हाईकोर्ट ने पीएचडी की छात्रा को माना उत्तीर्ण, बीयू को पीएचडी जारी रखने का आदेश

Sanjay Sharma | Jan 09, 2026, 23:09 IST
Barkatullah University
जबलपुर हाईकोर्ट ने बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी पर 10 हजार की कॉस्ट लगाई है। इसके साथ ही पीएचडी छात्रा को उत्तीर्ण मानते हुए पीएचडी जारी रखने का आदेश दिया।

BHOPAL. हाईकोर्ट ने बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी (Barkatullah University ) पर 10 हजार की कॉस्ट लगाई। पीएचडी छात्रा को फेल कर आरडीसी में शामिल न होने दिया गया था। यह राशि छात्रा को देनी होगी। जबलपुर हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को छात्रा को हिंदी (एडवांस) में उत्तीर्ण मानने का आदेश दिया। कोर्ट ने छात्रा को आगे के पाठ्यक्रम में शामिल करने का भी आदेश दिया।



पीएचडी से रोकने पर लगाई गुहार

छात्रा पूजा कुशवाहा ने साल 2022 में एडवांस हिंदी पाठ्यक्रम में पीएडडी के लिए भोपाल के बीयू में एडमिशन लिया था। पढ़ाई के बाद उसने साल 2023 में परीक्षा दी जिसमें उसे अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया। उसके साथ 33 अन्य छात्रों को भी अनुत्तीर्ण घोषित किया गया था।



इस पर पूजा एवं अन्य सभी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन से दोबारा परीक्षा कराने या मूल्यांकन का आग्रह किया। लेकिन उस पर विचार नहीं किया गया। इसी वजह से उन्हें पूजा को आरडीसी (अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ) में शामिल होने से रोक दिया गया। जिससे परेशान होकर पूजा कुशवाहा ने हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की थी।



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बीयू ने दी ग्रेड पाइंट कम होने की सफाई

जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस दीपक खोट के समक्ष सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता पूजा की ओर से एडवोकेट दिनेश सिंह चौहान ने पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि पाठ्यक्रम में 88 में से 33 छात्रों को अनुत्तीर्ण घोषित किया गया था। उसके समान परिस्थिति के आधार पर अनुत्तीर्ण बताए गए छात्रों को बाद में परामर्शित घोषित कर दिया गया।



इसके साथ ही 1 जुलाई 2023 को अनुशंसा पत्र के माध्यम से उन्हें आरडीसी में शामिल करने की अनुमति भी जारी कर दी गई। सरकार की ओर से एडवोकेट पीयूष जैन ने पक्ष रखा। विश्वविद्यालय की ओर से एडवोकेट आस्था गुर्जर ने बताया कि पीएचडी के लिए 55 प्रतिशत अंक या समकक्ष ग्रेड पाइंट जरूरी हैं। इसलिए छात्रा को राहत नहीं दी जा सकती।



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बीयू के वकील ने पेश नहीं किया जवाब

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि छात्र अजय कुमार राय को भी उन्हीं के समान अनुत्तीर्ण घोषित किया गया। लेकिन बाद में नई अंकसूची जारी कर दी गई। इसमें उसे समकक्ष प्रतिशत 63.80 के साथ उत्तीर्ण बताया गया। एक अन्य छात्र प्रियेश गुप्ता को भी अनुत्तीर्ण करने के बाद 63 फीसदी के साथ उत्तीर्ण की अंकसूची जारी कर दी गई।



वहीं छात्रा ने अपनी अंकसूची पेश कि जिसमें उसे हिंदी विषय में उत्तीर्ण किया गया था। उसे समकक्ष ग्रेड पाइंट के 50 फीसदी से अधिक प्राप्त किए थे। 29 अगस्त को विश्वविद्यालय की ओर से एडवोकेट रामगुलाम महाजन ने जवाब पेश करने का समय मांगा। लेकिन जवाब पेश नहीं किया गया। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज के तथ्यों को रिकार्ड पर ले लिया।



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याचिकाकर्ता का पाठ्यक्रम रहेगा जारी

याचिकाकर्ता पूजा कुशवाहा की अंकसूची में एसजीपी 5.94 के आधार पर समकक्ष प्रतिशत 59.40 प्राप्त करने के तथ्य को भी पेश किया गया। हाईकोर्ट ने पीएचडी पाठ्यक्रम के लिए निर्धारित 55 प्रतिशत से अधिक मानते हुए आदेश पारित किया। कोर्ट ने पूजा को उत्तीर्ण मानते हुए पाठ्यक्रम जारी रखने की अनुमति दी। विश्वविद्यालय प्रबंधन को इस चूक के लिए 10 हजार रुपए देने का आदेश दिया।



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