चीता गामिनी ने चार शावकों को दिया जन्म, केंद्रीय मंत्री बोले- कूनो की सफलता राष्ट्र के लिए गर्व का पल
News in Short
- चीता गामिनी ने कूनो नेशनल पार्क में चार शावकों को जन्म दिया।
- यह भारतीय चीता संरक्षण परियोजना की बड़ी सफलता है।
- केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया।
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कूनो पार्क को चीतों के पुनरुद्धार का केंद्र बताया।
- भारत में अब कुल 57 चीते हैं, जिसमें शावक भी शामिल हैं।
News in Detail
श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इस बार मादा चीता गामिनी ने चार शावकों को जन्म दिया, जिससे चीतों के कुनबे में एक अहम जुड़ाव हुआ।
यह घटना भारतीय चीता संरक्षण परियोजना की बड़ी सफलता है। 2022 में शुरू हुई चीता पुनर्वास परियोजना के बाद यह पहला मौका है जब मादा चीता ने खुले जंगल में शावकों को जन्म दिया। गामिनी की उम्र 25 महीने है और यह भारतीय मूल की मादा चीता है।
केंद्रीय मंत्री का बयान
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस महत्वपूर्ण पल को ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने इसे भारतीय चीता संरक्षण यात्रा की बड़ी उपलब्धि कहा। मंत्री ने कहा कि यह सफलता चीतों के प्राकृतिक परिस्थितियों में जीवित रहने और प्रजनन के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
क्या बोले सीएम मोहन यादव
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस सफलता का जश्न मनाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मध्यप्रदेश अब चीतों के पुनरुद्धार का मुख्य केंद्र बन रहा है। उन्होंने गामिनी के शावकों को लेकर खुशी जताई और इसे प्रमाणित किया कि कूनो नेशनल पार्क चीतों के लिए उपयुक्त स्थल है।
गामिनी का जंगल में पहला जन्म
गामिनी पिछले एक साल से कूनो नेशनल पार्क में जंगल में रह रही थी। उसकी उपस्थिति ने साबित किया कि वह जंगल की परिस्थितियों में पूरी तरह ढल चुकी है। गामिनी ने शिकार किया और विचरण भी किया। अब उसने चार शावकों को जन्म दिया, जो कूनो पार्क के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
भारत में चीतों की कुल संख्या
अब, गामिनी के चार शावकों के साथ, भारत में चीतों की संख्या 57 हो गई है। इसमें हाल ही में बोत्सवाना से लाए गए 9 चीतों का भी समावेश है, जो कूनो नेशनल पार्क में रह रहे हैं। 3 चीते गांधी सागर अभ्यारण्य में रह रहे हैं। यह एक और प्रमाण है कि कूनो पार्क और भारत की भूमि चीतों के लिए उपयुक्त और सुरक्षित है।
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