सड़कों के निर्माण पर ईरान- अमेरिका युद्ध ने लगाया ब्रेक, कहीं धीमा तो कहीं ठप हुआ काम
News in Short
- डामर की कीमतों में 4,000-5,000 रुपए प्रति टन की बढ़ोतरी हुई।
- अमृत 2.0 परियोजना की सड़कों की मरम्मत बजट से बाहर हो गई।
- भोपाल मेट्रो के नीचे की सड़कें जर्जर, मरम्मत का काम लंबित है।
- कंक्रीट सड़कों का विचार, लेकिन शुरुआती लागत और समय अधिक है।
- डामर की कमी से भविष्य की परियोजनाओं पर संकट मंडरा रहा है।
News in Detail
BHOPAL. मध्य प्रदेश में सड़क निर्माण के काम ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध से अटक गए हैं। सड़क निर्माण में उपयोगी डामर की उपलब्धता कम घटने से कीमत बढ़ गई है।
मंहगे डामर के कारण सड़क निर्माण कार्य की लागत बढ़ने की स्थिति के चलते ठेकेदारों ने काम रोक दिए हैं। इसका असर नगरीय निकायों के अलावा लोक निर्माण विभाग के निर्माण की रफ्तार पर नजर आ रहा है।
अमेरिका- ईरान युद्ध ने पेट्रोलियम पदार्थों की किल्लत बढ़ा दी है। पेट्रोल पम्प और गैस एजेंसियों पर ईंधन की कमी के बाद प्रदेश के निर्माण कार्यों पर भी इसका असर नजर आने लगा है।
युद्ध की वजह से डामर की कमी हो गई है। निर्माण एजेंसियों को पिछले महीने तक जिस कीमत और मात्रा में डामर उपलब्ध हो रहा था अब उसकी कीमतें कहीं ज्यादा बढ़ गई हैं।
इस बढ़ी हुई कीमत पर डामर खरीदकर सड़क निर्माण करने से ठेकेदार पीछे हट रहे हैं। घाटे की आशंका को देखते हुए ज्यादातर ठेकेदारों ने सड़क निर्माण की गति धीमी कर दी है। जबकि छोटी सड़क बनाने वाले ठेकेदार तो काम बंद करके ही बैठ गए हैं।
एक माह में उछले डामर के रेट
डामर की कीमतों में हाल ही में हुई रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि ने शहर की सड़कों की स्थिति को प्रभावित किया है। डामर कच्चे तेल का सह-उत्पाद है, जो सड़क निर्माण के लिए इस्तेमाल होता है।
मार्च 2026 में इसकी कीमत में 4,000 से 5,000 रुपए प्रति टन तक की बढ़ोतरी देखी गई है, जिसका कारण पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और कच्चे तेल की सीमित आपूर्ति को माना जा रहा है।
सड़क निर्माण के काम पिछड़े
वृद्धि का सीधा असर भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, रीवा, सतना, सागर जैसे बड़े नगर निगम क्षेत्रों सहित प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में हुआ है। वहीं पीडब्ल्युडी, एमपीआरडीसी जैसी सड़क निर्माण कराने वाली सरकारी एजेंसियों के ठेकों पर भी इसका प्रभाव नजर आ रहा है।
भोपाल में अमृत 2.0 योजना के तहत बिछाई जा रही 700 किलोमीटर लंबी सीवेज लाइन का काम भी धीमा हो गया है। ठेकेदार फर्म लाइन बिछाने के बाद डामर की सड़क बनाने से बचने के लिए काम धीमी रफ्तार से करा रही है। वहीं जिन क्षेत्रों में पिछले महीने लाइन बिछाई गई हैं वहां सड़क के निर्माण का काम पिछड़ गया है।
भोपाल में मेट्रो प्रोजेक्ट पर असर
मेट्रो कॉरिडोर भी अब जर्जर सड़कों से जूझ रहा है। पुराना भोपाल क्षेत्र में जिन जगहों पर मेट्रो के लिए खुदाई की गई थी उन हिस्सों का डामरीकरण अटका हुआ है। ठेकेदार मंहगे डामर से इन हिस्सों में सड़क की मरम्मत करने से बच रहे हैं। इससे वाहन चालकों को धूल की समस्या सता रही है।
सड़क मेंटेनेंस से पीछे हटे ठेकेदार
भोपाल नगर निगम में राजधानी क्षेत्र की क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए 30 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी। टेंडर के बाद ठेकेदारों काम शुरू करते उससे पहले ही डामर की कीमतों में उछाल आ गया।
अब ठेकेदार नगर निगम से निर्माण लागत बढ़ने की स्थिति में एसओआर में इजाफे की मांग कर रहे हैं। इसका दबाव बनाने के लिए काम भी रोक दिए गए हैं। उधर जिलों में ग्रामीण सड़कों के अलावा पूर्व से चल रहे जिला मार्ग, स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे के प्रोजेक्ट की गति भी धीमी हो गई है।
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