धार भोजशाला देखने जाएगी हाईकोर्ट की बेंच, इसके बाद दो अप्रैल से करेगी फाइनल सुनवाई
INDORE. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद धार भोजशाला को लेकर इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हो चुकी है। बीती सुनवाई में सभी पक्षकारों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई सर्वे रिपोर्ट (ASI Survey Report) पर अपनी आपत्ति, सुझाव देने के लिए कहा गया था।
इसके बाद सोमवार को इस मामले (धार भोजशाला मामले में सुनवाई) में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच में सुनवाई हुई। इसमें हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि वह एक बार खुद मौके पर जाकर धार भोजशाला को देखेगी।
इस तरह आगे होगी सुनवाई
सुनवाई के दौरान सोमवार को कोर्ट रूम काफी गर्म रहा और बहस चली। इस दौरान तय किया गया कि पहले याचिकाकर्ताओं को सुना जाएगा। फिर पक्षकारों को सुना जाएगा। इसके बाद समय हुआ तो इंटरविनर को सुनेंगे।
सुनवाई में यह बात उठी कि इसमें कई लोग बेवजह इंटरविनर बनकर आ रहे हैं। इससे केस में देरी होगी। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इसमें जल्द सुनवाई के लिए कहा है।
यह सभी अधिवक्ता रहे मौजूद
इस मामले में कई लोगों की तरफ से याचिकाएं लगाई गई हैं। इनमें काजी जकुल्लाह, अंतर सिंह और अन्य लोग, मौलाना कमालउद्दीन वेलफेयर सोसायटी धार के अब्दुल समद खान, कुलदीप तिवारी और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान एएसआई की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन कोर्ट में मौजूद थे। वहीं राज्य सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह पेश हुए।
इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन भी अदालत में मौजूद रहीं। वहीं हिंदू फ्रंट की तरफ से याचिकाकर्ता आशीष गोयल और अधिवक्ता विनय जोशी कोर्ट में उपस्थित थे। इसके अलावा अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल हुए।
सिविल कोर्ट में भी लगा केस
वहीं यह बात भी सामने आई है कि इसे लेकर सिविल कोर्ट धार में भी वाद लगाया गया है। साथ ही जैन समाज भी यहां जैन मंदिर होने का दावा करता है। यह भी कानूनी केस इसमें लगे हुए हैं।
एएसआई सर्वे रिपोर्ट पर होना थी बहस
23 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों को दो सप्ताह के भीतर एएसआई रिपोर्ट (ASI Report) पर अपने सुझाव और आपत्तियां देने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि रिपोर्ट पहले ही खोली जा चुकी है और उसकी प्रतियां सभी पक्षों को उपलब्ध करा दी गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी प्रक्रिया
इस मामले में 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच को तीन सप्ताह के भीतर सुनवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे। दरअसल, एएसआई सर्वे (Bhojshala ASI report) के बाद की कानूनी प्रक्रिया कुछ समय के लिए रुकी हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 18 फरवरी को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए मामले को फिर से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट इंदौर बेंच को सौंप दिया। इसके बाद अब इंदौर बेंच में इस मामले की सुनवाई जारी है।
ASI ने करीब 100 दिन किया वैज्ञानिक सर्वे
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने 22 मार्च 2024 से भोजशाला परिसर और उसके आसपास 50 मीटर क्षेत्र में विस्तृत जांच की।
यह सर्वे लगभग 98 से 100 दिनों तक चला। इस दौरान टीम ने सीमित उत्खनन, संरचनात्मक जांच और ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन किया।
ASI रिपोर्ट में क्या मिला
एएसआई की रिपोर्ट (धार भोजशाला मामला) में 12वीं से 20वीं सदी तक के कई ऐतिहासिक प्रमाण मिलने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार परिसर में विभिन्न भाषाओं और लिपियों के शिलालेख मिले हैं।
प्रमुख खोजें
- संस्कृत और प्राकृत भाषा के शिलालेख
- नागरी लिपि के अभिलेख
- अरबी और फारसी में लिखे शिलालेख
- धार्मिक और शैक्षणिक गतिविधियों के संकेत
एएसआई के अनुसार भोजशाला परिसर (धार भोजशाला न्यूज) में 56 अरबी-फारसी शिलालेख भी मिले हैं। इनमें धार्मिक दुआएं, नाम और धार्मिक वाक्य लिखे हुए हैं।
वहीं 12वीं से 16वीं सदी के संस्कृत और प्राकृत शिलालेखों में पारिजातमंजरी-नाटिका और अवनिकर्मसातम जैसे उल्लेख पाए गए हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ पत्थरों पर पुरानी लिखावट को मिटाकर दोबारा इस्तेमाल किए जाने के संकेत मिले हैं।
धार भोजशाला विवाद क्या है?
भोजशाला विवाद (Bhojshala Dispute) मध्यप्रदेश के धार शहर में स्थित एक ऐतिहासिक परिसर से जुड़ा मामला है।
- हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर मानता है
- मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता है
- दोनों समुदाय यहां धार्मिक अधिकारों की मांग करते रहे हैं
- इसी कारण यह मामला अदालत में विचाराधीन है
स्थल का ऐतिहासिक महत्व
एएसआई की रिपोर्ट (Dhar Bhojshala case hearing) में यह भी उल्लेख किया गया है कि भोजशाला परिसर अलग-अलग कालखंडों में धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।
ब्रिटिश काल से लेकर वर्तमान समय तक इस स्थल के संरक्षण के प्रयासों का भी उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थान मध्यकालीन भारत के सांस्कृतिक इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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