मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की बैठक से सांसद और विधायकों ने बनाई दूरी, जलसंकट पर भी एकजुट नहीं दिखे नेता
Sanjay Gupta | Oct 15, 2026, 16:22 IST
इंदौर में जलसंकट की समस्या से निपटने के लिए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बैठक बुलाई।
अलनीनो (El Nino) प्रभाव के चलते इस बार मध्यप्रदेश में कम बारिश हुई है। खासकर पश्चिमी मध्यप्रदेश की स्थिति खराब है। ऐसे में आने वाले महीनों में भारी जलसंकट की आशंका जताई जा रही है। इसे देखते हुए इंदौर नगर निगम अभी से तैयारियों में जुट गया है। निगम लगातार बैठकें कर रहा है। इसी क्रम में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने गुरुवार 15 अक्टूबर को बैठक बुलाई।
इन सभी को बुलाया था बैठक में
बैठक में केवल ये नेता पहुंचे
ये नेता बैठक में नहीं पहुंचे
बैठक में इन मुद्दों पर हुई चर्चा
जल कार्य एमआईसी प्रभारी बबलू शर्मा ने भी तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फंड मिलने पर नए हाइड्रेंट बनाए जा सकेंगे। इसके अलावा टैंकर खरीदने और बोरिंग सुधारने जैसे काम भी किए जाएंगे। बैठक में भविष्य में सख्त कदम उठाने की जरूरत भी बताई गई। पानी बचाने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाने पर चर्चा हुई। इसके साथ ही मोटर लगाकर पानी खींचने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने जैसे कदम उठाने की बात कही गई। बोरिंग पर रोक लगाने का मुद्दा भी सामने आया।
मंत्री बोले- अभी से शुरू करें तैयारी
बैठक में बताया गया कि इंदौर में हर साल औसतन 38 से 40 इंच बारिश होती है। इस बार अब तक केवल 23.20 इंच बारिश हुई है। यह औसत के मुकाबले करीब 40 फीसदी कम है। कम बारिश के कारण तालाब और अन्य जलाशय पूरी तरह नहीं भर सके हैं। इसका असर भूजल स्तर पर भी पड़ा है। ऐसे में आने वाले महीनों में शहर के सामने जलसंकट की चुनौती खड़ी हो सकती है।
महापौर ने मुख्यमंत्री से मांगे 50 करोड़
महापौर ने नर्मदा-मालवा-गंभीर लिंक परियोजना से इन तालाबों में पानी उपलब्ध कराने की संभावना पर मुख्यमंत्री से चर्चा की है। वहीं, शहर के हर वार्ड और जोन के लिए अलग-अलग कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य जलसंकट की स्थिति बनने से पहले ही तैयारियां पूरी करना है। लोगों से पानी बचाने की अपील भी की जा रही है।
मंत्री बोले- जो नहीं आए उनके यहां समस्या नहीं होगी
मंत्री विजयवर्गीय ने बताया कि इस बार बारिश कम हुई है। अभी से बोरिंग को लेकर शिकायतें आने लगी हैं। शहर में अब भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जहां नर्मदा का पानी नहीं पहुंचता है। आने वाले समय में बोरिंग सूख सकते हैं।
इसलिए अभी से योजना बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नगर निगम ने काफी तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस संबंध में एमआईसी की बैठक भी बुलाई जाएगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अभी बोरिंग पर रोक लगाने को लेकर चर्चा नहीं हुई है। हालांकि, आगे जरूरत के अनुसार फैसले लिए जाएंगे।
कैलाश ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर बोरिंग का अधिग्रहण भी किया जा सकता है। जमीन का पानी बेचने के लिए नहीं है। ऐसे बोरिंग को फिर से टेकओवर किया जा सकता है। मंत्री विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो शहर को 100 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। जलसंकट से निपटने के लिए फंड की कमी नहीं होने दी जाएगी।
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