जूनियर अधिकारी को उपकृत करने के लिए हुआ तबादला, हाईकोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक
समझें क्या है पूरा मामला
- अरविंद सिंह का तबादला भोपाल किया गया था।
- हाईकोर्ट ने तबादले पर अंतरिम रोक लगाई।
- आदेश प्रथम दृष्टया दुर्भावनापूर्ण माना गया।
- जूनियर अधिकारी को लाभ देने की आशंका जताई।
- कोर्ट ने शासन की सक्रियता पर सवाल उठाए।
तबादले पर अंतरिम रोक
स्कूल शिक्षा विभाग के तबादला आदेश पर रोक लगी। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने अंतरिम राहत दी। मामला संयुक्त संचालक अरविंद सिंह से जुड़ा है। उनका तबादला ग्वालियर संभाग से किया गया था। कोर्ट ने आदेश पर प्रथम दृष्टया सवाल उठाए। तबादला प्रशासनिक आवश्यकता पर आधारित नहीं लगा। कनिष्ठ अधिकारी को लाभ देने की आशंका जताई गई। कोर्ट ने शासन से जवाब भी मांगा है।
कोर्ट ने तबादले पर जताई नाराजगी
ग्वालियर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने तबादले पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने अरविंद सिंह के स्थानांतरण पर रोक लगाई। वे ग्वालियर संभाग में संयुक्त संचालक पद पर हैं। न्यायालय ने आदेश पर प्रथम दृष्टया सवाल उठाए। तबादला प्रशासनिक आवश्यकता पर आधारित नहीं दिखा। कनिष्ठ अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी को प्रभार देने की आशंका जताई।
अधिवक्ता आरबीएस तोमर ने रखा पक्ष
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आरबीएस तोमर ने पक्ष रखा। उन्होंने अरविंद सिंह को नियमित श्रेणी-एक अधिकारी बताया कि जून 2025 में उनकी ग्वालियर पदस्थापना हुई थी। एक वर्ष के भीतर भोपाल तबादला किया गया। उनकी सेवानिवृत्ति अप्रैल 2027 में प्रस्तावित है। अधिवक्ता ने तबादला नीति के क्लॉज 5.1 का हवाला दिया। नीति सामान्य प्रशासनिक तबादले की अनुमति नहीं देती। यह नियम सेवानिवृत्ति से एक वर्ष पहले लागू होता है।
सुनवाई में कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता से सवाल किया। सामान्य मामलों में शासन जवाब देने में देर करता है। फिर इस मामले में तत्काल निर्देश कैसे मिले। कोर्ट ने उच्च अधिकारियों की सक्रियता को असामान्य माना। न्यायालय ने इसे प्रथम दृष्टया दुर्भावनापूर्ण बताया। दूसरे अधिकारी को लाभ पहुंचाने की आशंका जताई। हाईकोर्ट ने तबादला आदेश पर अंतरिम रोक लगाई। शासन से मामले में जवाब भी मांगा गया।
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