मदन महल थाना पर फर्जी NDPS केस के आरोप, सुप्रीम कोर्ट ने खुशी कौर को दी जमानत

Neel Tiwari | Mar 13, 2026, 21:45 IST
ndps case madan mahal
जबलपुर के मदन महल थाना से जुड़े NDPS मामले में बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है। पहले जहां हाईकोर्ट ने जमानत खारिज कर दी थी, वहीं अब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पलटते हुए आरोपी खुशी कौर को राहत दे दी है।

News in Short

  • फर्जी NDPS केस के आरोप और आरोपी को SC ने दी जमानत।
  • जबलपुर हाईकोर्ट के जमानत खारिज करने के आदेश को बताया त्रुटिपूर्ण।
  • होटल मालिक के बयान को जमानत खारिज करने का आधार मानने पर सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति।
  • पहले हाईकोर्ट में पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच पर उठे थे गंभीर सवाल।
  • जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने दिया फैसला।

News in detail

जबलपुर पुलिस के मदन महल थाने पर फर्जी NDPS केस बनाने के आरोप लगे थे। इस मामले में हाईकोर्ट ने IG को जांच तो सौंपी थी। लेकिन आरोपी को जमानत नहीं दी थी। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी खुशी कौर को जमानत दे दी है। जस्टिस M.M. Sundresh और जस्टिस N. Kotiswar Singh की पीठ ने यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने जबलपुर हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज करने के आदेश को त्रुटिपूर्ण मानते हुए उसे रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया था।





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क्या था पूरा मामला

यह मामला खुशी कौर बनाम मध्य प्रदेश राज्य से जुड़ा है। मदन महल पुलिस स्टेशन, जबलपुर में FIR क्रमांक 10/2026 दर्ज कर खुशी कौर को NDPS अधिनियम की धारा 8/20 के तहत गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि उनके पास से गांजा बरामद हुआ है। बचाव पक्ष ने अदालत में आरोप लगाया कि ट्रेन यात्रा के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। विरोध करने पर उन्हें जबरन थाने ले जाकर फर्जी NDPS केस में फंसा दिया।



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पुलिस पर लगे आरोप

खुशी कौर के अधिवक्ता ने कोर्ट में दावा किया। CCTV फुटेज से यह स्पष्ट होता है कि दो महिला पुलिस अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तारी से पहले ही हिरासत में लिया। इसके अलावा, मोबाइल फोन और निजी सामान गायब करने का आरोप भी लगाया गया। इन आरोपों के कारण पहले हाईकोर्ट में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे।



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HC की कार्यवाही में उठे थे गंभीर सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले में भी कई विसंगतियां सामने आई थीं। कोर्ट ने पुलिस की जांच और प्रस्तुत साक्ष्यों को लेकर सवाल उठाते हुए जबलपुर रेंज के IG को जांच के निर्देश दिए थे। हालांकि बाद में प्रस्तुत रिपोर्ट पर भी अदालत ने असंतोष जताया और उसमें कई महत्वपूर्ण तथ्यों की कमी बताई। रिपोर्ट को एक वर्ष तक सीलबंद रखने के निर्देश भी दिए गए थे। लेकिन इसके बाद भी खुशी कौर को जमानत नहीं दी थी।



जमानत खारिज करने पर आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते समय रायपुर के एक होटल मालिक के बयान को मुख्य आधार बनाया था। होटल मालिक ने कहा था कि आवेदिका एक युवक के साथ गलत पहचान बताकर होटल में रुकी थीं। कोर्ट ने इस आधार को अप्रासंगिक बताते हुए कहा कि ऐसे बयान के आधार पर जमानत से इनकार करना उचित नहीं था।



इन कारणों से सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने कई तथ्यों को ध्यान में रखते हुए खुशी कौर को जमानत देने का निर्णय लिया। अदालत ने कहा कि जब्त की गई नशीली सामग्री की मात्रा मध्यवर्ती श्रेणी (Intermediate Quantity) में आती है। इसके अलावा आवेदिका एक महिला हैं, उनके खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है और उनका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है। इन परिस्थितियों में अदालत ने जमानत देना उचित माना।



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ट्रायल कोर्ट तय करेगी जमानत की शर्तें

सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि जमानत की शर्तें संबंधित ट्रायल कोर्ट द्वारा तय की जाएंगी। इस फैसले के साथ ही खुशी कौर को बड़ी राहत मिल गई है। मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल और जांच से जुड़े विवाद अब भी चर्चा में हैं।



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