आउट सोर्सिंग के साइड इफेक्ट : स्वास्थ्य विभाग के सपोर्टिंग स्टाफ से हकमारी, समान काम के बदले मिल रहा कम वेतन
Sanjay Sharma | Aug 12, 2024, 14:15 IST
आउट सोर्सिंग
स्वास्थ्य विभाग भी कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में सरकार द्वारा आउटसोर्स कंपनियों के जरिए कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। इन आउटसोर्स कर्मियों को सपोर्टिंग स्टाफ कहा जाता है।
- समान काम के बदले जिलों में वेतन भुगतान में हो रही मनमानी कटौती
- आउटसोर्स स्टाफ को न वीकली ऑफ मिल रहा न बीमार होने पर छुट्टी
- पीएफ जमा न कराने के मामले में कंपनियों की सीबीआई जांच की मांग
कई जिलों में तो एक से ज्यादा कंपनियों के कर्मचारियों के वेतन में भी समानता नहीं है। जबकि कुशल और अकुशल कर्मचारियों के लिए वेतन का कलेक्टर रेट तय है। इन कर्मचारियों से तय घंटों से कहीं ज्यादा काम कराया जा रहा है। उन्हें साप्ताहिक अवकाश और बीमार होने पर भी छुट्टी नहीं दी जा रही। ऐसे कर्मचारी आउटसोर्स कंपनियों की मनमानी की शिकायत लगातार कर रहे हैं, लेकिन विभाग भी उन्हें न्याय नहीं दिला रहा। वहीं अब तक सरकार ने भी स्वास्थ्य विभाग के सपोर्टिंग स्टाफ की सुध नहीं ली है।
चिकित्सा तंत्र के सपोर्टिंग स्टाफ को ही नहीं सपोर्ट
इन आउटसोर्स कर्मियों को सपोर्टिंग स्टाफ कहा जाता है। ये कर्मचारी वार्ड बॉय से लेकर तकनीकी काम- काज में भी स्वास्थ्यकर्मियों का सहारा बनते हैं। लेकिन सपोर्टिंग स्टाफ को न तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का सपोर्ट मिल रहा है और न सरकार का। यानी नियमित कर्मचारियों की कमी को पूरा करने वाले इन आउटसोर्स कर्मियों को उनसे चौथाई वेतन भी नहीं मिल रहा। इसकी कई बार शिकायत भी हो चुकी है।
बंधुआ मजदूरों की तरह काम करा रही कंपनियां
वहीं जमीनी हकीकत ये है कि आउटसोर्स कर्मियों को कलेक्टर रेट से चार से छह हजार रुपया तक कम वेतन मिलता है। वहीं उन्हें सप्ताह के सातों दिन ड्यूटी पर पहुंचने होता है और बीमार होने पर छुट्टी लेने की स्थिति में वेतन में कटौती भी की जाती है। यह स्थिति बंधुआ मजदूरों जैसी है, जिनके विरोध करने पर काम से निकाल दिया जाता है।
शोषण का शिकार 10 हजार आउटसोर्सकर्मी
इन आउटसोर्स कंपनियों का वेतन कलेक्टर रेट के आधार पर निर्धारित है। साल 2023 में श्रम विभाग के आदेश पर अकुशल कर्मियों के लिए 9125 रुपए, अर्द्धकुशल कर्मियों को 9982 रुपए, कुशल कर्मियों को 11360 और प्रशिक्षित या उच्च कुशल आउटसोर्स कर्मियों के लिए 12660 रुपए मासिक वेतन देना तय किया गया था। लेकिन कलेक्टर रेट के मुताबिक आउटसोर्स कंपनियां न तो मासिक वेतन दे रहीं न ही दूसरी जरूरी सुविधाएं।
वहीं हाल ही श्रम विभाग ने न्यूनतम वेतन की दर में भी इजाफा किया है। इसके चलते अब अकुशल श्रेणी के आउटसोर्स कर्मियों को कलेक्टर रेट 371 दैनिक के अनुसार महीने में 9650 रुपए, अर्द्धकुशल श्रेणी के लिए 404 दैनिक के आधार पर 10507 रुपए प्रतिमाह, कुशल श्रेणी के लिए 457 दैनिक के अनुसार 11885 रुपए और उच्च कुशल श्रेणी के कर्मियों को 507 प्रतिदिन की दर से महीने में 13185 रुपए वेतन देना होगा। लेकिन जब विभाग पहले ही कलेक्टर रेट से वेतन नहीं दिला पाईं तो नई दर से वेतन कैसे दिलाएगा इसको लेकर कर्मचारियों में असमंजस है।
पीएफ- वेतन में कटौती की सीबीआई जांच की मांग
स्वास्थ्य विभाग में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मियों को वेतन भुगतान और पीएफ कटौती की जानकारी भी जिला से लेकर प्रदेश स्तर तक छिपाई जा रही है। इसके चलते आउटसोर्स- संविदाकर्मी संघ इस गड़बड़झाले पर पर्दा डालने में कंपनियों से विभाग के अफसरों की मिलीभगत होने का आरोप लगाकर सीएम से सीबीआई जांच की मांग कर चुका है।
प्रदेश में आउटसोर्स सपोर्टिंग स्टाफ के वेतन में विसंगति
- शिवपुरी 8287 रुपए
- दमोह 7100 से 5500 रुपए
- सीधी 5500 रुपए
- भोपाल 11164 रुपए
- अनूपपुर 11164 रुपए
- शहडोल 7300 रुपए
- मंडला 10682 रुपए
- बालाघाट 7125 रुपए
- सतना 6000 रुपए
- आगर मालवा 5500 रुपए
- छतरपुर 5500 रुपए
- सागर 5500 रुपए
- गुना 9557 रुपए
- कटनी 6000 रुपए
- ग्वालियर 7500 से 11164
- उमरिया 9320 से 11165
- पन्ना 6200 रुपए
- भिंड 5500 रुपए
- खंडवा 7707 रुपए
- जबलपुर 8000 रुपए
- डिंडोरी 5500 रुपए
- छिंदवाड़ा 9200 रुपए
- हरदा 8000 रुपए
- खरगोन 7000 रुपए
- सिवनी 5500 रुपए
- दतिया 6800 रुपए
- राजगढ़ 8682 रुपए
- उज्जैन 5500 रुपए
- नीमच 8000 रुपए
- बड़वानी 8150 रुपए
- टीकमगढ़ 8000 रुपए
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