27% से ज्यादा आरक्षण की मांग पर हाईकोर्ट में बहस, EWS के वर्टिकल आरक्षण होने पर सफाई
जबलपुर हाईकोर्ट में चल रही ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई आज दोपहर 12:00 बजे से शुरू हुई थी, जो लगभग 2 घंटे चली। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच में पहले आरक्षण के विरोध में पक्ष रखे गए।
इसके बाद 27 प्रतिशत से अधिक आरक्षण की मांग को लेकर बहस हुई। इस दौरान कल ईडब्ल्यूएस आरक्षण के हॉरिजॉन्टल होने की टिप्पणी पर आज कोर्ट में यह जानकारी स्पष्ट कर दी गई कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण हॉरिजॉन्टल नहीं वर्टिकल ही है।
सामान्य वर्ग की ओर से खत्म हुई अंतिम बहस
इस मामले में आज ओबीसी के 27% आरक्षण के विरोध में सामान्य वर्ग की ओर से पूरा पक्ष रख दिया गया है। आज कोर्ट को मराठा आरक्षण सहित इंदिरा साहनी और सुप्रीम कोर्ट के अन्य निर्देशों का हवाला दिया गया।
कोर्ट को बताया गया कि मराठा आरक्षण के मामले में भी 85% जनसंख्या को हाईकोर्ट ने एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी सिचुएशन माना था। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इसे असामान्य स्थिति या एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी सिचुएशन मानने से साफ इनकार कर दिया था, क्योंकि गायकवाड़ कमीशन के अनुसार दिए गए डेटा से पिछड़ापन तो साबित होता था लेकिन कम प्रतिनिधित्व नहीं।
ओबीसी वर्ग को बैकवर्डनेस साबित करने की आवश्यकता नहीं
बहस के दौरान कोर्ट के द्वारा यह बताया गया कि मराठा आरक्षण मामले में आरक्षण में एक नई जाति जोड़ी जानी थी। जबकि मध्य प्रदेश में ओबीसी को पहले से ही आरक्षण मिला हुआ है। साथ ही, वह बैकवर्ड क्लास मानी जाती है।
कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि क्वांटिफिएबल डेटा के अनुसार जो 50 प्रतिशत आरक्षण की लिमिट क्रॉस होने पर बहस हो रही है। इसमें ओबीसी वर्ग को बैकवर्डनेस सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि सहित साहनी मामले में 50% सीमा पार करने के लिए दिए गए अन्य निर्देश लागू होने पर बहस हो सकती है।
ST और SC को आबादी के अनुपात पर आरक्षण तो ओबीसी को क्यों नहीं
हाईकोर्ट में हो रही सुनवाई में एक याचिका ऐसी भी शामिल है जिसमें आरक्षण को सही तो बताया गया है लेकिन आरक्षण के प्रतिशत को कम बताते हुए अधिक आरक्षण की मांग की गई है।
कोर्ट को बताया गया कि आरक्षण लागू करने के दौरान अध्यादेश में जो जानकारी दी गई है उसके अनुसार ST और SC वर्ग को मध्य प्रदेश में उनकी आबादी के अनुरूप 20% और 16% आरक्षण दिया गया है।
वहीं ओबीसी की आबादी 50% से अधिक बताते हुए उन्हें 27% आरक्षण देने का संशोधन हुआ। कोर्ट में अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह ने यह कहा कि OBC की आबादी मध्य प्रदेश में अधिक है और उसके अनुपात में उन्हें आरक्षण नहीं दिया गया।
मंगलवार को होगी सुनवाई, अब राज्य सरकार रखेगी पक्ष
अब इस मामले की सुनवाई मंगलवार 28 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे होगी। अगली सुनवाई में आरक्षण का प्रतिशत और बढ़ाने के लिए पक्ष रखने के बाद राज्य सरकार अपना पक्ष रखेगी। इसमें एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराजन खुद कोर्ट में मौजूद रहेंगे।
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