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एमपी कांग्रेस का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया बहिष्कार, करेंगे मौन सत्याग्रह, टीवी डिबेट से रहेंगे दूर
Sanjay Dhiman | Jul 01, 2026, 20:18 IST
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उज्जैन जमीन खरीद मामले में कांग्रेस ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बहिष्कार का फैसला लिया है। पार्टी तीन दिन मौन सत्याग्रह करेगी, प्रवक्ता किसी टीवी डिबेट में हिस्सा नहीं लेंगे। जानिए पूरा मामला।
समझें क्या है पूरा मामला
- प्रदेश कांग्रेस का बड़ा फैसला, अब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से बनाएंगे दूरी।
- उज्जैन जमीन मामले में तीन दिन कांग्रेस का मौन सत्याग्रह।
- कांग्रेस प्रवक्ता अब टीवी डिबेट में नहीं दिखेंगे।
- सीएम के परिवार से जुड़े जमीन मामले में कांग्रेस का बड़ा निर्णय।
- कांग्रेस के मीडिया बहिष्कार से मध्यप्रदेश की राजनीति हुई गर्म।
उज्जैन में जमीन खरीद को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस शुरू से ही इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव को घेर रही है। लेकिन पार्टी के अंदर भी अलग-अलग नेताओं के बयान सामने आए हैं। इससे कांग्रेस के भीतर खींचतान जैसी स्थिति बन गई है। अब इसी मामले को लेकर पार्टी ने एक बड़ा फैसला लिया है।
बहिष्कार का फैसला क्यों
कांग्रेस का कहना है कि यह जनहित से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इसके बावजूद इसे वह अहमियत नहीं मिली जो मिलनी चाहिए थी। इसी नाराजगी के बाद पार्टी ने विरोध जताने का यह रास्ता चुना है।
पार्टी ने अगले तीन दिनों तक मौन सत्याग्रह करने का ऐलान किया है। इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाई जाएगी। कांग्रेस के अनुसार यह उसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जताने का तरीका है।
पत्र में क्या कहा गया
इसके बावजूद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया यह मुद्दा जनता तक ठीक से नहीं पहुंचा रहा। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि जनहित के मुद्दों की जगह ध्यान दूसरी खबरों पर मोड़ा जा रहा है। पार्टी का कहना है कि इससे जरूरी जानकारी जनता तक नहीं पहुंच पा रही। यही वजह है कि कांग्रेस ने अब सख्त कदम उठाने का फैसला किया है।
डिबेट से बनाई दूरी
इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को कोई व्यक्तिगत आधिकारिक बयान भी नहीं दिया जाएगा। पार्टी के प्रवक्ता किसी भी टेलीविजन बहस में शामिल नहीं होंगे। इस तरह अगले तीन दिन पार्टी की तरफ से मीडिया को कोई बाइट नहीं मिलेगी।
किन्हें मिला निर्देश
इससे साफ है कि पार्टी इस मुद्दे को पूरी गंभीरता से ले रही है। संगठन के हर स्तर पर एक जैसा रुख अपनाने की कोशिश की जा रही है। यह भी संकेत है कि पार्टी आने वाले दिनों में इस मुद्दे को और आगे बढ़ा सकती है।
सोशल मीडिया पर तेज चर्चा
ऐसे में मीडिया के रवैये पर भी सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस के इस कदम से यह बहस और तेज हो सकती है कि जनहित के मुद्दों को मीडिया कितनी जगह देता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस का यह कदम कितना असर दिखाता है। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इस पर क्या रुख अपनाता है।
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