25 हजार रोजगार सहायकों के नियमितीकरण पर सरकार की चुप्पी, हाईकोर्ट की सख्ती
News in short
- नियमितीकरण को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार को आखिरी मौका दिया।
- चार सप्ताह में जवाब नहीं देने पर सख्त फैसले के संकेत।
- अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2026 को तय की गई है।
- याचिका अभिषेक पटेरिया ने दायर की, अधिवक्ता गोपेश तिवारी ने रखा पक्ष।
- पहले ही ट्रांसफर और नई गाइडलाइन पर कोर्ट रोक लगा चुका है।
News in Detail
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में रोजगार सहायकों के नियमितीकरण को लेकर दायर याचिका में अब सुनवाई तेज हो गई है। इस मामले में अभिषेक पटेरिया द्वारा दायर याचिका पर कोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है।
कोर्ट ने पाया कि पहले नोटिस के बावजूद सरकार जवाब देने से बच रही है। सरकार मामले को लंबित रखने की कोशिश कर रही है। इसे गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने सरकार को अंतिम अवसर दिया है।
चार हफ्ते की आखिरी मोहलत
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गोपेश तिवारी ने कोर्ट को अहम जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मनरेगा के अंतर्गत कार्य कर रहे रोजगार सहायकों का वर्षों से नियमितीकरण नहीं किया जा रहा है।ये कर्मचारी लंबे समय से पंचायत व्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की और सरकार को आखिरी मौका दिया। सरकार को पंचायत ग्रामीण विकास विभाग को चार सप्ताह में जवाब देने का आदेश दिया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि तय समय में जवाब नहीं मिलने पर एकतरफा कार्रवाई हो सकती है।
29 अप्रैल की सुनवाई होगी निर्णायक
कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2026 को तय की है। यह तारीख रोजगार सहायकों के भविष्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि सरकार जवाब नहीं देती, तो कोर्ट रोजगार सहायकों के पक्ष में बड़ा फैसला सुन सकता है। इसमें नियमितीकरण को लेकर स्पष्ट आदेश भी हो सकते हैं।
पहले मिल चुकी है बड़ी राहत
गौरतलब है कि इससे पहले भी जबलपुर हाईकोर्ट रोजगार सहायकों को बड़ी राहत दे चुका है। जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने ग्राम रोजगार सहायक मार्गदर्शिका 2025 के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी।
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि अगली सुनवाई तक किसी भी रोजगार सहायक का ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। यह आदेश प्रदेश के सभी लगभग 25 हजार रोजगार सहायकों पर लागू हुआ था।
क्यों अहम है यह पूरा मामला
दरअसल, रोजगार सहायकों की नियुक्ति मनरेगा योजना के तहत ग्राम स्तर पर की गई थी। अधिकतर कर्मचारी अपने ही गांवों में वर्षों से कार्यरत हैं और पंचायतों के डिजिटल व प्रशासनिक कामकाज को संभाल रहे हैं।
नई गाइडलाइन में ट्रांसफर और टर्मिनेशन के साथ नियमितीकरण का मुद्दा भी जुड़ गया है। इससे यह मामला और संवेदनशील हो गया है।
अब सभी की नजर कोर्ट पर
फिलहाल रोजगार सहायकों को कोर्ट से अंतरिम राहत मिल चुकी है, लेकिन स्थायी समाधान अब भी बाकी है। प्रदेश के लगभग 25 हजार रोजगार सहायकों की नजर 29 अप्रैल की सुनवाई पर है। इस सुनवाई में यह तय हो सकता है कि उन्हें स्थायी नियुक्ति मिलेगी या नहीं।
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