मेट्रो भरपाई के लिए लगे 1.90 करोड़ के पौधे सूखे, पौधारोपण पर उठे सवाल
समझें क्या है पूरा मामला
- धार के शेरगढ़ में मेट्रो भरपाई पौधारोपण हुआ।
- करीब 30 हजार पौधे लगाए गए थे।
- तीन महीने बाद ज्यादातर पौधे सूखे मिले।
- पौधारोपण पर 1.90 करोड़ रुपए खर्च हुए।
- देखभाल व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मेट्रो के लिए कटे पेड़
मेट्रो रेल परियोजना के निर्माण के दौरान धार जिले में बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए थे। नियमानुसार जितने पेड़ काटे जाते हैं, उतनी ही भरपाई के लिए नए पौधे लगाना जरूरी होता है। इसी नियम के तहत जिला प्रशासन और वन विभाग ने भरपाई का पौधारोपण कराया था। उद्देश्य साफ था, कटे पेड़ों की जगह नए पेड़ खड़े हों और क्षेत्र की हरियाली बनी रहे।
कहां हुआ पौधारोपण
यह पौधारोपण धार जिले के सरदारपुर वन परिक्षेत्र की कौद बीट के अंतर्गत आने वाले गांव शेरगढ़ में किया गया। वन विभाग ने करीब तीन महीने पहले यह अभियान चलाया था। कुल 30.178 हेक्टेयर जमीन पर 30,178 पौधे रोपे गए थे। यानी हर हेक्टेयर में करीब एक हजार पौधे लगाने की योजना बनाई गई थी।
1.90 करोड़ का खर्च
इस पूरे पौधारोपण अभियान पर करीब 1 करोड़ 91 लाख 77 हजार रुपए खर्च किए गए। यह राशि सरकारी खजाने से मेट्रो परियोजना की पर्यावरणीय भरपाई के तहत खर्च हुई। मकसद था कि कटे पेड़ों के बदले क्षेत्र में स्थायी हरियाली विकसित हो और मेट्रो निर्माण से हुए पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई हो सके।
अब सिर्फ सूखे डंठल
जहां पर पौधे लगाए गए थे वहां की हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जांच में सामने आया कि लगाए गए पौधों में से बड़ी संख्या में पौधे सूख चुके हैं। कई जगहों पर तो पौधों का अस्तित्व तक नजर नहीं आता। जहां तीन महीने पहले हरे-भरे पौधे रोपे गए थे, वहां अब सिर्फ सूखे डंठल बचे हैं।
देखभाल पर सवाल
विशेषज्ञों के अनुसार, पौधारोपण का काम केवल पौधे जमीन में गाड़ने तक सीमित नहीं होता। पौधों की नियमित सिंचाई, सुरक्षा और देखरेख उतनी ही जरूरी होती है, जितना उन्हें लगाना। अगर रोपाई के बाद निगरानी न हो, तो करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद योजना का मकसद अधूरा रह जाता है। शेरगढ़ का यह मामला भी इसी लापरवाही की ओर इशारा करता है।
सरकार हर साल पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाती है। ऐसे में अगर भरपाई के लिए लगाए गए पौधे शुरुआती महीनों में ही सूख जाएं, तो योजना की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। पौधारोपण की सफलता सिर्फ पौधे लगाने से नहीं, बल्कि उनके जीवित बचे रहने से आंकी जाती है।
रेंजर ने साधी चुप्पी
इस मामले में सरदारपुर वन परिक्षेत्र के रेंजर शैलेंद्र सोलंकी से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई। लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिल सका। जवाब न मिलने से इस पूरे मामले में जवाबदेही को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।
आगे क्या जरूरी
अब सवाल यह है कि 1.90 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद पौधारोपण की मौजूदा स्थिति की जिम्मेदारी किस पर तय होगी। स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े लोगों की मांग है कि वन विभाग इस मामले की जांच कराए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि आगे से भरपाई पौधारोपण की नियमित निगरानी हो, ताकि करोड़ों रुपए के खर्च का असल फायदा मिल सके।
FAQ
- धार में पौधारोपण किस वजह से किया गया था?
मेट्रो रेल परियोजना के लिए धार जिले में हजारों पेड़ काटे गए थे। इनकी भरपाई के लिए वन विभाग ने शेरगढ़ गांव में पौधारोपण कराया। इस पर करीब 1.90 करोड़ रुपए खर्च हुए। - कितने पौधे लगाए गए थे और अब क्या हालत है?
वन विभाग ने 30.178 हेक्टेयर क्षेत्र में 30,178 पौधे लगाए थे। तीन महीने बाद ही इनमें से बड़ी संख्या में पौधे सूख गए। कई जगह तो पौधों का नामोनिशान तक नहीं बचा है।
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