Davv : पेपर लीक कांड में अक्षय बम का आयडलिक कॉलेज अब 3 साल तक परीक्षा केंद्र नहीं बनेगा, 5 लाख की पेनल्टी भी लगी
Marut raj | Jun 12, 2024, 16:40 IST
Davv paper leak case Akshay Bam Idyllic College indore द सूत्र
कांग्रेस से बीजेपी में गए अक्षय बम के आयडलिक कॉलेज से एमबीए का पेपर लीक होने की पुष्टि हुई है। अब इसे तीन साल तक किसी भी परीक्षा के लिए सेंटर नहीं बनाया जाएगा।
संजय गुप्ता, indore. DAVV में हुए एमबीए पेपर लीक केस में बड़ा अपडेट सामने आ रहा है। दरअसल, कांग्रेस से बीजेपी में गए अक्षय बम के आयडलिक कॉलेज इंदौर से लीक होने की पुष्टि होने के बाद कॉलेज पर पांच लाख की पेनल्टी लग गई है। साथ ही यूनिवर्सिटी की कार्यपरिषद की बुधवार को हुई बैठक में तय हुआ कि कॉलेज को अब तीन साल तक किसी भी परीक्षा के लिए सेंटर नहीं बनाया जाएगा।
चार सदस्यीय जांच कमेटी ने बुधवार को यूनिवर्सिटी प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी, जिसे कार्य परिषद की बैठक में रखा गया। कार्यपरिषद की बैठक में पहली बार उच्च शिक्षा आयुक्त निशांत वरवड़े भी पहुंचे। रिपोर्ट में कॉलेज में परीक्षा सेंटर के हिसाब से जो मानक होने चाहिए, इसमें भारी कमियां पाई।
इस रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज पर पेनल्टी लगाई गई। साथ ही तय हुआ कि इसकी मान्यता रखी जाना है या नहीं, इसके लिए भी कमेटी कॉलेज का दौरा करेगी और यदि गड़बड़ी मिली तो मान्यता रद्द की जाएगी। इसकी मान्यता रद्द करने के लिए एबीवीपी और एनएसयूआई दोनों ही लगातार मांग उठा रहे हैं।
वहीं चार पेज की जांच रिपोर्ट में संघवी कॉलेज की लापरवाही भी सामने आई है। यह कॉलेज भी कांग्रेस से बीजेपी में गए पंकज संघवी का है। पेपर आउट होने के बाद संघवी कॉलेज से जब पुराने पेपर के बंडल मंगाए गए, तो उसमें छेड़ छाड़ मिली थी।
इसके चलते संघवी कॉलेज को भी अगले तीन साल तक एग्जाम सेंटर नहीं बनाने का निर्णय लिया गया है। बैठक में एमबीए पेपर लीक मामले की जांच रिपोर्ट पर चर्चा के साथ ही वित्त विभाग से जुड़े प्रस्ताव भी रखे गए। संविदा कर्मचारी, अतिथि शिक्षकों के मानदेय और एरियर सहित अन्य प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई ।
कुलगुरु डॉ. रेणु जैन ने मामले में विश्वविद्यालय लोकपाल नरेंद्र सतसंगी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी बनाई थी। जिसमें अतिरिक्त संचालक सुधा सिलावट, प्रोफेसर लक्ष्मीकांत त्रिपाठी और प्रो.राजीव दीक्षित को शामिल किया था। लगभग दो सप्ताह की जांच के बाद कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है।
मामले में पुलिस भी दो छात्र सहित बम के कॉलेज के कम्प्यूटर ऑपरेटर को भी गिरफ्तार किया था। ऑपरेटर ने प्रिंसीपल के कक्ष से पेपर निकाला था और दो हजार रुपए में छात्र को दिया था।
कमेटी ने पाया है कि कॉलेज के स्तर पर लापरवाही हुई है। कॉलेज प्रिंसिपल भी इस संबंध में लिखित में जवाब यूनिवर्सिटी प्रशासन को दे चुकी है। मामले में कॉलेज की संबद्धता समाप्त करने की मांग कांग्रेस ने की है।
जानकारी अनुसार यूनिवर्सिटी परीक्षा केंद्रों काे पर्चे थाने भेजने के लिए भी राशि देती है। इसके अलावा हर प्रक्रिया का खर्च दिया जाता है। यही नहीं सारी प्रक्रिया कैसे पूरी करना है, कब कैसे और किसकी उपस्थिति में परचे खुलेंगे, थाने कब भेजे जाएंगे, केंद्राध्यक्ष, प्राचार्य की क्या जिम्मेदारी हाेगी, यह सब पहले से तय हाेता है, फिर भी कॉलेज की तरफ से यह चूक की गई। Davv paper leak case | डीएवीवी पेपर लीक केस
कमेटी की रिपोर्ट के बाद हुआ फैसला
चार सदस्यीय जांच कमेटी ने बुधवार को यूनिवर्सिटी प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी, जिसे कार्य परिषद की बैठक में रखा गया। कार्यपरिषद की बैठक में पहली बार उच्च शिक्षा आयुक्त निशांत वरवड़े भी पहुंचे। रिपोर्ट में कॉलेज में परीक्षा सेंटर के हिसाब से जो मानक होने चाहिए, इसमें भारी कमियां पाई।
इस रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज पर पेनल्टी लगाई गई। साथ ही तय हुआ कि इसकी मान्यता रखी जाना है या नहीं, इसके लिए भी कमेटी कॉलेज का दौरा करेगी और यदि गड़बड़ी मिली तो मान्यता रद्द की जाएगी। इसकी मान्यता रद्द करने के लिए एबीवीपी और एनएसयूआई दोनों ही लगातार मांग उठा रहे हैं।
उधर एक और कांग्रेस से बीजेपी में गए संघवी के कॉलेज में भी सब ठीक नहीं
वहीं चार पेज की जांच रिपोर्ट में संघवी कॉलेज की लापरवाही भी सामने आई है। यह कॉलेज भी कांग्रेस से बीजेपी में गए पंकज संघवी का है। पेपर आउट होने के बाद संघवी कॉलेज से जब पुराने पेपर के बंडल मंगाए गए, तो उसमें छेड़ छाड़ मिली थी।
इसके चलते संघवी कॉलेज को भी अगले तीन साल तक एग्जाम सेंटर नहीं बनाने का निर्णय लिया गया है। बैठक में एमबीए पेपर लीक मामले की जांच रिपोर्ट पर चर्चा के साथ ही वित्त विभाग से जुड़े प्रस्ताव भी रखे गए। संविदा कर्मचारी, अतिथि शिक्षकों के मानदेय और एरियर सहित अन्य प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई ।
इस कमेटी ने दी थी रिपोर्ट
कुलगुरु डॉ. रेणु जैन ने मामले में विश्वविद्यालय लोकपाल नरेंद्र सतसंगी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी बनाई थी। जिसमें अतिरिक्त संचालक सुधा सिलावट, प्रोफेसर लक्ष्मीकांत त्रिपाठी और प्रो.राजीव दीक्षित को शामिल किया था। लगभग दो सप्ताह की जांच के बाद कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है।
मामले में पुलिस भी दो छात्र सहित बम के कॉलेज के कम्प्यूटर ऑपरेटर को भी गिरफ्तार किया था। ऑपरेटर ने प्रिंसीपल के कक्ष से पेपर निकाला था और दो हजार रुपए में छात्र को दिया था।
कमेटी ने पाया है कि कॉलेज के स्तर पर लापरवाही हुई है। कॉलेज प्रिंसिपल भी इस संबंध में लिखित में जवाब यूनिवर्सिटी प्रशासन को दे चुकी है। मामले में कॉलेज की संबद्धता समाप्त करने की मांग कांग्रेस ने की है।
थाने भेजने का भी पैसा देती है यूनिवर्सिटी
जानकारी अनुसार यूनिवर्सिटी परीक्षा केंद्रों काे पर्चे थाने भेजने के लिए भी राशि देती है। इसके अलावा हर प्रक्रिया का खर्च दिया जाता है। यही नहीं सारी प्रक्रिया कैसे पूरी करना है, कब कैसे और किसकी उपस्थिति में परचे खुलेंगे, थाने कब भेजे जाएंगे, केंद्राध्यक्ष, प्राचार्य की क्या जिम्मेदारी हाेगी, यह सब पहले से तय हाेता है, फिर भी कॉलेज की तरफ से यह चूक की गई। Davv paper leak case | डीएवीवी पेपर लीक केस
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