देवास में 20 दिन में 13 लोगों की मौत से मचा हड़कंप, परिजन बोले-जहरीली शराब पीने से पहले आंखों की रोशनी गई, फिर जान, प्रशासन का आरोपों से इनकार
Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 24, 2026, 10:52 IST
एमपी के देवास में 20 दिन में 13 मौतें, परिजनों ने लगाया जहरीली शराब का आरोप
मध्य प्रदेश के देवास जिले में 13 लोगों की मौत पर सवाल उठ रहे हैं। ये मौतें दो गांवों में महज 20 दिनों के अंदर हुई हैं। दस मृतकों के परिजनों ने जहरीली शराब पीने से मौत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ी। कुछ लोगों को उल्टियां हुईं और आंखों की रोशनी चली गई। इसके बाद उनकी मौत हो गई।
दो युवक अभी अस्पताल में भर्ती हैं। हालांकि प्रशासन ने जहरीली शराब से मौत होने की बात नकारी है। आबकारी विभाग का कहना है कि जांच में शराब जहरीली नहीं मिली।
देवास जिले के चंदाना और बिंजाना गांवों में मौतों का मामला सामने आया है। यहां 27 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच 13 लोगों की मौत हुई है।
चंदाना गांव देवास जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर है। यहां नौ लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। पड़ोसी गांव बिंजाना में चार लोगों की जान गई है।
मृतकों में ज्यादातर मजदूरी करने वाले लोग थे। लगातार हुई मौतों के बाद ग्रामीणों ने शराब की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि जहरीली शराब के कारण लोगों की जान गई है। दूसरी तरफ प्रशासन इन मौतों की अलग वजह बता रहा है।
चंदाना गांव के चार लोगों की मौत को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक 15 अक्टूबर को चार दोस्तों ने साथ बैठकर शराब पी थी। इनमें 28 वर्षीय दीपक रावत और 35 वर्षीय जितेंद्र शामिल थे।
उनके साथ 35 वर्षीय ओमप्रकाश और 55 वर्षीय भीमा भी थे। ग्रामीणों का दावा है कि अगले दिन चारों की मौत हो गई। यानी 16 अक्टूबर को चारों ने दम तोड़ दिया। ग्रामीण इन मौतों को शराब पीने से जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि चारों की मौत का कारण जहरीली शराब होना आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुआ है।
चंदाना गांव के दो युवक बीमार होने के बाद अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें 28 वर्षीय कैलाश प्रजापत और 25 वर्षीय संजय शामिल हैं। दोनों का इंदौर के अरबिंदो और अमलतास अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
संजय के भाई महेश ने उसकी हालत के बारे में जानकारी दी है। महेश का कहना है कि संजय ने भी शराब पी थी। इसके बाद अचानक उसकी आंखों की रोशनी चली गई। हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
महेश के मुताबिक संजय अभी आईसीयू में है। देवास शराब मौत मामले में आंखों की रोशनी जाने की शिकायत भी सामने आई है।
चंदाना गांव में चार दोस्तों के अलावा अन्य लोगों की मौत भी हुई है। इनमें 50 वर्षीय मोहन और 30 वर्षीय सुनील शामिल हैं। गांव के 60 वर्षीय दरबार सिंह की भी मौत हुई है।
परिजनों के मुताबिक शराब पीने के बाद कुछ लोगों की तबीयत खराब हुई थी। कई लोगों को उल्टियों की शिकायत भी हुई। ग्रामीणों ने इन लक्षणों को लेकर जांच की मांग उठाई है।
हालांकि प्रशासन ने जब्त शराब में किसी जहरीले तत्व की पुष्टि नहीं की है।
ग्रामीणों ने प्रशासन की ओर से बताई गई मौत की वजह पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों ने मौतों के पीछे पानी को कारण बताया था।
ग्रामीण इस बात से सहमत नहीं हैं। उनका सवाल है कि गांव का पानी तो सभी लोग पीते हैं। महिलाएं और बच्चे भी इसी पानी का इस्तेमाल करते हैं। फिर केवल शराब पीने वाले लोग ही क्यों प्रभावित हुए? ग्रामीणों का कहना है कि मौतों की वजह स्पष्ट होनी चाहिए।
हालांकि पानी से मौत होने की बात की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मृतकों के परिजनों ने गांव में शराब बेचने वाले दो लोगों के नाम बताए हैं। इनमें विंदू जायसवाल और विष्णु जायसवाल शामिल हैं। ग्रामीणों के मुताबिक मृतक इन्हीं लोगों से शराब खरीदते थे।
दोनों के फरार होने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों खुद को शराब बेचने के लिए अधिकृत बताते थे। उनका दावा था कि शराब ठेकेदार ने उन्हें बिक्री की अनुमति दी है। हालांकि उनके पास शराब बेचने की वैध अनुमति थी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।
ग्रामीणों ने शराब बेचने के एक तरीके का भी जिक्र किया है। इसे डायरी सिस्टम बताया जा रहा है। इसके तहत शराब की बिक्री का हिसाब डायरी में रखा जाता है।
ग्रामीणों के मुताबिक दोनों कथित विक्रेता इसी व्यवस्था से शराब बेचते थे। वे शराब ठेकेदार की अनुमति होने का दावा भी करते थे। हालांकि इस व्यवस्था की कानूनी स्थिति और संबंधित अनुमति की पुष्टि नहीं हुई है।
चंदाना के पड़ोसी गांव बिंजाना में भी चार लोगों की मौत हुई है। यहां मौत से पहले शराब पीने को लेकर परिजनों के अलग-अलग बयान सामने आए हैं।
गांव के 45 वर्षीय ओमप्रकाश की मौत 15 अक्टूबर को हुई थी। उनके परिजनों का कहना है कि ओमप्रकाश ने उस दिन शराब नहीं पी थी।
लेकिन उनके भतीजे कमलेश ने इससे अलग जानकारी दी है। कमलेश के मुताबिक ओमप्रकाश ने मौत वाले दिन शराब पी थी।
इस कारण मौत से पहले शराब पीने की बात पर भी मतभेद हैं।
MP Liquor Case में प्रशासन और परिजनों के बयान अलग-अलग हैं। देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने जहरीली शराब से मौत होने के आरोपों को भ्रामक बताया है।
एसडीएम अभिषेक शर्मा ने भी इन आरोपों का खंडन किया है। अधिकारियों का दावा है कि चंदाना में 10 लोगों की मौत अन्य कारणों से हुई थी।
प्रशासन के अनुसार जब्त की गई शराब लाइसेंसी थी। जांच में उसमें जहर होने की पुष्टि नहीं हुई। इसलिए अधिकारी इन मौतों को जहरीली शराब से जोड़ने से इनकार कर रहे हैं।
आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने भी मामले में विभाग का पक्ष रखा है। उनके मुताबिक यह मामला करीब 15 से 20 दिन पुराना है। इसकी जांच पहले ही कराई जा चुकी है।
शराब की जांच में कोई जहरीला तत्व नहीं मिला। दीपक सक्सेना ने बताया कि पोस्टमार्टम में मौत की अलग वजह सामने आई है।
उनके अनुसार अत्यधिक शराब सेवन से मल्टीपल ऑर्गन फेलियर हुआ था। इसका मतलब है कि शरीर के कई जरूरी अंगों ने काम करना बंद कर दिया।
आबकारी आयुक्त ने कहा कि नए तथ्य मिलने पर दोबारा जांच कराई जाएगी।
पिछले तीन महीनों में शराब से जुड़े तीन बड़े मामले सामने आए हैं। अगस्त में गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब पीने से 13 लोगों की मौत हुई थी।
इस मामले का मध्य प्रदेश से कनेक्शन सामने आया था। मुख्य आरोपी को उज्जैन से गिरफ्तार किया गया था। जानकारी के मुताबिक शराब बनाने के लिए मुरैना और राजगढ़ के तस्करों को गुजरात ले जाया गया था।
मौके से जब्त शराब पर उज्जैन आबकारी विभाग की सील लगी होने की जानकारी सामने आई थी। इस मामले ने शराब की अवैध बिक्री और सप्लाई पर सवाल खड़े किए थे।
सितंबर में मध्य प्रदेश के सागर जिले में मिलावटी शराब का मामला सामने आया था। बंडा और शाहगढ़ इलाके में 20 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
जानकारी के मुताबिक नकली शराब बनाने के लिए जहरीला स्प्रिट इस्तेमाल हुआ था। यह स्प्रिट गुजरात के अहमदाबाद से लाया गया था।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश के ललितपुर से नकली रैपर और बोतलें मंगाई गई थीं। इनका इस्तेमाल करके नकली शराब तैयार की गई थी।
इस शराब को 'सागर गोल्ड' के नाम से बेचा गया था। मिलावटी शराब पीने से लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई थी।
देवास के दोनों गांवों में हुई मौतों को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। ग्रामीण जानना चाहते हैं कि इतने कम समय में 13 लोगों की मौत क्यों हुई। शराब पीने के बाद आंखों की रोशनी जाने की शिकायत कैसे सामने आई?
गांव में शराब बेचने वाले लोगों के पास अनुमति थी या नहीं? परिजनों ने इन मामलों पर स्पष्ट जवाब मांगा है। दूसरी तरफ प्रशासन ने जांच रिपोर्ट का हवाला देकर आरोपों को खारिज किया है।
फिलहाल मौतों का कारण जहरीली शराब होना साबित नहीं हुआ है।
दो गांवों में 13 लोगों की मौत
चंदाना गांव देवास जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर है। यहां नौ लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। पड़ोसी गांव बिंजाना में चार लोगों की जान गई है।
मृतकों में ज्यादातर मजदूरी करने वाले लोग थे। लगातार हुई मौतों के बाद ग्रामीणों ने शराब की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि जहरीली शराब के कारण लोगों की जान गई है। दूसरी तरफ प्रशासन इन मौतों की अलग वजह बता रहा है।
चार दोस्तों ने साथ पी थी शराब
उनके साथ 35 वर्षीय ओमप्रकाश और 55 वर्षीय भीमा भी थे। ग्रामीणों का दावा है कि अगले दिन चारों की मौत हो गई। यानी 16 अक्टूबर को चारों ने दम तोड़ दिया। ग्रामीण इन मौतों को शराब पीने से जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि चारों की मौत का कारण जहरीली शराब होना आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुआ है।
शराब पीने के बाद आंखों की रोशनी गई
संजय के भाई महेश ने उसकी हालत के बारे में जानकारी दी है। महेश का कहना है कि संजय ने भी शराब पी थी। इसके बाद अचानक उसकी आंखों की रोशनी चली गई। हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
महेश के मुताबिक संजय अभी आईसीयू में है। देवास शराब मौत मामले में आंखों की रोशनी जाने की शिकायत भी सामने आई है।
चंदाना में इन लोगों की भी गई जान
परिजनों के मुताबिक शराब पीने के बाद कुछ लोगों की तबीयत खराब हुई थी। कई लोगों को उल्टियों की शिकायत भी हुई। ग्रामीणों ने इन लक्षणों को लेकर जांच की मांग उठाई है।
हालांकि प्रशासन ने जब्त शराब में किसी जहरीले तत्व की पुष्टि नहीं की है।
ग्रामीणों ने पानी वाली बात पर उठाए सवाल
ग्रामीण इस बात से सहमत नहीं हैं। उनका सवाल है कि गांव का पानी तो सभी लोग पीते हैं। महिलाएं और बच्चे भी इसी पानी का इस्तेमाल करते हैं। फिर केवल शराब पीने वाले लोग ही क्यों प्रभावित हुए? ग्रामीणों का कहना है कि मौतों की वजह स्पष्ट होनी चाहिए।
हालांकि पानी से मौत होने की बात की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
गांव में कौन बेच रहा था शराब?
दोनों के फरार होने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों खुद को शराब बेचने के लिए अधिकृत बताते थे। उनका दावा था कि शराब ठेकेदार ने उन्हें बिक्री की अनुमति दी है। हालांकि उनके पास शराब बेचने की वैध अनुमति थी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।
क्या है शराब का डायरी सिस्टम?
ग्रामीणों के मुताबिक दोनों कथित विक्रेता इसी व्यवस्था से शराब बेचते थे। वे शराब ठेकेदार की अनुमति होने का दावा भी करते थे। हालांकि इस व्यवस्था की कानूनी स्थिति और संबंधित अनुमति की पुष्टि नहीं हुई है।
बिंजाना में चार लोगों की मौत
गांव के 45 वर्षीय ओमप्रकाश की मौत 15 अक्टूबर को हुई थी। उनके परिजनों का कहना है कि ओमप्रकाश ने उस दिन शराब नहीं पी थी।
लेकिन उनके भतीजे कमलेश ने इससे अलग जानकारी दी है। कमलेश के मुताबिक ओमप्रकाश ने मौत वाले दिन शराब पी थी।
इस कारण मौत से पहले शराब पीने की बात पर भी मतभेद हैं।
प्रशासन ने आरोपों को बताया भ्रामक
एसडीएम अभिषेक शर्मा ने भी इन आरोपों का खंडन किया है। अधिकारियों का दावा है कि चंदाना में 10 लोगों की मौत अन्य कारणों से हुई थी।
प्रशासन के अनुसार जब्त की गई शराब लाइसेंसी थी। जांच में उसमें जहर होने की पुष्टि नहीं हुई। इसलिए अधिकारी इन मौतों को जहरीली शराब से जोड़ने से इनकार कर रहे हैं।
आबकारी आयुक्त ने क्या बताया?
शराब की जांच में कोई जहरीला तत्व नहीं मिला। दीपक सक्सेना ने बताया कि पोस्टमार्टम में मौत की अलग वजह सामने आई है।
उनके अनुसार अत्यधिक शराब सेवन से मल्टीपल ऑर्गन फेलियर हुआ था। इसका मतलब है कि शरीर के कई जरूरी अंगों ने काम करना बंद कर दिया।
आबकारी आयुक्त ने कहा कि नए तथ्य मिलने पर दोबारा जांच कराई जाएगी।
अगस्त में गुजरात से जुड़ा मामला
इस मामले का मध्य प्रदेश से कनेक्शन सामने आया था। मुख्य आरोपी को उज्जैन से गिरफ्तार किया गया था। जानकारी के मुताबिक शराब बनाने के लिए मुरैना और राजगढ़ के तस्करों को गुजरात ले जाया गया था।
मौके से जब्त शराब पर उज्जैन आबकारी विभाग की सील लगी होने की जानकारी सामने आई थी। इस मामले ने शराब की अवैध बिक्री और सप्लाई पर सवाल खड़े किए थे।
सितंबर में सागर में 20 से ज्यादा मौतें
जानकारी के मुताबिक नकली शराब बनाने के लिए जहरीला स्प्रिट इस्तेमाल हुआ था। यह स्प्रिट गुजरात के अहमदाबाद से लाया गया था।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश के ललितपुर से नकली रैपर और बोतलें मंगाई गई थीं। इनका इस्तेमाल करके नकली शराब तैयार की गई थी।
इस शराब को 'सागर गोल्ड' के नाम से बेचा गया था। मिलावटी शराब पीने से लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई थी।
जांच को लेकर अब भी कई सवाल
गांव में शराब बेचने वाले लोगों के पास अनुमति थी या नहीं? परिजनों ने इन मामलों पर स्पष्ट जवाब मांगा है। दूसरी तरफ प्रशासन ने जांच रिपोर्ट का हवाला देकर आरोपों को खारिज किया है।
फिलहाल मौतों का कारण जहरीली शराब होना साबित नहीं हुआ है।
FAQ
- देवास जिले में 20 दिनों के भीतर कितने लोगों की मौत हुई?
देवास जिले के चंदाना और बिंजाना गांवों में 13 लोगों की मौत हुई। ये मौतें 27 सितंबर से 16 अक्टूबर 2026 के बीच हुईं। - देवास में जहरीली शराब से मौत होने का आरोप किसने लगाया?
दस मृतकों के परिजनों ने जहरीली शराब पीने से मौत होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कुछ लोगों को उल्टियां हुईं और आंखों की रोशनी चली गई। - देवास में चार दोस्तों की मौत कैसे हुई?
ग्रामीणों के अनुसार चंदाना के चार लोगों ने 15 अक्टूबर को साथ शराब पी थी। अगले दिन चारों की मौत हो गई। मौत की वजह जहरीली शराब होना साबित नहीं हुआ है। - देवास शराब मामले में प्रशासन का क्या कहना है?
प्रशासन ने जहरीली शराब से मौत होने के आरोपों को खारिज किया है। आबकारी विभाग के मुताबिक शराब की जांच में जहर नहीं मिला। विभाग ने अत्यधिक शराब सेवन से मल्टीपल ऑर्गन फेलियर होने की बात कही है। - देवास में शराब पीने के बाद बीमार हुए कितने लोगों का इलाज चल रहा है?
कैलाश प्रजापत और संजय नाम के दो युवकों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। संजय के परिजनों के मुताबिक उसकी आंखों की रोशनी चली गई और वह आईसीयू में भर्ती है।
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