पूर्व मुख्य सचिव के करीबी रहे रमेश बदलानी का स्कूल सौ करोड़ की सरकारी जमीन पर, बेदखली का नोटिस
इंदौर। मॉडर्न मेडिकल कॉलेज में धोखाधड़ी के आरोपों और एफआईआर के बाद विवादों में आए डॉ. रमेश बदलानी का नेशनल पब्लिक स्कूल अब हटाया जाएगा। एयरपोर्ट रोड स्थित इस स्कूल को लेकर जिला प्रशासन की जांच में पता चला है कि यह सरकारी जमीन पर बना हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, इस जमीन की कीमत 100 करोड़ रुपए से ज्यादा है। इसके बाद तहसीलदार मल्हारगंज ने डॉ. बदलानी के बेटे मोहित बदलानी को नोटिस जारी किया है।
यह है मामला
इंदौर जिला प्रशासन की जांच में सामने आया कि नेशनल पब्लिक स्कूल सर्वे नंबर 107 और 103/1/35 की जमीन पर बना है। रिकॉर्ड में ये दोनों सर्वे नंबर सरकारी जमीन के रूप में दर्ज हैं। जमीन पर कब्जे की शिकायत के बाद जून 2026 में मामला दर्ज कर नोटिस जारी किए गए थे। प्रशासन ने सभी पक्षों से जवाब मांगा था, लेकिन बदलानी पक्ष की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। साथ ही जमीन से जुड़े कोई दस्तावेज भी पेश नहीं किए गए।
इसके बाद यह आदेश दिया
जांच में सामने आया कि इस जमीन पर स्कूल और खेल मैदान बनाकर स्कूल संचालित किया जा रहा है। फिलहाल इसकी संचालिका विजयलक्ष्मी खटवानी हैं। शासन ने स्कूल परिसर को तत्काल हटाने के आदेश दिए हैं। साथ ही सरकारी जमीन पर कब्जा करने के मामले में 95 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।
बदलानी रहे हैं पूर्व मुख्य सचिव के करीबी
बदलानी की एक समय साल 2012 से 2015 के दौरान खासी तूती बोलती थी। मेडिकल कॉलेज खोलने के दौरान दो जमीनों के बीच नाला आने की समस्या सामने आई थी। बताया जाता है कि इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्य सचिव एंटनी डिसा से बात कर राजस्व नियमों में बदलाव करवाया था।
इस बदलाव के बाद दो जमीनों के बीच आने वाले नाले की जमीन को पुलिया बनाने के लिए लीज पर देने का प्रावधान किया गया। इसी आधार पर उन्हें मेडिकल कॉलेज के लिए मंजूरी मिली थी। हालांकि बाद में मेडिकल कॉलेज घोटाले और बैंक लोन घोटाले जैसे मामलों में उनका नाम सामने आया और उनके खिलाफ लगातार कई केस दर्ज होते चले गए।
प्रशासन पर भी सवाल, स्कूल 30 साल से चल रहा
वहीं इस मामले में इंदौर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह स्कूल साल 1994 में शुरू हुआ था और करीब 30 साल से यहां संचालन किया जा रहा है। इस दौरान स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों से करोड़ों रुपए की फीस भी ली जा चुकी है। सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक सरकारी जमीन पर कब्जे की जानकारी क्यों नहीं हुई और अब सिर्फ बेदखली नोटिस और 95 हजार रुपए के अर्थदंड तक ही कार्रवाई क्यों सीमित है।
इसी तरह सरकारी श्रीराम मंदिर की जमीन के मामले में भी कार्रवाई को लेकर सवाल उठे थे। वहां भी सिर्फ बेदखली नोटिस जारी किया गया, जबकि आरोप है कि विधायक के रिश्तेदार यहां से हर साल 36 लाख रुपए किराया वसूल रहे थे। नियमानुसार सरकारी जमीन से हुई कमाई सरकारी खाते में जमा होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों से इसकी वसूली की जानी चाहिए। Indore News
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