सोना खरीदी पर रिटायर्ड आईएएस मनोज श्रीवास्तव की टिप्पणी हुई वायरल, जानें पूरा मामला
Anjali Dwivedi | May 13, 2026, 18:46 IST
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पीएम मोदी की सोना न खरीदने की अपील के बाद मंदिरों की संपत्ति पर बहस शुरू हो गई है। रिटायर्ड आईएएस और मौजूदा राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने मंदिरों के सोने को अधिग्रहित करने की मांग करने वालों को खरी-खोटी सुनाई है। उनकी पोस्ट चर्चा में है।
देश में सोने की खरीदारी को लेकर सोशल मीडिया पर एक नई बहस शुरू हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद कुछ लोगों ने मंदिरों के खजाने पर नजरें गड़ा दी हैं। इस बीच मध्य प्रदेश के एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी मनोज श्रीवास्तव ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने ऐसी मांग करने वालों को अपनी मर्यादा में रहने की सलाह दी है।
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मनोज श्रीवास्तव ने
मध्य प्रदेश के पूर्व अधिकारी मनोज श्रीवास्तव अपनी बेबाकी के लिए काफी प्रसिद्ध हैं। उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि लोग सिर्फ हिंदू मंदिरों की संपत्ति को देख रहे हैं। जब सोना न खरीदने को कहा गया, तो मंदिरों की सूची क्यों घूमने लगी? उन्होंने इस मानसिकता को बेहद खतरनाक और पक्षपाती बताया है।
मनोज श्रीवास्तव ने अपनी पोस्ट में कई बड़े धार्मिक स्थलों के नाम लिखे हैं। उन्होंने जामा मस्जिद, चर्च और नामद्रोलिंग मठ जैसे पवित्र स्थानों का जिक्र किया। उनका कहना है कि इन जगहों की संपत्तियों पर कभी कोई चर्चा नहीं होती। लोग केवल हिंदू मंदिरों के डेटा को ही निशाना क्यों बना रहे हैं?
उन्होंने लिखा कि हिंदू मंदिर बहुत ही खुली व्यवस्था के तहत काम करते हैं। यही कारण है कि उनके पास कितना सोना है, यह जानकारी सबको पता है। बाकी धर्मों की संपत्तियों का सार्वजनिक डेटा कभी सामने नहीं लाया जाता। उन्होंने वक्फ और चर्च की संपत्तियों की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अपनी पोस्ट के आखिरी हिस्से में उन्होंने बहुत ही कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने लिखा कि ऐसे लोग जो केवल मंदिरों पर नजर रखते हैं, अपनी औकात में रहें। उन्होंने चेतावनी दी कि यह मामला बर्र के छत्ते में हाथ डालने जैसा है। उनके इस बयान ने इंटरनेट पर हलचल पैदा कर दी है।
मनोज श्रीवास्तव की यह पोस्ट अब तेजी से शेयर की जा रही है। कुछ लोग उनकी हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं, तो कुछ इसे विवादास्पद मान रहे हैं। देश के बड़े मंदिरों की सुरक्षा और उनके खजाने को लेकर हमेशा से राजनीति होती रही है। अब इस बयान ने उस आग में घी डालने का काम किया है।
भारत में मंदिरों का प्रबंधन अक्सर सरकार के नियंत्रण में देखा जाता है। वहीं अन्य धर्मों के स्थल अपने नियमों के हिसाब से स्वतंत्र रूप से चलते हैं। मनोज श्रीवास्तव का इशारा इसी भेदभाव की तरफ था। उनकी पोस्ट ने समानता और निष्पक्षता के सवाल को दोबारा जिंदा कर दिया है।
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मनोज श्रीवास्तव ने फेसबुक पोस्ट पर क्या लिखा?
मनोज श्रीवास्तव ने अपनी पोस्ट में कई बड़े धार्मिक स्थलों के नाम लिखे हैं। उन्होंने जामा मस्जिद, चर्च और नामद्रोलिंग मठ जैसे पवित्र स्थानों का जिक्र किया। उनका कहना है कि इन जगहों की संपत्तियों पर कभी कोई चर्चा नहीं होती। लोग केवल हिंदू मंदिरों के डेटा को ही निशाना क्यों बना रहे हैं?
उन्होंने लिखा कि हिंदू मंदिर बहुत ही खुली व्यवस्था के तहत काम करते हैं। यही कारण है कि उनके पास कितना सोना है, यह जानकारी सबको पता है। बाकी धर्मों की संपत्तियों का सार्वजनिक डेटा कभी सामने नहीं लाया जाता। उन्होंने वक्फ और चर्च की संपत्तियों की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अपनी पोस्ट के आखिरी हिस्से में उन्होंने बहुत ही कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने लिखा कि ऐसे लोग जो केवल मंदिरों पर नजर रखते हैं, अपनी औकात में रहें। उन्होंने चेतावनी दी कि यह मामला बर्र के छत्ते में हाथ डालने जैसा है। उनके इस बयान ने इंटरनेट पर हलचल पैदा कर दी है।
इस पर आम जनता की क्या राय है?
भारत में मंदिरों का प्रबंधन अक्सर सरकार के नियंत्रण में देखा जाता है। वहीं अन्य धर्मों के स्थल अपने नियमों के हिसाब से स्वतंत्र रूप से चलते हैं। मनोज श्रीवास्तव का इशारा इसी भेदभाव की तरफ था। उनकी पोस्ट ने समानता और निष्पक्षता के सवाल को दोबारा जिंदा कर दिया है।
FAQ
- रिटायर्ड आईएएस मनोज श्रीवास्तव ने मंदिरों के सोने को लेकर क्या कहा है?
मनोज श्रीवास्तव ने उन लोगों की आलोचना की है जो सरकार से हिंदू मंदिरों का सोना अधिग्रहित करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने केवल एक साल सोना न खरीदने की अपील की थी, लेकिन लोग इसे मंदिरों की संपत्ति से जोड़ने लगे। उन्होंने इसे केवल एक धर्म विशेष को निशाना बनाने की कोशिश बताया और अन्य धर्मों की गुप्त संपत्तियों पर भी सवाल उठाए। - मनोज श्रीवास्तव ने अपनी पोस्ट में किन अन्य धार्मिक स्थलों का जिक्र किया है?
उन्होंने अपनी फेसबुक पोस्ट में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर, अलीगढ़ की जामा मस्जिद, कूर्ग के नामद्रोलिंग मठ, बोधगया के महाबोधि मंदिर और बेसिलिका ऑफ अवर लेडी ऑफ गुड हेल्थ का उल्लेख किया। उनका तर्क है कि इन स्थलों के पास भी भारी संपत्ति और संसाधन हैं, लेकिन सार्वजनिक बहस में केवल हिंदू मंदिरों को ही घसीटा जाता है, जो गलत है।
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