13 अगस्त का इतिहास: जब दुनिया को अलविदा कह गईं महारानी अहिल्याबाई होलकर
Kaushiki | Aug 13, 2026, 08:00 IST
Ahilyabai Holkar Punyatithi
महारानी अहिल्याबाई होलकर भारत की महान और न्यायप्रिय शासक थीं। 13 अगस्त 1795 को उनका निधन हुआ था। उन्होंने मालवा की कमान संभालकर इंदौर और महेश्वर का विकास किया। देश भर के प्रमुख मंदिरों का पुनरुद्धार कराकर उन्होंने इतिहास रच दिया।
Rani Ahilyabai Holkar Punyatithi: भारतीय इतिहास में कई महान राजा और रानियों के नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज हैं। लेकिन जब भी धर्म, न्याय और सुशासन की बात आती है, तब महारानी अहिल्याबाई होलकर का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। वे मराठा साम्राज्य के मालवा प्रांत की एक बेहद कुशल और सहृदय शासक थीं।
13 अगस्त 1795 को इस महान और दानवीर रानी ने दुनिया से अलविदा कहा था। उनके निधन के सैकड़ों साल बाद भी देश उन्हें पूरी श्रद्धा से याद करता है। जनता उनके कल्याणकारी कार्यों के कारण उन्हें देवी और लोकमाता का दर्जा देती है।
अहिल्याबाई का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के चौंडी गांव में हुआ था। उनके पिता मंकोजी शिंदे एक साधारण और धर्मपरायण इंसान थे। बचपन से ही अहिल्याबाई का मन पूजा-पाठ और दया भावना में बहुत गहराई से लगता था।
![कौन थीं अहिल्याबाई होलकर?...जब अपने ही बेटे को कुचलने के लिए हो गईं थीं रथ पर सवार - History AajTak]()
महारानी अहिल्याबाई का मध्य प्रदेश यानी एमपी की धरती से बहुत ही गहरा नाता रहा है। मालवा के सूबेदार मल्हारराव होलकर ने उनके गुणों को बचपन में ही पहचान लिया था। इसके बाद उन्होंने अहिल्याबाई का विवाह अपने बेटे खांडेराव होलकर से करवा दिया।
विवाह के बाद अहिल्याबाई मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र की होलकर रियासत की बहू बनीं। शादी के कुछ ही सालों बाद कुंभीर के युद्ध में उनके पति खांडेराव शहीद हो गए। इस भीषण दुखद घटना ने अहिल्याबाई के जीवन को पूरी तरह से बदलकर रख दिया।
पति के निधन के बाद उनके ससुर मल्हारराव ने उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारियां सिखाईं। मल्हारराव के निधन के बाद पूरे मालवा की कमान अहिल्याबाई के मजबूत कंधों पर आ गई। उन्होंने इस जिम्मेदारी को बहुत ही समझदारी के साथ पूरी निष्ठा से संभाला।
![Ahilyabai Holkar]()
अहिल्याबाई ने शासन संभालते ही मध्य प्रदेश के इंदौर शहर की सूरत बदल कर रख दी। उस जमाने में इंदौर एक छोटा सा गांव हुआ करता था। अहिल्याबाई ने इसे एक बड़े, सुंदर और व्यापारिक शहर के रूप में पूरी तरह विकसित किया।
इसके बाद उन्होंने नर्मदा नदी के खूबसूरत तट पर बसे महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया। महेश्वर को उन्होंने कला, संस्कृति और उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र बना दिया। उन्होंने महेश्वर में भव्य किला और सुंदर घाटों का निर्माण भी कराया।
आज पूरी दुनिया में मशहूर महेश्वरी साड़ी उद्योग की शुरुआत भी महारानी ने ही कराई थी। उन्होंने देश भर के बुनकरों को बुलाकर महेश्वर में रहने और काम करने का मौका दिया। इस कदम ने स्थानीय लोगों को रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाया।
![Ahilyabai Holkar]()
महारानी अहिल्याबाई होलकर का योगदान केवल मालवा या मध्य प्रदेश तक ही सीमित नहीं था। उन्होंने भारत के चारों कोनों में धार्मिक और सामाजिक कार्य कराए। उस दौर में विदेशी आक्रमणकारियों ने कई प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों को भारी नुकसान पहुंचाया था।
अहिल्याबाई ने अपनी रियासत के खजाने का उपयोग देश के प्रमुख तीर्थों को संवारने में किया। वाराणसी का प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर का मौजूदा ढांचा अहिल्याबाई ने ही बनवाया था। इसके अलावा गुजरात के सोमनाथ मंदिर का पुनरुद्धार भी महारानी ने ही कराया था।
केदारनाथ, बद्रीनाथ, गया, अयोध्या और रामेश्वरम में भी उन्होंने धर्मशालाएं और घाट बनवाए। उन्होंने जगह-जगह यात्रियों के लिए कुएं, बावड़ियां और सड़कें बनवाईं। उनके इन महान कार्यों ने पूरे देश को सांस्कृतिक रूप से एक सूत्र में बांधा।
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अहिल्याबाई केवल एक धार्मिक महिला ही नहीं थीं, बल्कि एक बहुत ही साहसी योद्धा भी थीं। जब भी मालवा पर किसी दुश्मन ने हमला करने की कोशिश की, उन्होंने खुद सेना की कमान संभाली। वे हाथी पर सवार होकर युद्ध के मैदान में दुश्मनों का सामना करती थीं।
उनकी न्याय व्यवस्था इतनी सख्त और पारदर्शी थी कि अपराधी कांपते थे। उनके दरबार में एक आम नागरिक से लेकर अमीर व्यक्ति तक को बराबर न्याय मिलता था। उन्होंने अपने ही बेटे को गलती करने पर सजा देने में कोई संकोच नहीं किया था।
उन्होंने राज्य के कर ढांचे को बहुत ही सरल और पारदर्शी बनाया। किसानों और व्यापारियों से बहुत ही कम लगान लिया जाता था। इस वजह से उनके शासनकाल में मालवा राज्य आर्थिक रूप से बहुत मजबूत और खुशहाल बन गया।
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इतने बड़े राज्य की शासक होने के बावजूद अहिल्याबाई का जीवन बहुत ही साधारण था। वे हमेशा सफेद सूती वस्त्र पहनती थीं और जमीन पर सोती थीं। वे राजकोष के पैसे का इस्तेमाल अपने व्यक्तिगत आराम के लिए कभी नहीं करती थीं।
वे रोजाना घंटों शिव जी की पूजा में अपना समय बिताती थीं। वे हर सरकारी आदेश और दस्तावेज पर 'श्री शंकर' लिखकर ही हस्ताक्षर करती थीं। उनका मानना था कि वे केवल भगवान शिव की प्रतिनिधि बनकर ही राज्य चला रही हैं।
प्रजा की सेवा करना ही उनके जीवन का सबसे बड़ा और एकमात्र लक्ष्य था। वे रोजाना आम जनता से मिलती थीं और उनकी समस्याएं खुद सुनती थीं। यही वजह है कि जनता उन्हें अपनी मां की तरह प्यार और सम्मान देती थी।
![Prerna Samvad - Ahilyabai Holkar was the queen who renovated hundreds of temples]()
18वीं सदी में जब समाज में महिलाओं पर कई पाबंदियां थीं, तब अहिल्याबाई ने इतिहास रचा। उन्होंने साबित किया कि एक महिला भी कुशल शासक बन सकती है। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों और शिक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।
उन्होंने विधवा महिलाओं को अपने मृत पति की संपत्ति रखने का कानूनी अधिकार दिया। उन्होंने समाज में फैली सती प्रथा जैसी कुरीतियों का भी कड़ा विरोध किया था। उनकी यह प्रगतिशील सोच उन्हें अपने समय से बहुत आगे खड़ा करती है।
अहिल्याबाई ने अपनी सेना में महिलाओं की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया। उनकी इस हिम्मत और दूरदर्शिता ने आने वाली पीढ़ियों की महिलाओं को नई दिशा दिखाई। वे आज भी हर महिला के लिए प्रेरणा की एक बहुत बड़ी मिसाल हैं।
![महारानी अहिल्याबाई होलकर का इतिहास Ahilyabai Holkar History in Hindi | हिंदी वर्ल्ड - Hindi World]()
लगातार कठोर परिश्रम और प्रजा की चिंता के कारण उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा था। 13 अगस्त 1795 को 70 वर्ष की आयु में इस महान महारानी का निधन हो गया। उनके जाने से पूरे देश और मालवा में शोक की लहर दौड़ गई थी।
उनके निधन के बाद इंदौर और महेश्वर में लोगों ने अपने चूल्हे तक नहीं जलाए थे। जनता को लगा जैसे उन्होंने अपनी सगी मां को हमेशा के लिए खो दिया हो। उनका जाना मराठा इतिहास का एक बहुत बड़ा और अपूरणीय नुकसान था।
आज भी इंदौर का इंटरनेशनल एयरपोर्ट उनके नाम पर देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा कहलाता है। इंदौर विश्वविद्यालय का नाम भी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय रखा गया है। उनका जीवन हर भारतीय के लिए गर्व और सम्मान का विषय है।
![महारानी अहिल्याबाई होल्कर: केदार से काशी तक बनवाए मंदिर-भोजनायलय-धर्मशाला]()
महारानी अहिल्याबाई होलकर का जीवन हमें सिखाता है कि शक्ति का असली उपयोग सेवा के लिए होना चाहिए। उन्होंने बिना किसी भेदभाव के हर धर्म और वर्ग के लोगों की भलाई की। उनका शासन काल मालवा का स्वर्णिम काल माना जाता है।
आज के दौर में जब भी सुशासन और ईमानदारी की बात होती है, उनका उदाहरण दिया जाता है। उनकी पुण्यतिथि पर देशवासी उनके महान योगदान को नमन करते हैं। उन्होंने जो विरासत छोड़ी है, वह आज भी अमर है और हमेशा रहेगी।
मध्य प्रदेश की माटी उनके कदमों की धूल से आज भी धन्य महसूस करती है। महेश्वर के घाट और इंदौर की गलियां आज भी रानी के शौर्य की कहानी सुनाती हैं। रानी अहिल्याबाई का जीवन इतिहास के पन्नों पर हमेशा चमकता रहेगा।
References
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 13 अगस्त का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 13 अगस्त (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
31 जुलाई का इतिहास: आज ही के दिन से हुई थी मोबाइल संचार क्रांति की शुरुआत
साल 1905 में आज ही के दिन कोलकाता से शुरू हुआ था स्वदेशी आंदोलन का इतिहास
27 जुलाई का इतिहास: कैसे मिला टाइटैनिक का मलबा, जानें समुद्र की गहराई का सच
28 जुलाई का इतिहास: कौन थे विलियम हर्शेल, जिन्होंने फिंगरप्रिंट को बनाया पहचान का जरिया
13 अगस्त 1795 को इस महान और दानवीर रानी ने दुनिया से अलविदा कहा था। उनके निधन के सैकड़ों साल बाद भी देश उन्हें पूरी श्रद्धा से याद करता है। जनता उनके कल्याणकारी कार्यों के कारण उन्हें देवी और लोकमाता का दर्जा देती है।
अहिल्याबाई का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के चौंडी गांव में हुआ था। उनके पिता मंकोजी शिंदे एक साधारण और धर्मपरायण इंसान थे। बचपन से ही अहिल्याबाई का मन पूजा-पाठ और दया भावना में बहुत गहराई से लगता था।
कौन थीं अहिल्याबाई होलकर?...जब अपने ही बेटे को कुचलने के लिए हो गईं थीं रथ पर सवार - History AajTak
मालवा और मध्य प्रदेश से गहरा नाता
विवाह के बाद अहिल्याबाई मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र की होलकर रियासत की बहू बनीं। शादी के कुछ ही सालों बाद कुंभीर के युद्ध में उनके पति खांडेराव शहीद हो गए। इस भीषण दुखद घटना ने अहिल्याबाई के जीवन को पूरी तरह से बदलकर रख दिया।
पति के निधन के बाद उनके ससुर मल्हारराव ने उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारियां सिखाईं। मल्हारराव के निधन के बाद पूरे मालवा की कमान अहिल्याबाई के मजबूत कंधों पर आ गई। उन्होंने इस जिम्मेदारी को बहुत ही समझदारी के साथ पूरी निष्ठा से संभाला।
Ahilyabai Holkar
इंदौर और महेश्वर का किया कायाकल्प
इसके बाद उन्होंने नर्मदा नदी के खूबसूरत तट पर बसे महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया। महेश्वर को उन्होंने कला, संस्कृति और उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र बना दिया। उन्होंने महेश्वर में भव्य किला और सुंदर घाटों का निर्माण भी कराया।
आज पूरी दुनिया में मशहूर महेश्वरी साड़ी उद्योग की शुरुआत भी महारानी ने ही कराई थी। उन्होंने देश भर के बुनकरों को बुलाकर महेश्वर में रहने और काम करने का मौका दिया। इस कदम ने स्थानीय लोगों को रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाया।
Ahilyabai Holkar
देशभर में कराया मंदिरों का निर्माण
अहिल्याबाई ने अपनी रियासत के खजाने का उपयोग देश के प्रमुख तीर्थों को संवारने में किया। वाराणसी का प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर का मौजूदा ढांचा अहिल्याबाई ने ही बनवाया था। इसके अलावा गुजरात के सोमनाथ मंदिर का पुनरुद्धार भी महारानी ने ही कराया था।
केदारनाथ, बद्रीनाथ, गया, अयोध्या और रामेश्वरम में भी उन्होंने धर्मशालाएं और घाट बनवाए। उन्होंने जगह-जगह यात्रियों के लिए कुएं, बावड़ियां और सड़कें बनवाईं। उनके इन महान कार्यों ने पूरे देश को सांस्कृतिक रूप से एक सूत्र में बांधा।
Ahilyabai Holkar
न्यायप्रियता और कड़ा सैन्य नेतृत्व
उनकी न्याय व्यवस्था इतनी सख्त और पारदर्शी थी कि अपराधी कांपते थे। उनके दरबार में एक आम नागरिक से लेकर अमीर व्यक्ति तक को बराबर न्याय मिलता था। उन्होंने अपने ही बेटे को गलती करने पर सजा देने में कोई संकोच नहीं किया था।
उन्होंने राज्य के कर ढांचे को बहुत ही सरल और पारदर्शी बनाया। किसानों और व्यापारियों से बहुत ही कम लगान लिया जाता था। इस वजह से उनके शासनकाल में मालवा राज्य आर्थिक रूप से बहुत मजबूत और खुशहाल बन गया।
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सादगी और त्याग से भरा जीवन
वे रोजाना घंटों शिव जी की पूजा में अपना समय बिताती थीं। वे हर सरकारी आदेश और दस्तावेज पर 'श्री शंकर' लिखकर ही हस्ताक्षर करती थीं। उनका मानना था कि वे केवल भगवान शिव की प्रतिनिधि बनकर ही राज्य चला रही हैं।
प्रजा की सेवा करना ही उनके जीवन का सबसे बड़ा और एकमात्र लक्ष्य था। वे रोजाना आम जनता से मिलती थीं और उनकी समस्याएं खुद सुनती थीं। यही वजह है कि जनता उन्हें अपनी मां की तरह प्यार और सम्मान देती थी।
Prerna Samvad - Ahilyabai Holkar was the queen who renovated hundreds of temples
महिलाओं के अधिकारों की बनीं मिसाल
उन्होंने विधवा महिलाओं को अपने मृत पति की संपत्ति रखने का कानूनी अधिकार दिया। उन्होंने समाज में फैली सती प्रथा जैसी कुरीतियों का भी कड़ा विरोध किया था। उनकी यह प्रगतिशील सोच उन्हें अपने समय से बहुत आगे खड़ा करती है।
अहिल्याबाई ने अपनी सेना में महिलाओं की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया। उनकी इस हिम्मत और दूरदर्शिता ने आने वाली पीढ़ियों की महिलाओं को नई दिशा दिखाई। वे आज भी हर महिला के लिए प्रेरणा की एक बहुत बड़ी मिसाल हैं।
महारानी अहिल्याबाई होलकर का इतिहास Ahilyabai Holkar History in Hindi | हिंदी वर्ल्ड - Hindi World
13 अगस्त 1795 को हुआ निधन
उनके निधन के बाद इंदौर और महेश्वर में लोगों ने अपने चूल्हे तक नहीं जलाए थे। जनता को लगा जैसे उन्होंने अपनी सगी मां को हमेशा के लिए खो दिया हो। उनका जाना मराठा इतिहास का एक बहुत बड़ा और अपूरणीय नुकसान था।
आज भी इंदौर का इंटरनेशनल एयरपोर्ट उनके नाम पर देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा कहलाता है। इंदौर विश्वविद्यालय का नाम भी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय रखा गया है। उनका जीवन हर भारतीय के लिए गर्व और सम्मान का विषय है।
महारानी अहिल्याबाई होल्कर: केदार से काशी तक बनवाए मंदिर-भोजनायलय-धर्मशाला
आज भी अमर है लोकमाता की गाथा
आज के दौर में जब भी सुशासन और ईमानदारी की बात होती है, उनका उदाहरण दिया जाता है। उनकी पुण्यतिथि पर देशवासी उनके महान योगदान को नमन करते हैं। उन्होंने जो विरासत छोड़ी है, वह आज भी अमर है और हमेशा रहेगी।
मध्य प्रदेश की माटी उनके कदमों की धूल से आज भी धन्य महसूस करती है। महेश्वर के घाट और इंदौर की गलियां आज भी रानी के शौर्य की कहानी सुनाती हैं। रानी अहिल्याबाई का जीवन इतिहास के पन्नों पर हमेशा चमकता रहेगा।
References
- मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग एवं राज्य अभिलेखागार (MP Culture Department Records)
- भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR - History of Holkar Dynasty)
13 अगस्त की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 13 अगस्त (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1784: भारत में प्रशासनिक सुधारों के लिए ब्रिटिश संसद में 'पिट्स इंडिया विधेयक' पेश किया गया।
- 1892: अमेरिकी समाचार पत्र "एफ्रो-अमेरिकन" का बाल्टीमोर से प्रकाशन शुरू हुआ।
- 1902: इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को एक विकेट से हराकर ओवल के ऐतिहासिक मैदान पर प्रसिद्ध जीत दर्ज की।
- 1913: इंग्लैंड के हैरी ब्रेअर्ली (शेफील्ड) ने स्टेनलेस स्टील का आविष्कार किया।
- 1951: भारत में निर्मित पहले स्वदेशी विमान 'हिंदुस्तान ट्रेनर 2' ने अपनी पहली उड़ान भरी।
- 1956: भारतीय संसद की लोकसभा में राष्ट्रीय राजमार्ग विधेयक पारित हुआ।
- 1977: अमरीकी अंतरिक्ष शटल के पहले फ्री-ग्लाइड परीक्षण का सफल आयोजन किया गया।
- 1993: वाशिंगटन में इजरायल और फिलिस्तीन के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता संपन्न हुआ।
- 1993: थाईलैंड के नाखोन रचासिमा में एक होटल ढह जाने से 114 लोगों की जान चली गई।
- 1994: अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच जेनेवा में परमाणु निरस्त्रीकरण पर ऐतिहासिक सहमति बनी।
- 1999: बांग्लादेश सरकार ने लेखिका तसलीमा नसरीन की पुस्तक 'आमार मऐबेला' (मेरा बचपन) पर प्रतिबंध लगाया।
- 1999: महान टेनिस खिलाड़ी स्टेफ़ी ग्राफ़ ने पेशेवर टेनिस से संन्यास की घोषणा की।
- 2000: रोनाल्ड वेनेशिअन सूरीनाम के नए राष्ट्रपति नियुक्त किए गए।
- 2002: इंटरपोल ने नेपाल के 8 माओवादी विद्रोहियों की तलाश के लिए 'रेड कॉर्नर' नोटिस जारी किया।
- 2004: यूनानी सभ्यता की शानदार नुमाइश के साथ एथेंस (ग्रीस) में 28वें ओलंपिक खेलों की शुरुआत हुई।
- 2005: श्रीलंका के विदेश मंत्री लक्ष्मण कादिरगमर की हत्या के बाद देश में इमरजेंसी लागू कर दी गई।
- 2008: टाटा स्टील ने वियतनाम में इस्पात परिसर निर्माण के लिए वहाँ की दो प्रमुख कंपनियों के साथ समझौता किया।
- 2008: भारत ने मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) वेपन सिस्टम 'पिनाक' का सफल परीक्षण किया।
- 2008: प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और आरबीआई के पूर्व गवर्नर डॉ. सी. रंगराजन को राज्यसभा के लिए नामित किया गया।
- 2015: इराक की राजधानी बगदाद में एक ट्रक बम विस्फोट में 76 लोगों की मौत हो गई और 212 घायल हुए।
- 1848: अंग्रेज़ी और बांग्ला भाषा के प्रसिद्ध लेखक तथा शिक्षाशास्त्री रमेश चन्द्र दत्त का जन्म हुआ।
- 1863: प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और राजनीतिज्ञ गंगाप्रसाद वर्मा का जन्म हुआ।
- 1887: भारत के प्रसिद्ध क्रांतिकारी नरेन्द्र मोहन सेन का जन्म हुआ।
- 1933: भारतीय-अमेरिकी अभिनेत्री, खाद्य व यात्रा लेखिका मधुर जाफरी का जन्म हुआ।
- 1936: भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री वैजयंती माला का जन्म हुआ।
- 1952: हिंदी सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री योगिता बाली का जन्म हुआ।
- 1961: बॉलीवुड के मशहूर एक्शन अभिनेता और निर्माता सुनील शेट्टी का जन्म हुआ।
- 1963: भारतीय सिनेमा की ख्यातिप्राप्त और पहली महिला सुपरस्टार श्रीदेवी का जन्म हुआ।
- 1984: भारतीय महिला मुक्केबाज़ उषा नेगिसेटी का जन्म हुआ।
- 2000: राष्ट्रमंडल खेल 2022 के स्वर्ण पदक विजेता भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी सात्विकसाईंराज रंकीरेड्डी का जन्म हुआ।
- 1795: मालवा साम्राज्य की न्यायप्रिय शासक और महान वीरांगना महारानी अहिल्याबाई होलकर का निधन हुआ।
- 1910: आधुनिक नर्सिंग आंदोलन की जन्मदाता और 'लेडी विद द लैम्प' के नाम से प्रसिद्ध फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल का निधन हुआ।
- 1936: भारत की प्रसिद्ध महिला क्रांतिकारी मैडम भीकाजी कामा का निधन हुआ।
- 2003: प्रसिद्ध भारतीय उपन्यासकार, लघु कथा लेखक और फ़िल्म निर्देशक भबेन्द्र नाथ सैकिया का निधन हुआ।
- 2008 (संदर्भानुसार): / 2018: प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ और लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का निधन हुआ।
- विश्व अंगदान दिवस (World Organ Donation Day): अंगदान के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल 13 अगस्त को मनाया जाता है।
- अंतर्राष्ट्रीय वामहस्त दिवस (International Left-Handers Day): बाएं हाथ से काम करने वाले लोगों की अनूठी प्रतिभा को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि
31 जुलाई का इतिहास: आज ही के दिन से हुई थी मोबाइल संचार क्रांति की शुरुआत
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