एक ईवीएम की कथित गड़बड़ी से नहीं पलटता चुनाव का नतीजा: हाईकोर्ट

Neel Tiwari | Jan 07, 2026, 23:00 IST
BJP MP Bharti Pardhi
भाजपा सांसद भारती पारधी के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि एक ईवीएम मशीन की गड़बड़ी से चुनाव परिणाम पर असर नहीं पड़ा।

JABALPUR. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बालाघाट लोकसभा सीट से भाजपा सांसद भारती पारधी के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि एक ईवीएम मशीन की तकनीकी गड़बड़ी के आधार पर चुनाव परिणाम अवैध नहीं ठहराया जा सकता। जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की बेंच ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देने के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी होते हैं। याचिकाकर्ता यह साक्ष्य पेश करने में असफल रहा।



वोटों की संख्या और बैटरी चार्ज पर सवाल

चुनाव याचिका कंकर मुंजारे की ओर से दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि बालाघाट संसदीय क्षेत्र के मतदान केंद्र क्रमांक 88, शासकीय माध्यमिक शाला, जयामा में 372 वोट डाले गए थे। लेकिन, मतगणना के दौरान ईवीएम के टोटल बटन दबाने पर 428 वोट दिखे।



इसके साथ ही याचिका में यह भी दावा किया गया कि स्ट्रांग रूम से बाहर निकली ईवीएम मशीन लगभग 99 प्रतिशत चार्ज थी। करीब 22 दिनों तक स्ट्रांग रूम में रखी गई मशीन का इतनी अधिक चार्ज होना संदेहास्पद है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर ईवीएम में छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए निर्वाचन को शून्य घोषित करने की मांग की गई थी।



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अनुमान नहीं, प्रमाण चाहिए - HC

कोर्ट ने कहा कि चुनाव याचिकाओं में केवल आशंका या तकनीकी अनुमान से निष्कर्ष नहीं निकाले जा सकते। एक बूथ की एक मशीन में अंतर से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पूरे क्षेत्र का परिणाम प्रभावित हुआ। याचिकाकर्ता ने ईवीएम से छेड़छाड़ के ठोस प्रमाण नहीं दिए। यह भी नहीं दिखाया गया कि गड़बड़ी से चुनाव परिणाम पर असर पड़ा।



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भाजपा सांसद ने रखा कानूनी पक्ष

सुनवाई के दौरान भाजपा सांसद भारती पारधी की ओर से अधिवक्ताओं ने याचिका का जोरदार विरोध किया। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों को चुनौती देने के लिए कानूनी मानक कठोर होते हैं। बिना ठोस साक्ष्य के केवल ईवीएम की बैटरी या वोट काउंट पर सवाल चुनाव को निरस्त करने का आधार नहीं बन सकते।



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विश्वसनीयता पर अदालत का भरोसा

हाईकोर्ट के इस फैसले के साथ ही बालाघाट से भाजपा सांसद भारती पारधी का निर्वाचन पूरी तरह सुरक्षित हो गया है। अदालत के आदेश को लोकतांत्रिक प्रक्रिया की स्थिरता और चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। इस आदेश से यह संदेश गया है कि चुनाव परिणामों को पलटने के लिए मजबूत और निर्विवाद सबूत जरूरी हैं। केवल संदेह पर्याप्त नहीं है।



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