अधिसूचना में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, कहा, सरकार की सुस्ती से जनता और ट्रांसपोर्टर्स परेशान
समझें क्या है पूरा मामला....
- अधिसूचना में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को फटकार।
- ट्रांसपोर्टर्स को नहीं मिल रहे परमिट, कोर्ट ने जताई नाराजगी।
- स्कूल बसों के परमिट खत्म, बच्चों की परेशानी बढ़ी।
- ग्वालियर खंडपीठ ने सरकार की सुस्ती पर उठाए सवाल।
- अगली सुनवाई 23 जुलाई, तब तक राहत रहेगी लागू।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। यह फटकार परिवहन अधिसूचना जारी करने में देरी को लेकर है। कोर्ट ने कहा कि इससे ट्रांसपोर्टर्स को परमिट नहीं मिल पा रहे। स्कूल बसों के अस्थायी परमिट भी खत्म हो रहे हैं। अगली सुनवाई 23 जुलाई को तय की गई है।
यह मामला सीधे तौर पर आम जनता, ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और स्कूली बच्चों से जुड़ा है। कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब सरकार पर जल्द अधिसूचना जारी करने का दबाव बढ़ गया है।
हाईकोर्ट ने क्यों जताई नाराजगी
जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डबल बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। बेंच ने कहा कि सरकार खुद मान चुकी है कि मौजूदा अधिसूचना में कमियां हैं। सरकार का कहना है कि नई अधिसूचना तैयार की जा रही है। लेकिन लंबा समय बीतने के बावजूद यह अभी तक जारी नहीं हुई है। कोर्ट ने इसे लोगों के लिए अनावश्यक परेशानी का कारण बताया।
बार-बार समय मांग रही है सरकार
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने एक बार फिर नई अधिसूचना तैयार करने की प्रक्रिया गिनाई। उन्होंने कोर्ट से अतिरिक्त समय मांगा। जबकि अदालत इस मामले में अंतिम सुनवाई के लिए पूरी तरह तैयार थी।
परमिट न मिलने का सीधा असर
कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार के बार-बार समय मांगने से ट्रांसपोर्टर्स ( Transporters ) को परमिट जारी नहीं हो पा रहे। इसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ रहा है। ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोग इस देरी से पहले से ही परेशान हैं।
स्कूल बसों का मुद्दा भी पहुंचा कोर्ट
इस सुनवाई में सेपिएंट इंटरनेशनल एकेडमी की ओर से भी एक हस्तक्षेप आवेदन दायर किया गया। इसमें बताया गया कि स्थगन आदेश की वजह से स्कूल बसों के अस्थायी परमिट खत्म हो चुके हैं। कुछ परमिट जल्द ही समाप्त होने वाले हैं। इससे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को गंभीर परेशानी हो सकती है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एमपीएस (MPS – वरिष्ठ अधिवक्ता का नाम संक्षेप) रघुवंशी ने कोर्ट में दलील दी। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार अधिसूचना जारी करने में देरी कर रही है। यह देरी अब गंभीर समस्या बन चुकी है।
अगली सुनवाई 23 जुलाई को
कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई तय की है। तब तक 16 जून 2026 को पारित अंतरिम राहत का आदेश प्रभावी रहेगा। इसका मतलब है कि फिलहाल पुरानी व्यवस्था के तहत ही राहत जारी रहेगी। अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि सरकार अगली सुनवाई से पहले नई अधिसूचना जारी करती है या नहीं।
FAQ
- हाईकोर्ट ने सरकार को किस बात पर फटकार लगाई?
हाईकोर्ट ने परिवहन अधिसूचना जारी करने में हो रही देरी पर सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि इससे ट्रांसपोर्टर्स को परमिट नहीं मिल रहे। इसका असर आम जनता पर भी पड़ रहा है। - स्कूल बसों से जुड़ा मुद्दा क्या है?
स्थगन आदेश के कारण स्कूल बसों के अस्थायी परमिट खत्म हो चुके हैं या जल्द खत्म होने वाले हैं। इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों को परेशानी हो सकती है। यह मुद्दा सेपिएंट इंटरनेशनल एकेडमी ने कोर्ट में उठाया। - अब इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को तय की गई है। तब तक 16 जून 2026 का अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा। सरकार को इस दौरान नई अधिसूचना जारी करने की उम्मीद है।
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