विवाह में फेरे की जगह रील बनाने में बिता रहे समय, इसलिए हो रहे तलाक: संत-पुजारी
भोपाल के हिंदी भवन में आयोजित कार्यक्रम में संतों को सम्मानित किया गया। इस दौरान हिंदुओं के संत समाज ने सनातन समाज के विवाह संस्कार को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा है कि आधुनिकता का प्रभाव समाज में गहरी छाप छोड़ता नजर आ रहा है। जहां एक ओर शादी के मंडप में फेरों और मंत्रोच्चार के समय जल्दबाजी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर वरमाला के दौरान फोटोशूट, नृत्य, और संगीत पर घंटों खर्च किए जा रहे हैं। यह मुद्दा मध्य प्रदेश संत पुजारी संघ के स्थापना दिवस पर उठाया गया, जहां संतों और विद्वानों ने इस प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि ऐसे व्यवहार से दांपत्य जीवन में विकृतियां आ रही हैं, जिससे विवाह संस्कार का असल महत्व खो रहा है।
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विवाह संस्कार की परंपरा और आवश्यकता
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समाज और देश सेवा की दिशा में पहल
संतों ने ब्राह्मण समाज की एकता को मजबूत करने के साथ-साथ सनातन संस्कृति की रक्षा के प्रयासों को तेज करने की अपील की। पं. राजौरिया ने एक संतान को समाज और देश सेवा के लिए समर्पित करने का आह्वान किया। इस दिशा में संतों और पुजारियों ने समाज में जागरूकता फैलाने की दिशा में काम करने का संकल्प लिया।
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धार्मिक स्थल प्रबंधन और पुजारियों के अधिकार
संतों और पुजारियों ने कार्यक्रम में देव स्थान उत्थान बोर्ड और हिंदू धार्मिक स्थल प्रबंधन बोर्ड बनाने की मांग की। इसके अलावा, उन्होंने मंदिरों के पुजारियों के मानदेय में वृद्धि की मांग की और जिन पुजारियों को मानदेय नहीं मिल रहा है, उन्हें जल्द से जल्द दिए जाने की अपील की।