केंद्र की स्कीम में पिछड़ा एमपी, न सड़कें बनीं, न छात्रावास,गैस कनेक्शन में अव्वल

Aman Vaishnav | Jul 31, 2026, 12:00 IST
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केंद्र की स्कीम में पिछड़ा एमपी
केंद्र की स्कीम में पिछड़ा एमपी

केंद्र सरकार के धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के हाल मध्य प्रदेश में मिले जुले ही हैं। साथ ही एमपी में सड़क निर्माण में 0% प्रगति रही, जबकि आदिवासी परिवारों को गैस कनेक्शन देने में राज्य पूरे देश में पहले स्थान पर रहा।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • केंद्र सरकार ने धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान शुरू किया था।
  • इस अभियान के क्रियान्वयन को लेकर संसद में आंकड़े पेश हुए हैं।
  • इनमें मध्य प्रदेश की स्थिति मिली-जुली नजर आई।
  • सड़क और ST हॉस्टल निर्माण में प्रगति शून्य रही।
  • वहीं गैस कनेक्शन बांटने में मध्य प्रदेश देश में पहले नंबर पर पहुंच गया।

संसद में पेश हुए आंकड़े

केंद्र सरकार द्वारा आदिवासी बहुल इलाकों में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) शुरू किया गया था।

समग्र विकास के लिए शुरू किए गए इस अभियान के क्रियान्वयन को लेकर संसद में आंकड़े सामने आए हैं। इस अभियान के तहत सड़क, पानी, बिजली, आवास, मोबाइल नेटवर्क, ST हॉस्टल और गैस कनेक्शन जैसी सुविधाएं आदिवासी गांवों तक पहुंचाई जानी हैं।

इन आंकड़ों से हर राज्य की प्रगति की तस्वीर साफ हुई है। मध्य प्रदेश कुछ योजनाओं में आगे है, तो कुछ में सबसे पीछे। यह मिला-जुला प्रदर्शन अभियान की जमीनी हकीकत को उजागर करता है।

dharti-aaba-tribal-village-mp-report
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सड़क और हॉस्टल में सुस्ती

जनजातीय बसावटों को सड़क से जोड़ने के लिए मध्य प्रदेश में 913 किलोमीटर की 345 सड़कें स्वीकृत हुई थीं। हैरानी की बात है कि जमीन पर एक भी सड़क पूरी नहीं बन सकी। निर्माण की दर शून्य फीसदी रही।

देश भर में 13 राज्य इस मामले में पूरी तरह फिसड्डी रहे हैं। इनमें मध्य प्रदेश के साथ ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश भी शामिल हैं। पूरे देश में सिर्फ छत्तीसगढ़ ही 3.9 किलोमीटर सड़क बना सका।

ST हॉस्टल के मामले में भी मध्य प्रदेश का हाल खराब रहा है। यहां 104 हॉस्टल स्वीकृत हुए थे, लेकिन एक भी पूरा नहीं बना। प्रदेश उन 22 राज्यों में शामिल है, जहां हॉस्टल निर्माण की प्रगति शून्य रही।

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पानी और आवास की स्थिति

इसके अलावा नल जल योजना के तहत मध्य प्रदेश में 11 हजार 309 गांव लक्षित थे। इनमें से 6 हजार 112 गांवों तक पानी पहुंचाया जा चुका है। यह करीब 54 फीसदी कवरेज है, जो देश में 12वां स्थान दिलाता है।

आवास योजना (एमपी आवास योजना) में भी प्रदेश की स्थिति ठीक-ठाक रही। यहां 3 लाख 68 हजार 395 आवास स्वीकृत हुए थे। इनमें से 1 लाख 52 हजार 309 बनकर तैयार हैं। यह करीब 41 फीसदी पूर्णता है और देश में 14वां स्थान है।

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बिजली और नेटवर्क का हाल

बिजली पहुंचाने के मामले में मध्य प्रदेश देश में 9वें स्थान पर है। यहां 59 हजार 822 परिवार स्वीकृत थे, जिनमें से 23 हजार 416 तक बिजली पहुंच चुकी है। यह करीब 39 फीसदी प्रगति है।

मोबाइल नेटवर्क के मामले में प्रदेश की स्थिति और बेहतर है। यहां 776 गांव लक्षित थे, जिनमें से 571 गांवों में नेटवर्क पहुंच चुका है। यह करीब 74 फीसदी कवरेज है और देश में 5वां स्थान है।

गैस कनेक्शन में अव्वल

गैस कनेक्शन बांटने के मामले में मध्य प्रदेश ने बाजी मार ली है। यहां दो लाख 709 कनेक्शन स्वीकृत हुए थे, जिनमें से 39 हजार 862 कनेक्शन बांटे जा चुके हैं। यह देश में सबसे ज्यादा कनेक्शन बांटने वाला राज्य बन गया है।

इसके उलट उत्तर प्रदेश इस योजना में सबसे फिसड्डी रहा। यहां चार लाख दो हजार 807 स्वीकृत कनेक्शनों में से मात्र 856 यानी 0.21 फीसदी ही बांटे जा सके। बिहार, आंध्र प्रदेश, झारखंड और असम भी इस मामले में पीछे रहे।

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दूसरे राज्यों की तस्वीर

नल जल योजना में केरल सबसे फिसड्डी रहा, जहां सिर्फ 1 फीसदी गांव कवर हुए। आवास योजना में पश्चिम बंगाल सबसे पीछे रहा। बिजली पहुंचाने में जम्मू-कश्मीर और झारखंड में प्रगति शून्य रही।

मोबाइल नेटवर्क में जम्मू-कश्मीर सबसे कमजोर रहा। ST हॉस्टल बनाने में राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और छत्तीसगढ़ भी शून्य प्रगति वाले राज्यों में शामिल हैं। संसद में पेश ये आंकड़े दिखाते हैं कि सिर्फ मध्य प्रदेश नहीं, बल्कि कई राज्य इस अभियान में पिछड़े हुए हैं।

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