कांग्रेस के मीडिया बहिष्कार वाले फैसले पर पार्टी लाइन से इतर बोले विवेक तंखा
Pawan Modiya | Jul 01, 2026, 22:47 IST
विवेक तन्खा की पोस्ट
कांग्रेस नेता विवेक तंखा ने मध्यप्रदेश कांग्रेस के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया बहिष्कार के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिये उन्होंने इस फैसले से सहमति तो जताई, लेकिन पत्रकारों की मजबूरी का जिक्र भी किया।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश कांग्रेस ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बहिष्कार का फैसला लिया है।
- पार्टी का आरोप है कि टीवी चैनलों ने एक अहम मुद्दा ठीक से नहीं दिखाया।
- कांग्रेस अगले तीन दिन मौन सत्याग्रह करेगी।
- इस दौरान पार्टी मीडिया से पूरी दूरी बनाएगी।
- वरिष्ठ नेता विवेक तंखा ने इस फैसले पर अलग राय दी है।
प्रदेश कांग्रेस का फैसला
कांग्रेस के मुताबिक यह मुद्दा सीधे जनहित से जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद इसे वह अहमियत नहीं मिली जो मिलनी चाहिए थी। इसी नाराजगी के चलते पार्टी ने विरोध का यह रास्ता चुना है।
पार्टी ने अगले तीन दिनों तक मौन सत्याग्रह करने का ऐलान किया है। इस दौरान कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाएंगे। कांग्रेस का कहना है कि यह उसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जताने का तरीका है।
तंखा की प्रतिक्रिया
उन्होंने कहा कि वे इस फैसले का अक्षरशः पालन करेंगे। लेकिन साथ ही उन्होंने पत्रकारों और एंकर्स की मुश्किलों का जिक्र भी किया। उनका कहना था कि ज्यादातर मीडिया संस्थान सरकारी विज्ञापन के सहारे चलते हैं।
तंखा ने आगे कहा कि कई मीडिया संस्थानों के मालिकों का अपना बिजनेस भी है। इसके अलावा सत्ता से नजदीकियां भी एक वजह हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि पार्टी को कोई बड़ा और विश्वसनीय कदम उठाना चाहिए।
इस विषय में मेरी सलाह @INCIndia MP को। मैं आपके कारणों से और निर्णय से सहमत हूँ। और अक्षत पालन भी करूँगा। मगर पत्रकारो और एंकर्स की विवशता भी सूचिये। सरकारी विज्ञापन के सहारे चलते हैं। अधिकतर मालिक के बिज़नेस भी है। नज़दीकियाँ भी हैं। बड़ा विश्वसनीय कदम उठाये, टीआरपी १/२ pic.twitter.com/W9M1r0Qw8b
— Vivek Tankha (@VTankha) July 1, 2026
पत्रकारों की मजबूरी भी गिनाई
तंखा ने सीधे तौर पर किसी चैनल या व्यक्ति का नाम नहीं लिया। उन्होंने व्यवस्थागत समस्या की ओर इशारा किया। उनका जोर इस बात पर रहा कि सिर्फ बहिष्कार से समाधान नहीं निकलेगा।
आगे क्या होगा
कांग्रेस के भीतर इस तरह की खुली असहमति कम ही देखने को मिलती है। तंखा जैसे वरिष्ठ नेता की अलग राय पार्टी के लिए एक नया सवाल खड़ा कर सकती है।
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