इंदौर प्रशासन भूमाफिया चंपू पर मेहरबान, तहसीलदार ने झूठ बोलकर सीएम हेल्पलाइन बंद की
इंदौर पुलिस की तरह ही जिला प्रशासन ने भी हाईप्रोफाइल मामलों में बड़ों को बचाने का काम शुरू कर दिया है। इंदौर के सबसे चर्चित भूमाफिया चंपू उर्फ रितेश अजमेरा को लेकर साल भर से शिकायतों का दौर चल रहा है। लेकिन 100 से ज्यादा अवैध कॉलोनी का केस दर्ज करने वाले कलेक्टोरेट के अधिकारियों ने ना अवैध कॉलोनी का केस बनाया और ना ही वहां हो रही अवैध प्लॉटिंग, बिक्री को रोका। हद तो यह हो गई कि तहसीलदार साहब ने चंपू के लिए सीएम हेल्पलाइन ही झूठ बोलकर बंद कर दी।
यह है मामला
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अब तहसीलदार की जादूगरी देखिए
दो आवेदक रामकृष्ण और अंकित परमार ने इसी 292 सर्वे नंबर के पास दूसरे सर्वे नंबर में विधिक प्लॉट 1059 नीलू राठौर से खरीदा था। जब इन्होंने यहां निर्माण शुरू करने की कोशिश की तो गनमैन ने आकर जो चंपू अजमेरा का आदमी था, ने निर्माण से रुकवा दिया। इसकी शिकायत इन्होंने तहसीलदार कमलेश कुशवाहा के पास की ही थी कि दो घंटे में ही उन्होंने तत्काल चंपू को अपने दफ्तर में बुलाकर आवभगत की, इस पर भी द सूत्र ने सवाल किया तो बोले शिकायत आई थी इसलिए पक्ष सुनने के लिए बुला लिया। लेकिन इसके बाद भी पीड़ितों को न्याय नहीं मिला तो दोनों ने सीएम हेल्पलाइन में अवैध कब्जे की शिकायत कर दी।
इस पर अब तहसीलदार कुशवाह के ऑफिस से अंकित को फोन गया और सीएम हेल्पलाइन को लेकर कहा कि इसे बंद कर दें, फिर झूठा बोला कि आप यह कर दो आपकी शिकायत का निराकरण अभी हो रहा है, हम कब्जा हटवा देंगे। उनसे ओटीपी ले लिया और शिकायत बंद कर दी। झूठ बोलकर शिकायत बंद कर दी। वहीं रामकृष्ण उनके झूठ में नहीं फंसा, वह शिकायत सीएम हेल्पलाइन में जारी है। चंपू के फेवर में खुलकर काम करते हुए तहसीलदार ने शिकायत का निराकरण कर दिया और मौके पर कोई जांच नहीं कराई।
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इसके पहले पटवारी को हटवाया
चंपू की मिलीभगत इतनी अधिक है कि इसके पहले के पटवारी को उनके हिसाब के काम नहीं करने देने के चलते उसे हटवा दिया गया। इसके बाद पटवारी आए सुमेर सिंह मीणा, जो खुलकर चंपू के लिए काम कर रहे हैं और प्रतिवेदन बनाकर उनके खिलाफ आई शिकायतों को बंद करा रहे हैं।
अब आते हैं पंजीयन विभाग पर, यहां तो गजब खेल
अब बात करते हैं पंजीयन विभाग की। जिनका काम है क्रिएशन ऑफ ऑनरशिप देखना, यानि यदि कोई संपत्ति बेच रहा है तो उसे उसके राइट है या नहीं यह देखना उप पंजीयक और पंजीयक का काम होता है। वह अभी रजिस्ट्री रोकने के अधिकार नहीं होने का बोलकर पल्ला झाड़ते हैं लेकिन जहां करना होती है, मिलीभगत होती है वहां कर भी देते हैं। इस मामले में पंजीयन कार्यालय तीन की उपपंजीयक ज्योति रावत ने क्रिएशन ऑफ ऑनरशिप देखा ही नहीं और यहां लिगेसी इन्फ्रा द्वारा लाए गए दस्तावेज को धड़ल्ले से रजिस्ट्री करती चली गई।
थाने में पीड़ितों के आवेदन में कई बातें साफ
लसूडिया पुलिस के पास इस मामले में प्लॉट के पीड़ितों ने शिकायत दी है। इसमें साफ कहा गया है कि रितेश अजमेरा के गनमैन ने उन्हें पहले फरवरी में धमकाया था। इसके बाद हमने तहसीलदार को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की थी। उन्होंने हमें कब्जा सौंपा जाना बता दिया। इस जमीन पर कब्जे के लिए फिर हम रविवार को गए तो वहां पर गनमैन आ गया और कहा कि भाग जाओ नहीं तो गोली मार दूंगा। मेरे बॉस रितेश अजमेरा ने कहा है कि कोई भी आए तो गोली मार देना। तहसीलदार को भी हमने फोन किया लेकिन उन्होंने बात सुनने के बाद भी फोन काट दिया। जबकि उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर हमें कब्जा मिलना बताया है।
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