जिन छात्रों को व्यापमं घोटाला में बर्खास्त किया, उन्हें ही चुपचाप बांट दी डिग्री
समझें क्या है पूरा मामला...
ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज में एक बड़ा डिग्री घोटाला सामने आया है। व्यापमं कांड में जिन छात्रों को 2017 में बर्खास्त किया गया था। उन्हें चुपचाप एमबीबीएस (MBBS) की डिग्रियां बांट दी गईं। मामले में अब लोकायुक्त ने जांच शुरू कर दी है।
कैसे हुआ था बर्खास्तगी का फैसला?
साल 2006 से 2010 के बीच करीब 150 छात्रों पर एफआईआर दर्ज हुई थी। इनमें से 30 से 35 एमबीबीएस छात्रों को संदिग्ध मानकर जांच के घेरे में रखा गया था। 2017 में जांच के लिए एक विशेष न्यू हाई पावर एक्शन कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी के चेयरमैन डॉ. एस.एन. आयंगर थे, जिनका अब निधन हो चुका है।
कमेटी ने जांच के बाद 30 से अधिक संदिग्ध छात्रों को बर्खास्त कर दिया था। यह मामला अभी सीबीआई (CBI) कोर्ट में लंबित है।
ऑडियो में 16 लाख में डिग्री देने की बात
इस पूरे घोटाले का भंडाफोड़ एक वायरल ऑडियो से हुआ है। मेडिकल कॉलेज की छात्र शाखा (UG- Undergraduate) के तत्कालीन प्रभारी बाबू प्रशांत चतुर्वेदी की आवाज इस ऑडियो में सुनाई दी। इसमें वे यह मानते हुए सुनाई दिए कि उन्होंने कुछ छात्रों के पेंडिंग केस निपटाए हैं। आरोप है कि यह काम 16 लाख रुपए लेकर किया गया है।
इसके बाद एक और नया ऑडियो सामने आया है। इसमें वही बाबू पूर्व छात्र संदीप लहारिया से गिड़गिड़ाते और माफी मांगते हुए सुनाई देता है। वह बार-बार पूछता है कि मुझसे गलती कहां हो गई, आप मुझ पर इतना नाराज क्यों हैं।
बाबू बोला, संदीप को जानता ही नहीं
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब बाबू प्रशांत चतुर्वेदी से नए ऑडियो पर सवाल किया तो उन्होंने साफ कहा कि संदीप कौन है, मैं उसे जानता तक नहीं। वहीं, यह बयान खुद एक बड़े सवाल को जन्म देता है।
पूर्व छात्र संदीप लहारिया ने ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड लोकायुक्त को सौंपा है। इस रिकॉर्ड के मुताबिक बाबू प्रशांत ने 2023 और 2024 में संदीप को ऑनलाइन रुपए ट्रांसफर किए थे। जब संदीप को जानता ही नहीं तो पैसे क्यों भेजे? यह सवाल जांच की जड़ में है।
बाबू हटाया, सहायक बचा रहा
ऑडियो वायरल होने के बाद गजराराजा मेडिकल कॉलेज ने छात्र शाखा के प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी को पद से हटा दिया है। वहीं, इस मामले में उनके सहायक पंकज कुशवाह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह असंतुलित रवैया खुद अपने आप में सवाल खड़े करता है।
जीवाजी यूनिवर्सिटी ने भी अब तक इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
लोकायुक्त की जांच में घेरे में आए बड़े नाम
लोकायुक्त भोपाल और ग्वालियर ने इस फर्जीवाड़े की जांच शुरू कर दी है। कॉलेज और यूनिवर्सिटी से दस्तावेज मांगे गए हैं। डीन, रजिस्ट्रार समेत कई अधिकारी अब इस जांच के घेरे में आ गए हैं।
लोकायुक्त एसपी निरंजन शर्मा ने कहा कि संदीप लहारिया ने बर्खास्त छात्रों को बिना परीक्षा अवैध तरीके से डिग्री बांटे जाने की शिकायत की है। शिकायत का सत्यापन किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज से लेकर जीवाजी यूनिवर्सिटी तक के बाबू व अफसरों की भूमिका की जांच हो रही है।
अभी भी अनुत्तरित हैं ये सवाल
जिन छात्रों को डिग्री दी गई, उन्होंने परीक्षा कब और कहां दी? उन परीक्षार्थियों की लोकेशन क्यों नहीं निकाली गई? उस समय के सीसीटीवी (CCTV- Closed Circuit Television) कैमरों की फुटेज क्यों नहीं खंगाली गई? ये तीन सवाल इस पूरे घोटाले की नींव हैं और जांच में इन्हीं का जवाब ढूंढा जा रहा है।
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