बसंत पंचमी पर भोजशाला में अखंड हवन-पूजन की मांग, आखिर क्या है भोजशाला विवाद, जानें

Anjali Dwivedi | Jan 13, 2026, 14:38 IST
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धार जिले में स्थित भोजशाला में बसंत पंचमी पर अखंड हवन और पूजा की अनुमति को लेकर कई समाजों ने प्रशासन से मांग की है। साथ ही शांतिपूर्ण आयोजन की अपील की है।

News In Short

  • धार जिले में भोजशाला में बसंत पंचमी पर अखंड हवन और पूजा की अनुमति की मांग।
  • 12 जनवरी को विभिन्न समाजों ने नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
  • केंद्रीय पुरातत्व विभाग के आदेश के अनुसार हिंदुओं को पूजा का अधिकार।
  • इन समाजों ने प्रशासन से आयोजन को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने की अपील की है।
  • भोजशाला विवाद में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के दावे हैं।

News In Detail

धार भोजशाला न्यूज. मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला में इस बार बसंत पंचमी के मौके पर अखंड हवन और पूजा की अनुमति को लेकर समाजों ने प्रशासन से अपील की है। 12 जनवरी सोमवार को सकल पंच रजक समाज, गुजराती दर्जी समाज, मराठा समाज और राठौर समाज के प्रतिनिधियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर नायब तहसीलदार जागर सिंह रावत को ज्ञापन सौंपा है।



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इन समाजों ने ज्ञापन में बताया कि केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने 7 अप्रैल 2003 को जारी आदेश के अनुसार हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करने का अधिकार है। साथ ही खबर में ये भी जानेंगे की भोजशाला का इतिहास और विवाद क्या है?



क्या है धार की भोजशाला का इतिहास

हजार साल पहले धार में परमार वंश का शासन था। यहां पर 1000 से 1055 ईस्वी तक राजा भोज ने शासन किया। राजा भोज सरस्वती देवी के अनन्य भक्त थे। उन्होंने 1034 ईस्वी में यहां पर एक महाविद्यालय की स्थापना की, जिसे बाद में भोजशाला के नाम से जाना जाने लगा। इसे हिंदू सरस्वती मंदिर भी मानते थे।



ऐसा कहा जाता है कि 1305 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने भोजशाला को ध्वस्त कर दिया था। बाद में 1401 ईस्वी में दिलावर खान गौरी ने भोजशाला के एक हिस्से में मस्जिद बनवा दिया था। 1514 ईस्वी में महमूद शाह खिलजी ने दूसरे हिस्से में भी मस्जिद बनवा दी।



बताया जाता है कि 1875 में यहां पर खुदाई की गई थी। इस खुदाई में सरस्वती देवी की एक प्रतिमा निकली। इस प्रतिमा को मेजर किनकेड नाम का अंग्रेज लंदन ले गया। फिलहाल ये प्रतिमा लंदन के संग्रहालय में है।



क्या है धार की भोजशाला विवाद?

भोजशाला का विवाद लंबा और जटिल है। हिंदू संगठनों का कहना है कि भोजशाला को राजा भोज ने हिंदू धार्मिक स्थल के रूप में स्थापित किया था। उनका दावा है कि कुछ समय के लिए मुस्लिमों को यहां नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। वहीं, मुस्लिम समाज का कहना है कि वे यहां कई वर्षों से नमाज पढ़ते आ रहे हैं और इसे मस्जिद के रूप में मानते हैं।



समाजों ने की शांति की अपील

समाजों ने प्रशासन से अपील की है कि बसंत पंचमी पर अखंड हवन और पूजा शांति से हो। वे चाहते हैं कि आयोजन पूरी तरह अनुशासन से किया जाए और सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की जाए। सकल पंच रजक समाज के अध्यक्ष कैलाश पिपलोदिया ने बताया कि पूजा पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार होगी। गुजराती दर्जी समाज के बाबूलाल गोयल, मराठा समाज के शुभम साठे और राठौर समाज के श्याम मालवा ने भी यह पुष्टि की कि आयोजन धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप होगा।



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