टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा बाघों की मौत, इस साल अब तक 37 की गई जान
BP Shrivastava | Nov 29, 2023, 24:00 IST
टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा बाघों की मौत, इस साल अब तक 37 की गई जान
देश में सबसे ज्यादा बाघों की मौत मध्यप्रदेश में हुई हैं। टाइगर स्टेट के नाम से प्रसिद्ध एमपी में इस साल नवंबर 2023 तक 37 बाघों की मौत हो चुकी है।
BHOPAL. देश में सबसे ज्यादा बाघों की मौत मध्यप्रदेश में हुई हैं। टाइगर स्टेट के नाम से प्रसिद्ध एमपी में इस साल नवंबर 2023 तक 37 बाघों की मौत हो चुकी है। इस मामले में पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र का दूसरे और उत्तराखंड तीसरे नंवर पर है अर्थात एमपी के बाद सबसे ज्यादा बाघों की मौत क्रमश: महाराष्ट्र और उत्तराखंड में हुई है।
इस साल देश में 159 बाघों की मौत
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथोरिटी ( एनटीसीए ) की रिपोर्ट के अनुसार देश में इस साल अब तक कुल 159 बाघों ने जान गंवाई है। जबकि 2022 में 121 बाघों की मौत हुई थी। इनमें मध्यप्रदेश के 33 बाघ भी शामिल थे। यानी इस साल देश में बाघों की मौत ज्यादा हुई है। बाघ मृत्यु दर घटना के स्थान के आधार पर मृत्यु दर डेटा को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। बाघ अभ्यारण्य के अंदर हुई बाघों की मृत्यु, बाघ अभ्यारण्य के बाहर घटित घटनाएं और बाघ की खाल एवं हड्डी की जब्ती।
ऐसे तैयार होती है मौत की रिपोर्ट
किसी भी बाघ की मृत्यु को डेटाबेस में दर्ज नहीं किया जाता है, जब तक कि राज्य सरकार का कोई प्रामाणिक स्रोत बाघ की मृत्यु की रिपोर्ट नहीं करता है। भले ही किसी बाघ की मौत की सूचना तीसरे पक्ष के स्रोतों से एनटीसीए को क्यों नहीं दी जाती है, इसे दर्ज करने से पहले राज्य से पुष्टि प्राप्त की जाती है।
जान जाने के ये हैं मुख्य कारण
मध्यप्रदेश में टाइगर की संख्या भी सबसे अधिक है। यहां 785 टाइगर हैं। ऐसे में टेरिटरी की लड़ाई में बाघों की जान जा रही है। इसके साथ ही बाघों का शिकार भी एक सबसे बड़ा कारण है। कुछ बाघों ने बीमारी के चलते अपनी जान गंवा दी है।
कब और कहां हुई बाघों की मौत
इस साल देश में 159 बाघों की मौत
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथोरिटी ( एनटीसीए ) की रिपोर्ट के अनुसार देश में इस साल अब तक कुल 159 बाघों ने जान गंवाई है। जबकि 2022 में 121 बाघों की मौत हुई थी। इनमें मध्यप्रदेश के 33 बाघ भी शामिल थे। यानी इस साल देश में बाघों की मौत ज्यादा हुई है। बाघ मृत्यु दर घटना के स्थान के आधार पर मृत्यु दर डेटा को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। बाघ अभ्यारण्य के अंदर हुई बाघों की मृत्यु, बाघ अभ्यारण्य के बाहर घटित घटनाएं और बाघ की खाल एवं हड्डी की जब्ती।
ऐसे तैयार होती है मौत की रिपोर्ट
किसी भी बाघ की मृत्यु को डेटाबेस में दर्ज नहीं किया जाता है, जब तक कि राज्य सरकार का कोई प्रामाणिक स्रोत बाघ की मृत्यु की रिपोर्ट नहीं करता है। भले ही किसी बाघ की मौत की सूचना तीसरे पक्ष के स्रोतों से एनटीसीए को क्यों नहीं दी जाती है, इसे दर्ज करने से पहले राज्य से पुष्टि प्राप्त की जाती है।
जान जाने के ये हैं मुख्य कारण
मध्यप्रदेश में टाइगर की संख्या भी सबसे अधिक है। यहां 785 टाइगर हैं। ऐसे में टेरिटरी की लड़ाई में बाघों की जान जा रही है। इसके साथ ही बाघों का शिकार भी एक सबसे बड़ा कारण है। कुछ बाघों ने बीमारी के चलते अपनी जान गंवा दी है।
कब और कहां हुई बाघों की मौत
- 2 जनवरी कान्हा टाइगर रिजर्व के अंदर
- 4 जनवरी पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर
- 11 जनवरी सिवनी के बाहर
- 12 जनवरी सतपुड़ा रिजर्व के अंदर
- 24 जनवरी कान्हा टाइगर रिजर्व के अंदर
- 24 जनवरी शहडोल का गोदावल के बाहर
- 31 जनवरी पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर
- 3 फरवरी - कान्हा टाइगर रिजर्व के अंदर
- 4 फरवरी - फीमेल उमरिया रेंज के बाहर
- 3 मार्च - फीमेल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर
- 12 मार्च - फीमेल संजय दुबरी नेशनल पार्क के अंदर
- 22 मार्च फीमेल कान्हा टाइगर रिजर्व के अंदर
- 30 मार्च फीमेल कान्हा टाइगर रिजर्व के अंदर
- 1 अप्रैल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर
- 3 अप्रैल मेल बांधव टाइगर रिजर्व के अंदर
- 5 अप्रैल फीमेल का कान्हा टाइगर रिजर्व के अंदर
- 7 मई बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर
- 9 मई पेंच टाइगर रिजर्व के अंदर
- 17 मई शहडोल नॉर्थ इलाके में बाहरी एरिया
- 18 मई फीमेल बांधवगढ़ के अंदर
- 22 मई पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर
- 4 जून मेल बालाघाट
- 17 जून फीमेल कान्हा नेशनल पार्क के अंदर
- 17 जून मेल नौरादेही अभ्यारण
- 6 जून अब्दुल्लागंज
- 26 जून सतपुड़ा टाइगर रिजर्व
- 16 अगस्त फीमेल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर
- 21 जुलाई मानपुर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर
- 8 अगस्त मंडला सिवनी के बाहर
- 9 अगस्त फीमेल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर
- 31 अगस्त कान्हा नेशनल पार्क के अंदर
- 15 अक्टूबर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर
- 20 अक्टूबर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर
- 27 अक्टूबर चित्रकूट फॉरेस्ट डिविजन के बाहर
- 1 नवंबर छिंदवाड़ा सर्कल के अंदर
- 8 नवंबर पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर
- 15 नवंबर शहडोल जैतपुर रेंज के अंदर।
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