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INDORE. ट्रैफिक केस पर इंदौर हाईकोर्ट खंडपीठ की नजर है। साथ ही, अधिकारियों की लगातार पेशी चल रही है। वहीं, इसमें भी नगर निगम की चूक खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।
बीआरटीएस रेलिंग हटाने के टेंडर में रेलिंग हटाने की बात ही नहीं लिखी है। इस मामले में जब हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ ने सख्ती दिखाई तो निगमायुक्त क्षितिज सिंघल सॉरी-सॉरी बोलते नजर आए।
अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी। वहीं हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि हमें काम चाहिए, बहाने नहीं।
इस तरह हुई हाईकोर्ट में जिरह
बीती सुनवाई में निगम ने बताया था कि रेलिंग हटाने का टेंडर लेने वाला ठेकेदार काम नहीं कर रहा है। वह ठेकेदार काम करने के लिए तैयार नहीं है। हम एक छोटा टेंडर 15 दिन की प्रक्रिया का जारी कर रहे हैं। इसे फाइनल होने में सात दिन लगेंगे।
इस टेंडर को वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा कि इसमें सिर्फ बीआरटीएस का स्क्रैप और बिल्डिंग मटेरियल हटाने का जिक्र है। इसमें रेलिंग हटाने की बात नहीं है। यह निगम का खेल है।
इस पर निगमायुक्त (आईएएस क्षितिज सिंघल) असहज हुए और सॉरी-सॉरी कहने लगे। उन्होंने फिर अधिकारियों से जानकारी ली। साथ ही, मोबाइल में कोर्ट को टेंडर की अंग्रेजी कॉपी दिखाई।
उन्होंने कहा कि रेलिंग हटाने का काम इसमें शामिल है। इस पर बागड़िया ने कहा कि जिस मामले में कोर्ट गंभीर है, इसमें निगम इस तरह की लापरवाही कर रहा है। कोर्ट ने इस पर खासी आपत्ति ली है।
22 दिन लगने पर भी ली आपत्ति
वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता ने एक और बात पर आपत्ति ली है। उन्होंने कहा कि जिस काम के लिए हाईकोर्ट से मंजूरी है, उसमें फिर से टेंडर प्रक्रिया में ही 22 दिन ले रहे हैं। जनता को लगातार परेशानी हो रही है। निगम खुद क्यों यह काम नहीं कर सकता है। टेंडर में फिर ठेकेदार नहीं आया तो क्या होगा।
इस पर हाईकोर्ट बेंच ने फिर कहा कि इस काम में इतनी हिचकिचाहट क्यों कर रहे हैं? यह तो खुद सरकार का फैसला है। भोपाल में तो तत्काल हट गया था। इस पर निगमायुक्त ने कहा कि रेलिंग हटा सकते हैं, लेकिन बस स्टॉप हटाने के संसाधन उनके पास नहीं हैं।
एलिवेटेड कॉरिडोर कार्य पर चर्चा
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने एलिवेटेड कॉरिडोर के कार्य पर चर्चा की, जो शुरू होने वाला है। अधिकारी ने कहा कि कार्य पहले ही शुरू हो चुका है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) फरवरी में एलिवेटेड कॉरिडोर का काम शुरू करेगा।
तीन महीने का समय बताया
वहीं इंदौर बीआरटीएस के बाकी 3.1 किमी में रेलिंग हटाने और सेंट्रल डिवाइडर बनाने का काम होना है। बताया गया कि इस काम को पूरा करने में तीन महीने लगेंगे। बेंच ने अधूरे डिवाइडर और बीआरटीएस काम के कारण यातायात समस्याओं पर चिंता जताई है।
साथ ही पूछा कि क्या अधूरे टेंडर को देखते हुए काम के लिए एक सरकारी एजेंसी नियुक्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि वह टेंडर प्राप्त करने वाले व्यक्ति को दंडित करने के बारे में चिंतित नहीं हैं, बल्कि कार्य को पूरा करने के बारे में अधिक चिंतित हैं।
5वीं बार होगा टेंडर
निगम अभी तक बीआरटीएस मामले में चार बार टेंडर निकाल चुका है। इस बार काम की लागत 1.5 करोड़ रखी जाएगी। पहले यह 3.50 करोड़ का निकाला गया था। एक साइड की रेलिंग निकाली जा चुकी है। अभी दूसरी साइड की रेलिंग और 18 बस स्टैंड को हटाना बाकी हैं।
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