खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल ने किया निजी स्कूल का प्रचार, अखबार में छपा विज्ञापन

Pawan Modiya | Jun 16, 2026, 18:41 IST
आईएएस भव्या मित्तल का विज्ञापन
खरगोन कलेक्टर और IAS (Indian Administrative Service) अधिकारी भव्या मित्तल का नाम और पद एक निजी स्कूल के अखबारी विज्ञापन में छपा। 11 जून 2026 को दैनिक भास्कर में यह विज्ञापन आया। उन्होंने स्कूल की तारीफ की। यह विवाद का विषय बन गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • खरगोन की कलेक्टर भव्या मित्तल IAS (Indian Administrative Service) हैं।
  • 11 जून 2026 को दैनिक भास्कर के खंडवा एडिशन में एक विज्ञापन छपा।
  • यह विज्ञापन एक निजी स्कूल का था, जिसमें उनका नाम और पद लिखा था।
  • विज्ञापन में भव्या मित्तल ने स्कूल की तारीफ में बयान दिया।
  • अब सवाल उठ रहा है कि क्या एक IAS अधिकारी ऐसा प्रचार कर सकती हैं?

IAS कलेक्टर का नाम अखबार में

मध्य प्रदेश में आईएएस अधिकारियों की खबरें अक्सर चर्चा में रहती हैं। कभी तबादले, कभी कार्रवाई, तो कभी कोई विवाद। लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है। कभी घूसखोर लिपिक को डिमोट कर चपरासी बनाकर सुर्खियां बटोर चुकीं खरगोन जिले की कलेक्टर और आईएएस अधिकारी भव्या मित्तल एक विवाद से जुड़ गई हैं। दरअसल, भव्या मित्तल का नाम एक निजी स्कूल के विज्ञापन में छपा है। 11 जून 2026 को दैनिक भास्कर के खंडवा एडिशन में खरगोन फ्रंट पेज पर यह विज्ञापन आया। यह आधे पेज का विज्ञापन था। इसमें एक पब्लिक स्कूल की तारीफ की गई थी।



विज्ञापन में क्या लिखा था?

विज्ञापन में लिखा था कि उस स्कूल के टीचर बहुत सहयोगी हैं। एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग (Activity Based Learning) यानी गतिविधि आधारित सीखने का तरीका वहां बच्चों को मिलता है। इससे बच्चों का सामाजिक, भावनात्मक और मानसिक विकास होता है। साथ ही उनकी पढ़ाई भी बेहतर होती है।



विज्ञापन के अंत में लिखा था कि यह बात भव्या मित्तल, कलेक्टर खरगोन ने कही है। यानी उनका नाम और सरकारी पद दोनों उस विज्ञापन में दर्ज थे।



खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल का विज्ञापन

बेटी पढ़ती है उसी स्कूल में

इस विज्ञापन से एक बात साफ निकलती है। भव्या मित्तल की बेटी उस स्कूल में पढ़ती है। एक मां के तौर पर उन्होंने अपनी राय जाहिर की होगी। यह स्वाभाविक भी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या उस राय को व्यावसायिक विज्ञापन में इस्तेमाल किया जा सकता है? खासतौर पर तब, जब उनके नाम के साथ "कलेक्टर, खरगोन" जैसा सरकारी पद भी लिखा हो।



किससे ली अनुमति?

अब दो बड़े सवाल सामने हैं। पहला यह कि क्या स्कूल ने उनका बयान विज्ञापन में छापने से पहले उनसे अनुमति ली थी? दूसरा यह कि अगर अनुमति ली गई थी, तो क्या यह आचरण एक आईएएस अधिकारी के लिए उचित है?



इसे लेकर अब तक ना तो खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल ने अपना पक्ष रखा है। ना ही स्कूल के डायरेक्टर (Director) आयुष महाजन की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई है। जिला जनसंपर्क अधिकारी जकिया रूही ने इस मामले में बताया कि अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। स्कूल का पक्ष भी सामने नहीं आया है। यह मामला अभी खुला है। आगे की प्रतिक्रिया और संभावित कार्रवाई पर नजर रखी जाएगी।



रिश्वतखोर बाबू को डिमोट कर चर्चा में रही थीं भव्या

खरगोन आने से पहले बुरहानपुर कलेक्टर रहते हुए भव्या मित्तल ने आंगनबाड़ी भर्ती में कथित रिश्वत लेने के आरोपी एक लिपिक के खिलाफ कार्रवाई की थी। मीडिया रिपोर्टों और वीडियो रिपोर्टों में बताया गया कि जांच में दोष सिद्ध होने के बाद कर्मचारी को पदावनत (डिमोट) किया गया। इस कार्रवाई पर प्रशासनिक हलकों में काफी चर्चा हुई और कुछ जगह इसे कड़ा कदम बताया गया।



एमपी में आईएएस और विवाद

मध्य प्रदेश में आईएएस अधिकारियों के राजनीतिक हितों और दखल की खबरें पहले भी सामने आती रही हैं। लेकिन किसी सेवारत आईएएस अधिकारी का नाम किसी निजी स्कूल के व्यावसायिक विज्ञापन में इस तरह आना कम ही देखा गया है।



सरकारी पद पर बैठे अधिकारी का नाम किसी कारोबारी विज्ञापन में आने से एक खास छवि बनती है। इससे यह धारणा भी बन सकती है कि उस संस्था को प्रशासन का समर्थन मिला हुआ है। यह सवाल सीधे तौर पर नैतिकता और आचार संहिता से जुड़ा है।



क्या कहते हैं सेवा नियम?

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों पर ऑल इंडिया सर्विसेज (All India Services) कंडक्ट रूल्स (Conduct Rules) 1968 लागू होते हैं। इन नियमों के तहत कोई भी सेवारत आईएएस अधिकारी किसी व्यावसायिक उद्देश्य के लिए अपनी छवि या पद का उपयोग नहीं कर सकता।



यदि स्कूल ने बिना अनुमति के उनका बयान छापा, तो स्कूल प्रबंधन जिम्मेदार है। यदि अनुमति दी गई थी, तो यह अधिकारी के आचरण का मामला बनता है। दोनों ही स्थितियों में यह गंभीर सवाल उठाता है।



जरूरी FAQ

क्या कोई IAS अधिकारी किसी निजी स्कूल का विज्ञापन कर सकता है?



नहीं। ऑल इंडिया सर्विसेज कंडक्ट रूल्स 1968 के तहत कोई भी सेवारत आईएएस अधिकारी किसी व्यावसायिक संस्था के विज्ञापन में अपने नाम या पद का उपयोग नहीं कर सकता। यदि उनका बयान उनकी अनुमति से विज्ञापन में छपा है, तो यह इन नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। यदि बिना अनुमति के छपा है, तो स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी बनती है। दोनों ही स्थितियों में यह मामला जांच योग्य है।



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