पूर्व जज गिरीबाला सिंह जमानत बचाने बोलीं- ट्विशा अम्मा बोलती थी, मदर्स डे पर दिया था लेटर

Sanjay Gupta | May 28, 2026, 13:44 IST
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भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा केस में पूर्व जज गिरीबाला सिंह की अग्रिम जमानत हाईकोर्ट ने रद्द कर दी। कोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जांच में सहयोग नहीं करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को गंभीर माना है। अब सीबीआई कभी भी गिरफ्तारी कर सकती है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • ट्विशा शर्मा केस में पूर्व जज गिरीबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द हो गई है।
  • हाईकोर्ट मध्यप्रदेश ने जिला कोर्ट के आदेश में कई खामियां पाईं है।
  • सीबीआई अब पूर्व जज को किसी भी समय गिरफ्तार कर सकती है।
  • गिरीबाला सिंह ने बचाव में ट्विशा के पुराने लेटर और फोटो पेश किए हैं।
  • कोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सहयोग नहीं करने को गंभीर माना है।

जबलपुर हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद बुधवार रात फैसला जारी करते हुए पूर्व जज गिरीबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी। जिला कोर्ट के आदेश में कई खामियां पाई गईं। इसके बाद शासन का पक्ष सुनने के बाद जमानत रद्द कर दी गई। अब सीबीआई उन्हें किसी भी वक्त गिरफ्तार कर सकती है।



वहीं, इस जमानत को बचाने के लिए पूर्व जज ने हर तरह के दांव चले। खासकर इसमें ट्विशा शर्मा के पुराने लेटर और फोटो का उपयोग कर सेंटीमेंटल कार्ड खेला गया। हालांकि यह दांव चला नहीं।



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मुझे तो अम्मा बोलती थी ट्विशा - गिरीबाला

गिरीबाला सिंह ने 80 से ज्यादा पन्नों में अपना जवाब हाईकोर्ट जबलपुर में पेश किया। इसमें उन्होंने ट्विशा के साथ मदर्स डे की फोटो और उनके लेटर का भी उपयोग किया। इसमें गिरीबाला सिंह ने कहा कि ट्विशा तो मुझे अम्मा कहती थी और मुझे बहुत प्यार करती थी। मदर्स डे (10 मई) पर उसने मुझे भावुक पत्र भी दिया था। ऐसे में मैं उसकी मौत के लिए जिम्मेदार कैसे हो सकती हूं?



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लेटर में यह लिखा हुआ है

गिरीबाला सिंह द्वारा हाईकोर्ट में लगाए गए ट्विशा के लेटर में पांच लाइनें लिखी हैं और साथ ही फोटो भी लगाई गई है। इसमें गिरीबाला और ट्विशा साथ में खड़े हैं। गिरीबाला के हाथ में वह पत्र है, जो मदर्स डे पर दिया गया था।



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जमानत रद्द करने के लिए हाईकोर्ट ने यह कहा

वहीं, हाईकोर्ट ने जमानत रद्द करने के विस्तृत आधार आदेश में दिए हैं। इसमें कहा गया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शव पर कई तरह की चोटों का जिक्र है। ट्रायल कोर्ट को इस पर गंभीर विचार करना चाहिए था।



वहीं, ट्विशा शर्मा के परिजनों की ओर से तर्क दिए गए थे कि मृतका पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। शासन ने कहा कि पूर्व जज जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को भी खारिज नहीं किया जा सकता। मामला अब सीबीआई जांच में आ चुका है।



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