भर्ती में देरी का खामियाजा दिव्यांग क्यों भुगतें? उम्र की सीमा से अवसर भी घटे! भर्ती-उम्र और पेंशन पर सवाल
भर्ती में देरी, और उम्र सीमा की दोहरी चुनौती?
मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी (MP government jobs) की तैयारी कर रहे दिव्यांग अभ्यर्थियों ने भर्ती नियमों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नियुक्तियां समय पर नहीं होने से कई उम्मीदवार अधिकतम आयु सीमा के करीब पहुंच जाते हैं। कुछ भर्ती नियमों में आरक्षित वर्ग और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम सीमा 45 वर्ष निर्धारित है। अभ्यर्थियों की मांग है कि दिव्यांगता के आधार पर अतिरिक्त छूट देने के नियमों की दोबारा समीक्षा हो।
34 हजार 558 पद आरक्षित, फिर 19,627 खाली क्यों?
सामने आए आरटीआई आधारित विवरण के अनुसार प्रदेश में दिव्यांगों के लिए चिह्नित 34 हजार 558 पदों में से 19 हजार 627 पद रिक्त बताए गए हैं। इसी विवरण में 48 विभागों में 2,610 नियुक्तियां होने और केवल 9,135 पदों के विज्ञापन जारी होने का दावा किया गया है। यदि ये आंकड़े वर्तमान स्थिति को दर्शाते हैं, तो सवाल उठता है कि शेष पदों पर भर्ती की प्रक्रिया कहां अटकी है?
स्कूल शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में बड़ा अंतर
प्राप्त आंकड़ों में स्कूल शिक्षा विभाग (Department of School Education) के 15 हजार 088 आरक्षित पदों में 6,709 रिक्त बताए गए हैं। जनजातीय कार्य विभाग में 4,858 में से 2,783 और स्वास्थ्य विभाग में 3,752 में से 3,488 पद खाली होने का दावा है। इन आंकड़ों से भर्ती की गति पर गंभीर सवाल बनते हैं। हालांकि इन्हें अक्टूबर 2026 की प्रमाणित रिक्तियां नहीं माना जा सकता।
केंद्र जैसी छूट क्यों मांग रहे अभ्यर्थी?
अभ्यर्थियों ने केंद्रीय भर्ती व्यवस्था का हवाला देते हुए सामान्य वर्ग के दिव्यांग उम्मीदवारों को 10 वर्ष, ओबीसी को 13 वर्ष और एससी-एसटी को 15 वर्ष की आयु छूट देने की मांग की है। यह व्यवस्था सभी केंद्रीय और राज्य भर्तियों में एक जैसी लागू नहीं होती। पात्रता संबंधित सेवा नियमों और भर्ती विज्ञापन पर निर्भर करती है। मूल सवाल है कि लंबे समय तक खाली रहने वाले पदों के कारण आयु सीमा पार कर चुके उम्मीदवारों के लिए कोई विशेष व्यवस्था होनी चाहिए या नहीं?
पेंशन 600 रुपए, सम्मानजनक जीवन कैसे चले?
मध्य प्रदेश की दिव्यांग पेंशन 600 रुपए प्रतिमाह बताई गई है। साथ ही 1,500 रुपए करने के चुनावी वादे का उल्लेख है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 24 सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का प्रावधान करती है। समान प्रकृति की योजनाओं के मुकाबले कम से कम 25 प्रतिशत अधिक सहायता का प्रावधान भी है। लेकिन इस धारा से हर दिव्यांग व्यक्ति के लिए स्वतः 1,562 रुपए की निश्चित पेंशन निर्धारित नहीं होती।
सरकार का पक्ष: पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव
सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह के के अनुसार दिव्यांग पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया हैं। उन्होंने वित्त विभाग से समन्वय के बाद निर्णय लेने तथा दिव्यांगों के लिए कार्यरत संस्थाओं का मानदेय बढ़ाने की बात कही है।
क्या समान अवसर प्रभावित हो रहे हैं?
संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 समानता तथा सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर से जुड़े हैं। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम की धारा 34 सरकारी प्रतिष्ठानों में निर्धारित श्रेणियों के लिए कम से कम चार प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करती है। लेकिन भर्ती में देरी या आयु सीमा का अंतर अपने आप कानून का उल्लंघन सिद्ध नहीं करता। इसके लिए संबंधित नियम, न्यायालय के आदेश और उनके अनुपालन की जांच आवश्यक है।
अब सरकार को किन सवालों का जवाब देना होगा?
प्रदेश में दिव्यांगों के लिए वास्तविक रिक्त पद कितने हैं? कितने उम्मीदवारों को नियुक्ति मिली? कितने पदों की भर्ती लंबित है? आयु सीमा में अतिरिक्त छूट देने पर सरकार की क्या स्थिति है? पेंशन वृद्धि का प्रस्ताव किस चरण में है? दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है। जब नौकरी का पद खाली है, तो पात्र उम्मीदवार उम्र की सीमा पार करने के कारण अवसर से वंचित क्यों हो?