया। यह मामला करीब 28 साल पुराना था। दोषी करार दिए जाने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत भेजा गया।

अगले दिन यानी 02 अप्रैल को सजा सुनाई गई। कोर्ट ने उन्हें तीन साल कैद और एक लाख रुपए जुर्माने की सजा दी। हाईकोर्ट में अपील के लिए 60 दिन की मोहलत भी दी गई। लेकिन उनकी दोषसिद्धि बरकरार रही।

सीट रिक्त क्यों हुई

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) साफ नियम बताती है। दो साल या उससे ज्यादा सजा होने पर विधायक अयोग्य हो जाता है। 2013 में सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस फैसले ने इसे और सख्त बना दिया। इसके बाद ऐसी सदस्यता तुरंत खत्म मानी जाती है।

सिर्फ अपील दायर करने से सदस्यता वापस नहीं मिलती। इसके लिए ऊपरी अदालत को दोषसिद्धि पर रोक लगानी होती है। 02 अप्रैल को ही विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी की। सीट को रिक्त घोषित कर चुनाव आयोग को सूचना भेजी गई।

2023 का चुनावी नतीजा

पिछली बार 2023 में दतिया सीट पर राजेन्द्र भारती जीते थे। उन्हें कुल 88 हजार 977 वोट मिले थे। उनका वोट शेयर 50.34 प्रतिशत रहा था। दूसरे नंबर पर बीजेपी के डॉ. नरोत्तम मिश्रा रहे थे। उन्हें 81 हजार 235 वोट मिले थे। जीत का अंतर सिर्फ सात हजार 742 वोटों का था। अब उसी सीट पर दोबारा चुनाव हो रहा है।

चुनाव कार्यक्रम जानें

उपचुनाव की अधिसूचना 06 जुलाई को जारी हुई थी। नामांकन भरने की अंतिम तारीख 13 जुलाई थी। नामांकन पत्रों की जांच 14 जुलाई को हुई। नाम वापसी की अंतिम तारीख 16 जुलाई तय हुई थी। अब 30 जुलाई को मतदान हो रहा है। नतीजा 03 अगस्त को आएगा। तब पता चलेगा कि दतिया की जनता किसे चुनती है।

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