पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह की याचिका- राम मंदिर के लिए दान संग्रह की आड़ में हुई सांप्रदायिक हिंसा

Sanjay Gupta | Nov 26, 2025, 12:47 IST
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पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। आरोप है कि राम मंदिर के निर्माण के नाम पर दान संग्रह के दौरान सांप्रदायिक हिंसा हुई। सिंह ने दान संग्रह के दौरान अल्पसंख्यकों पर दबाव डालने और हिंसा फैलाने का आरोप लगाया है।

INDORE. अयोध्या में श्रीराम मंदिर में मंगलवार (25 नवंबर) को ध्वजारोहण का कार्यक्रम हुआ। इसे श्रीराम मंदिर की पूर्णता का प्रतीक माना गया। वहीं राम मंदिर के निर्माण को लेकर इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने गंभीर आरोप लगाए हैं। इसमें गुरुवार (27 नवंबर) को सुनवाई होना है। सिंह खुद अपनी ओर से पैरवी करेंगे।



याचिका में इन सभी को बनाया गया पक्षकार

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यह गंभीर आरोप लगाए दान संग्रह में

सिंह ने याचिका में इंदौर, उज्जैन और मंदसौर में दिसंबर 2020 के दौरान हुई घटनाओं के उदाहरण दिए हैं। उन्होंने एफआईआर और अन्य प्रमाणों के साथ आरोप लगाए हैं। सिंह ने कहा है कि श्रीराम मंदिर के पवित्र निर्माण कार्य के दौरान दान संग्रह किया गया। इस दौरान कुछ संगठनों के जरिए इंदौर, उज्जैन व मंदसौर में इसकी आड़ में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुईं।



इससे शांति-सद्भाव खत्म हुआ और संपत्तियों का नुकसान हुआ। सिंह ने कहा कि हम राम मंदिर निर्माण के पवित्र कार्य का समर्थन करते हैं, लेकिन फंड कलेक्शन स्वैच्छिक होना चाहिए।



दान देने के लिए अल्पसंख्यक वर्ग पर दबाव नहीं डाला जाना चाहिए और न ही धमकाया जाना चाहिए। दान देने की आड़ में कुछ संगठनों ने अल्पसंख्यक वर्ग को टारगेट किया। धन संग्रह रैलियों के दौरान आयोजकों के जरिए सुनियोजित तरीके से हिंसा फैलाने का काम किया।



वहीं, इसके बाद भी अधिकारियों ने लापरवाही बरती और कोई कार्रवाई नहीं की। इस मामले में शासन को भी रिप्रेजेंटेशन दिया गया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इसलिए याचिका दायर की गई है।




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5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने दायर की याचिका: सिंह ने राम मंदिर के दान संग्रह के दौरान इंदौर, उज्जैन और मंदसौर में सांप्रदायिक हिंसा का आरोप लगाया और याचिका दायर की है।
  • दान संग्रह में हिंसा का आरोप: सिंह ने कहा कि श्रीराम मंदिर के निर्माण कार्य के दौरान दान संग्रह की आड़ में हिंसा हुई, जिससे शांति-सद्भाव खत्म हुआ और संपत्तियों का नुकसान हुआ।
  • अल्पसंख्यक वर्ग पर दबाव: याचिका में आरोप लगाया गया कि दान देने के लिए अल्पसंख्यक समुदाय पर दबाव डाला गया और धमकियां दी गईं।
  • माब लिंचिंग रोकने की मांग: सिंह ने माब लिंचिंग और माब वायलेंस रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के तीन फैसलों को लागू करने की मांग की है।
  • इंदौर का चंदनखेड़ी विवाद: सिंह ने इंदौर के चंदनखेड़ी विवाद का उदाहरण दिया, जहां अल्पसंख्यकों पर हमले हुए, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।


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पूर्व सीएम ने याचिका में माब लिंचिंग रोकने की मांग

पूर्व सीएम सिंह ने याचिका में सुप्रीम कोर्ट के तीन फैसलों का हवाला दिया है। उन्होंने इन फैसलों को एमपी में लागू करने की मांग की है। खासकर माब लिंचिंग और माब वायलेंस पर यह मांग की गई है। सिंह ने कहा कि धार्मिक रैलियों और जुलूसों के दौरान शांति बनाए रखने के लिए कदम उठाए जाएं। इसके लिए हर जिले में नोडल पुलिस अधिकारी और टास्क फोर्स होनी चाहिए। यह टास्क फोर्स इंटेलिजेंस की निगरानी करे और हेट स्पीच पर नजर रखे।



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इंदौर के इस विवाद का उदाहरण दिया

याचिका में सिंह ने इंदौर के चंदनखेड़ी विवाद का उदाहरण दिया है। उन्होंने कहा कि 29 दिसंबर 2020 को विवाद हुआ था। इस दौरान लोग पूर्व विधायक मनोज चौधरी के नेतृत्व में हथियारों के साथ निकले थे। तलवार, स्टिक और अन्य हथियारों का इस्तेमाल किया गया था। अल्पसंख्यकों पर हमले किए गए थे। हालांकि, पुलिस और प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।



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