BRTS पर एलिवेटेड कॉरिडोर पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब, रैलिंग हटाने के लिए 40 दिन का समय
INDORE. बीआरटीएस (BRTS ) पर रैलिंग हटाने को लेकर एक बार फिर हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ में बुधवार 11 मार्च को सुनवाई हुई। इसमें कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त आईएएस क्षितिज सिंघल के साथ ही अन्य अधिकारी उपस्थित हुए। इसमें अतुल सेठ द्वारा एलिवेडेट कॉरिडोर को लेकर लगाई गई याचिका पर भी सुनवाई हुई।
कॉरिडोर को लेकर मांगा जवाब
सेठ की ओर से लगाई गई याचिका पर अधिवक्ता अभिनव धनोतकर ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि केवल इससे 18 फीसदी ट्रैफिक ही इस एलिवेटेड कॉरिडोर से गुजरेगा। ऐसे में करीब 600 करोड़ कीमत का यह प्रोजेक्ट आमजन के पैसों की बर्बादी के सिवा कुछ नहीं। एक बार जब यह प्रोजेक्ट निरस्त हो चुका है तो फिर किस आधार पर इसे फिर बनाया जा रहा है।
केंद्र केवल 150-200 करोड़ दे रहा है, अभी यूटिलिटी सर्विसेस भी शिफ्ट करना होगी इसका खर्चा भी आएगा। बाकी खर्च कहां से वहन किया जाएगा। इस पर हाईकोर्ट जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी बेंच ने जवाब मांगा। शासन की ओर से और आईडीए ने भी इसमें जवाब देने के लिए समय की मांग की। इस पर अब दो अप्रैल को सुनवाई होगी।
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रैलिंग हटाने के लिए दिया 40 दिन का समय
वहीं बीआरटीएस से अभी तक नहीं हटी रैलिंग को लेकर निगमायुक्त की ओर से 40 दिन के समय की मांग की गई। उन्होंने प्रोग्रेस रिपोर्ट में बताया कि 17 में से तीन बस स्टाप हट चुके हैं और सात दिन में चार और हट जाएंगे। पूरे काम के लिए 40 दिन समय और लगेगा। इसे हाईकोर्ट ने मंजूर किया।
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वीवीआईपी मूवमेंट से होती है परेशानी
वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया और साथी अधिवक्ता शिरीन सिलावट ने ट्रैफिक की अन्य समस्याओं पर हाईकोर्ट का ध्यान आकर्षित किया। खासकर वीवीआईपी मूवमेंट को लेकर होने वाली परेशानी बताई। इसमें बागडिया ने कहा कि वीवीआईपी में कौन है इसकी कोई औपचारिक लिस्ट नहीं है और प्रशासन इनके मूवमेंट के लिए ट्रैफिक को बंद कर देता है।
लंबे समय तक सिग्नल रोके जाते हैं। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि सुरक्षा के लिए यह जरूरी है। इस पर बागड़िया ने कहा कि यही वीवीआईपी जब चुनाव में घर-घर जाते हैं तो सुरक्षा की बात नहीं आती है। लेकिन पद पर आते ही इसकी जरूरत होती है। इसके लिए तय होना चाहिए कि किस वीवीआईपी के लिए ट्रैफिक को रोका जाना चाहिए।
इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए माननीय न्यायालय ने कलेक्टर, इंदौर को निर्देशित किया कि वे ऐसे समस्त गणमान्य व्यक्तियों की सूची प्रस्तुत करें जो वास्तव में ऐसे प्रोटोकॉल के विधिसम्मत अधिकारी हैं। साथ यह भी स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति उक्त श्रेणी में नहीं आते, उन्हें ऐसी शून्य-यातायात सुविधा प्रदान नहीं की जानी चाहिए।
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टीआई भंवरकुआं को चेतावनी, यह भी निर्देश
वहीं हाईकोर्ट से नियुक्त कमेटी को भंवरकुआं टीआई राजकुमार यादव से सहयोग नहीं मिलने का मामला उठा। इस पर बेंच ने आदेश दिए कि सहयोग नहीं किया तो हाईकोर्ट में तलब किया जाएगा। वहीं हाईकोर्ट ने सभी ट्रैफिक मुद्दों पर प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस को संज्ञान लेकर काम करने के निर्देश दिए। खासकर रोड किनारे अतिक्रमण को लेकर ताकि रोड चलने के लिए बनी रहें।