भागीरथपुरा में स्वास्थ्य सर्वे की जमीनी हकीकत, हजारों घरों के सर्वे का दावा, जहां 20 से अधिक मरीज वहां पर ही नहीं पहुंची टीम

Rahul Dave | Jan 08, 2026, 11:24 IST
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इंदौर के भागीरथपुरा में स्वास्थ्य विभाग 26 हजार घरों के सर्वे का दावा कर रहा है। जमीनी हकीकत इसके उलट है। स्वास्थ्य केंद्र के पास स्थित गलियों में ही टीमें नहीं पहुंची हैं। पूरा मामला जानने के लिए खबर आखिरी तक पढ़ें।

5 पॉइंट में समझें खबर के मायने...



  • भागीरथपुरा में दूषित पानी से फैली बीमारी ने विकराल रूप ले लिया है।
  • भागीरथपुरा स्वास्थ्य केंद्र से 200 मीटर दूर की गली में ही सर्वे नहीं हुआ।
  • चावला जी की गली में 16 परिवारों के बीच 20 से अधिक लोग बीमार।
  • स्वास्थ्य विभाग का 26 हजार घरों में सर्वे पूरा करने का दावा है।
  • मरीजों के डिस्चार्ज होने के बाद भी विभाग ने कोई फॉलोअप नहीं किया ।

Indore News:इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से फैली बीमारी ने अनेक लोगों की जान ले ली। सैकड़ों लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। गंभीर स्वास्थ्य संकट की स्थिति के बाद हजारों घरों के सर्वे की जमीनी हकीकत उजागर हुई है।



इस क्षेत्र की एक गली ऐसी है, जहां 20 से अधिक मरीज हैं, लेकिन सर्वे टीम वहां पर पहुंची ही नहीं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा दावा किया जा रहा रहा है कि अब तक 26 हजार घरों का सर्वे किया जा चुका है। ऐसे में सर्वे और निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।



न सर्वे किया, न पानी के सैंपल लिए

भागीरथपुरा स्वास्थ्य केंद्र से महज 200 मीटर दूर स्थित चावला जी की गली इसका बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है। इस गली में 16 परिवार रहते हैं और बीते दिनों में यहां 20 से अधिक लोग उल्टी-दस्त से बीमार हो चुके हैं।



इनमें से दो मरीज फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं। एक मरीज हाल ही में उपचार के बाद घर लौटा है। इसके बावजूद न तो स्वास्थ्य सर्वे टीम यहां पहुंची और न ही पानी के सैंपल लेने कोई अधिकारी आया।



लोग बोले - कागजों में सर्वे, गलियों में इंतजार

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार के तहत गठित करीब सात टीमें भागीरथपुरा क्षेत्र में लगातार सर्वे कर रही हैं। विभाग का कहना है कि जिन घरों में मरीज मिलते हैं, उनके आसपास के 50 घरों का भी सर्वे किया जा रहा है। लेकिन चावला जी की गली में रहने वाले लोगों का कहना है कि यह दावा केवल कागजों तक सीमित है।



रहवासी कर रहे इंतजार

स्थानीय रहवासी बताते हैं कि बीमारी फैलने के बाद से वे स्वास्थ्यकर्मियों का इंतजार कर रहे हैं, ताकि दवाइयां मिल सकें और पानी की जांच हो सके। अब तक कोई भी टीम गली में नहीं पहुंची। इससे लोगों में नाराजगी के साथ-साथ डर भी बढ़ता जा रहा है कि कहीं हालात और बिगड़ न जाएं।



मरीज भी भर्ती फिर भी फालोअप नहीं

बीमारी से जूझ रहे मरीजों की शिकायतें भी स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं। स्थानीय निवासी नेहा, जो पिछले चार दिनों से एलआईजी क्षेत्र के एक निजी क्लीनिक में भर्ती हैं। नेहा बताती हैं कि उनके घर पर न तो सर्वे हुआ और न ही किसी स्वास्थ्यकर्मी ने संपर्क किया।



इसी तरह, ललिता कौशल, जो दो दिन पहले अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर लौटी हैं, कहती हैं कि इलाज के बाद किसी तरह का फॉलोअप नहीं लिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि मरीज मिलने के बाद भी न तो आसपास दवाइयों का छिड़काव हुआ और न ही लोगों को साफ पानी और स्वच्छता को लेकर कोई ठोस मार्गदर्शन दिया गया।



पानी की जांच पर भी उठे सवाल

स्थानीय निवासी चावला जी की गली के रहवासियों का आरोप है कि यहां न तो निगम की जल विभाग टीम आई और न ही स्वास्थ्य विभाग ने पानी की गुणवत्ता जांचने की पहल की। लोगों का कहना है कि जब तक पानी के स्रोत की जांच नहीं होगी, तब तक बीमारी पर काबू पाना मुश्किल है।



रहवासियों की चिंता बरकरार

गली में सर्वे टीम के नहीं पहुंचने के चलते रहवासियों की चिंता बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि गली में मरीज हैं। इसके बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।



आज से करेंगे लार्वा नष्ट

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, गुरुवार से मलेरिया विभाग की टीम भागीरथपुरा में सर्वे और रोकथाम कार्य शुरू करेगी। करीब 40 सदस्यों की यह टीम गंदगी वाले स्थानों पर लार्वा नष्ट करने की दवा का छिडक़ाव करेगी और डेंगू-मलेरिया से बचाव को लेकर लोगों को जागरूक करेगी।



केवल इससे नहीं होगा समाधान

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब मूल बीमारी दूषित पानी से फैल रही है, तब केवल मच्छरजनित रोगों की रोकथाम से समस्या का पूरा समाधान नहीं होगा। जरूरत है कि स्वास्थ्य, जल विभाग और नगर निगम मिलकर समन्वित कार्रवाई करें।



जमीनी सच्चाई हुई उजागर

भागीरथपुरा का यह मामला प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करता है। एक ओर हजारों घरों में सर्वे पूरा होने के आंकड़े पेश किए जा रहे हैं, दूसरी ओर मरीजों से भरी गलियां आज भी स्वास्थ्य टीमों का इंतजार कर रही हैं। लोगों का कहना है कि जब तक हर प्रभावित गली और हर मरीज तक समय पर मदद नहीं पहुंचेगी, तब तक भागीरथपुरा का स्वास्थ्य संकट खत्म नहीं होगा।



निष्कर्ष- इस खबर का निष्कर्ष यह है कि भागीरथपुरा में स्वास्थ्य संकट के दौरान प्रशासनिक तंत्र और जमीनी वास्तविकता के बीच एक बड़ी खाई नजर आ रही है। जहां एक ओर स्वास्थ्य विभाग 26 हजार घरों के सर्वे के आंकड़े पेश कर रहा है। वहीं स्वास्थ्य केंद्र के बिल्कुल पास स्थित चावला जी की गली जैसे इलाके चिकित्सा सहायता और जल परीक्षण के लिए तरस रहे हैं।



उचित फॉलोअप, पानी की जांच और समन्वित कार्रवाई के अभाव में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इससे स्पष्ट होता है कि केवल कागजी सर्वे से इस दूषित पानी से उपजे गंभीर संकट का समाधान संभव नहीं है।



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